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न्यूयॉर्क: देश में अब तक जो कोई नहीं कर सका, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दिखाया है। मोदी सरकार की पहल के चलते भारत की मातृभाषा हिंदी अब दुनिया के कई देशों में अपना डंका बजाएगी। इसे लेकर भारत और संयुक्त राष्ट्र (संरा) ने संयुक्त राष्ट्र से हिंदी में समाचार प्रसारित करने और हिंदी भाषा के जरिये लोगों के बीच पहुंच बढ़ाने संबंधी एक समर्पित परियोजना को नवीनीकृत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। अब हिंदी एक वैश्विक आवाज बन सकेगी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.हरीश और संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग की अवर महासचिव मेलिसा फ्लेमिंग ने बुधवार को भारत के स्थायी मिशन में आयोजित एक समारोह में एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2030 तक पांच साल की अवधि के लिए ‘हिंदी@संयुक्त राष्ट्र’ परियोजना को नवीनीकृत करने वाले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए पांच वर्षों के लिए प्रति वर्ष 15 लाख अमेरिकी डॉलर देने की बात कही है।
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दुनिया भर में हिंदी भाषी लोगों के बीच हिंदी भाषा से फैलेगी जागरूकता
फ्लेमिंग ने वर्तमान समय में सोशल मीडिया के महत्व पर जोर दिया और सोशल मीडिया के उपयोग को अधिकतम करके कार्य्रकम के माध्यम से हिंदी में संदेश प्रसारित करने के डीजीसी के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया। इस अवसर पर हरीश ने कहा कि समझौता ज्ञापन का नवीनीकरण भारत सरकार की हिन्दी को अधिक से अधिक महत्व देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र में गैर-आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में इसे शामिल करना शामिल है। इस कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी आदि शामिल हुए। ‘हिंदी@संयुक्त राष्ट्र’ परियोजना को संयुक्त राष्ट्र के लोक सूचना विभाग के सहयोग से 2018 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य हिंदी भाषा के जरिए संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक पहुंच को बढ़ाना और दुनिया भर के लाखों हिंदी भाषी लोगों में वैश्विक मुद्दों के बारे में अधिक जागरुकता फैलाना है।