योगी का नया बुंदेलखंड

रिपोर्ट- डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

कभी बुंदेलखंड अपनी समृद्धि व शौर्य के लिए विख्यात था,लेकिन पिछले कई दशकों से पानी का संकट इसकी पहचान बन गया। इसके प्रतिकूल प्रभाव कृषि पशुपालन आदि पर भी पड़ना स्वभाविक था। पिछली सरकारों में दावे और वादे बहुत हुए,लेकिन जमीन पर कोई अंतर दिखाई नहीं दिया। यूपीए सरकार ने यहां के लिए बुंदेलखंड पैकेज दिया था। इसे सरकार ने अपनी उपलब्धि में शामिल किया। लेकिन बुंदेलखंड के लोगों की कोई उपलब्धि नहीं हुई। उसी दौरान मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने अपने इलाके के बुंदेलखंड में अनेक विकास कार्य किये। जल संरक्षण व कम पानी की फसलों पर जोर दिया गया।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड के विकास पर शुरू से ही ध्यान दिया। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भी इसके लिए कटिबद्ध रही है। योगी आदित्यनाथ ने बुंदेलखंड विकास बोर्ड का गठन किया। पानी संकट और अन्ना पशुओं की समस्या के समाधान हेतु अनेक कदम उठाए गए है। योगी आदित्यनाथ ने यहां के प्रत्येक घर में नल से जल पहुंचाने का वादा किया था। उस दिशा में सरकार प्रयास कर रही थी। उन्होंने हर घर तक नल का जल परियोजना का शूभारम्भ किया। दस हजार एक सौ इकतीस करोड़ की यह प्यासे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने का काम करेगी।

पहले चरण में बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के लिए दो हजार एक सौ पच्चासी करोड़ की परियोजना की शुरूआत होगी। इससे महोबा,ललितपुर और झांसी की चौदह लाख की आबादी तक नल का जल पहुंचेगा। सरफेस वॉटर और अंडरग्राउंट वॉटर के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाया जाएगा। अगले दो वर्ष में बुंदेलखंड और फिर विंध्यांचल के हर घर तक पीने का पानी पहुंचाया जाएगा। नरेंद्र मोदी सरकार हर घर नल का जल अभियान चला रही है।बुंदेलखंड, विंध्याचल व इंसेलाइटिस प्रभावित क्षेत्रों और आर्सेनिक एवं फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों को इसका बहुत लाभ मिलेगा योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि बुंदेलखंड में कोई भी प्यासा नहीं रहे। इसी के अनुरूप कार्ययोजना बनाई जा रही थी। योगी आदित्यनाथ ने झांसी में इस परियोजना का शिलान्यास किया। इसी के साथ महोबा के करीब पन्द्रह करोड़ रुपये लागत की तीन ग्राम समूह पेयजल परियोजनाओं का भी शिलान्यास हुआ।

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मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से संवाद कर सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के सम्बंध में फीडबैक भी प्राप्त किया। योजना के तहत सर्फेस वाटर और भूजल से पेयजल पहुंचाया जाएगा। इस अभियान में पन्द्रह हजार करोड़ रुपए की लागत से पहले चरण में बुंदेलखंड और विंध्याचल में अगले दो साल के भीतर हर घर पीने का पानी पहुंचेगा।

योजना के दूसरे चरण में विंध्याचल क्षेत्र के जिलों सोनभद्र और मिर्जापुर में हर घर तक पीने का पानी पहुंचाया जाएगा। तीसरे चरण में जापानी बुखार और इंसेफलाइटिस से प्रभावित क्षेत्रों गोरखपुर, महराजगंज,कुशीनगर, संतकबीरनगर,बस्ती व देवरिया में इस योजना के तहत पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। योजना के चौथे व अंतिम चरण में आर्सेनिक व फ्लोराइड से प्रभावित गंगा यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों में पेयजल योजना पहुंचेगी।

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