Gomti Conservation : लोक भारती का गोमती संरक्षण सप्ताह
Gomti Conservation : लोक भारती का गोमती संरक्षण सप्ताह

Gomti Conservation : लोक भारती का गोमती संरक्षण सप्ताह

लखनऊ। आदि गंगा गोमती को स्वच्छ एवं निर्मल और अविरल बनाने के लिए लोक भारती के Gomti Conservation गोमती संरक्षण सप्ताह के तीसरे दिन डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया ।

Gomti Conservation : गोमती पुनर्जीवन पर हुआ विमर्श

गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत के दलदली क्षेत्रों से हुआ जो उत्तर प्रदेश के कई जिलों के जीव जंतुओं के जीवन यापन का एक प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में इसकी स्थिति बहुत दयनीय है,जिसका प्रमुख कारण भूजल दोहन कीटनाशकों का प्रयोग जल कल-कारखानों से निकला हुआ कचरा, प्लास्टिक, पॉलिथीन नदी में फेंका जाना।

गोमती की इस वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग में लोकभारती द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका विषय ‘सोशियो इन्वायरमेंटल डायमेंशन ऑफ रिज्यूमे नेट इन रिवर गोमती‘ रहा।

उद्घाटन सत्र में जिलाधिकारी लखनऊ कौशल राज शर्मा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और आसमा सिंह गेस्ट ऑफ ऑनर रहे। पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डीपी सिंह, प्रोफेसर एके द्विवेदी, डॉ वेंकटेश दत्ता, विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर आरबी राम तथा लोक भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री बृजेंद्र सिंह की उपस्थिति में कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला के दो टेक्निकल सत्र हुए जिसमें रविंद्र कुमार, धर्मेंद्र मल्होत्रा तथा सुश्री अनुराधा गुप्ता मुख्य वक्ता रहे।

कार्यशाला में लगभग 100 से अधिक छात्र छात्राओं ने भाग लिया तथा महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। गोमती नदी के जीणोद्धार विषय पर वक्ताओं ने महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की तथा नदियों के प्रबंधन गोमती में प्रभाव पर स्थित की सहायक नदियों गोमती के जीवन में योगदान पर विचार व्यक्त किए। गोमती नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों पर विमर्श हुआ।

सामाजिक प्रतिभागिता को बढ़ाना होगा- कौशल राज

इस संदर्भ में जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने नदियों के लिए भारत सरकार तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में प्रकाश डालते हुए कहा कि गोमती नदी को पाने के लिए हमें सामाजिक प्रतिभागिता को बढ़ाना होगा और गांव स्तर पर छोटे-छोटे समूह बनाकर लोगों को जागरुक करना होगा ताकि प्रदूषण को रोककर नदियों को हम पुनः निर्मल प्रभाव लौटा सके तथा उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे प्रयासों को सदैव सरकार तथा प्रशासन का समर्थन प्राप्त रहेगा।

छात्र संसद में प्रदूषण रोकने की तकनीकी पर चर्चा

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में छात्र संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने भाग लेते हुए प्रस्तुत किए तथा अपने क्षेत्र में नदियों से संबंधित आपदाओं का जल संचयन सिंचाई परियोजना तथा छोटे किसानों द्वारा प्रदूषण को रोकने के लिए तकनीकी चर्चा कर जीवंत बनाया।

आईपीएस महेंद्र मोदी प्राकृतिक खेती जैसे उपायों पर बल देने पर जोर दिया। गोमती युवा संसद कार्यक्रम में संयोजक डॉ दीपा द्विवेदी तथा प्रभारी डॉ डीपी सिंह थे। इसमें मुख्य रूप से कार्यक्रम संयोजक शेखर त्रिपाठी, लोक भारती के संपर्क प्रमुख श्रीकृष्ण चौधरी तथा मीडिया प्रमुख डा नवीन सक्सेना उपस्थित रहे।

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