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रोजगार के साथ, मानव सेवा व भारतीय संस्कार की शिक्षा भी देगी राष्ट्रीय शिक्षा नीति

लखनऊ। संत रामकृष्ण कन्या महाविद्यालय बल्केश्वर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति: 2020 पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में 8 राज्यों से 9 विश्वविद्यालयों के 11 रिसोर्स पर्सन सहित 450 से अधिक शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। शिक्षा नीति पर शोध परक विचार साझा किए गए।

संत रामकृष्ण कन्या महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में 8 राज्यों से 9 विश्वविद्यालयों के 450 से अधिक शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर किये विचार साझा।

कुल 61 शोध पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 42 शोध पत्रों का वाचन किया गया और 17 शोध आलेखों पर आधारित द्विभाषी अंतर्राष्ट्रीय जर्नल ‘जागृति’ का प्रकाशन कर समापन समारोह में लोकार्पण किया गया।

शनिवार शाम समापन पर रोहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के डॉ0 विमल कुमार ने दो दिनी सेमिनार के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि #राष्ट्रीय_शिक्षा_नीति में रोजगार के साथ जनसेवा और भारतीय संस्कार की शिक्षा भी अंतर्निहित है। भारतीय संस्कृति में सबको समर्थ बनाने का सामर्थ्य है। यह राष्ट्रीय सेमिनार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के इस दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करने में सार्थक भूमिका अदा करेगी।उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी उद्यमिता को पहचान कर जॉब सीकर नहीं, जॉब क्रिएटर बनें। शिक्षक विद्यार्थियों को सुलाने का नहीं जगाने का काम करें।

इससे पूर्व तकनीकी सत्रों में रोहेलखंड यूनिवर्सिटी बरेली के डॉ. रश्मि रंजन ने समावेशी शिक्षा तथा एनसीईआरटी भोपाल के डॉ सौरभ मिश्रा ने रचनात्मक मूल्यांकन पर प्रकाश डाला। रोहेलखंड यूनिवर्सिटी बरेली की डॉ कीर्ति प्रजापति ने एक से अधिक भाषा सीखकर विद्यार्थी की ओवरऑल बेहतर परफॉर्मेंस पर प्रकाश डाला।

जम्मू कश्मीर से आए रिसर्च स्कॉलर इनामुल हक ने पहाड़ी कम्युनिटी में शिक्षा के विकास पर रिसर्च पेपर प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब तक पहाड़ी भाषा बोलने वाली पहाड़ी कम्युनिटी को शेड्यूल ट्राइब का दर्जा केंद्र सरकार द्वारा प्रदान नहीं किया जाएगा, तब तक उनकी शिक्षा का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में केंद्र की भाजपा सरकार का रुख बेहद सकारात्मक है।

शोधार्थी ज्योति गुप्ता और प्रज्ञा शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस सेमिनार को शिक्षकों और विद्यार्थियों के विकास के लिए बेहतर प्लेटफार्म बताया।

ज्योति गुप्ता को मिला बेस्ट पेपर पढ़ने का अवार्ड:
दो दिवसीय सेमिनार में डीईआई दयालबाग के अर्थशास्त्र विभाग की शोध छात्रा ज्योति गुप्ता द्वारा “आगरा जिले में नई शिक्षा नीति के संबंध में जन जागरूकता” विषय पर पढ़े गए शोध पत्र को सर्वोत्तम शोध पत्र के रूप में चुना गया और उन्हें प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इन्हें मिला स्वामी विवेकानंद अवार्ड: एनएसएस कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर रामवीर सिंह, सेंट जॉन्स कॉलेज में वाणिज्य संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर रोहित सिन्हा, सीए राजेश मल्होत्रा, इंटीरियर डिजाइनर तरुण वाधवा, नेशनल शूटर सोनिया शर्मा और बैकुंठी देवी कॉलेज की प्रोफेसर सुनीता चौहान को उनकी उपलब्धियों के लिए स्वामी विवेकानंद अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।

संत रामकृष्ण कन्या महाविद्यालय के चेयरमैन मनमोहन चावला, प्राचार्य डॉक्टर मोहिनी तिवारी और मुख्य अतिथि व केंद्रीय हिंदी संस्थान के कुलसचिव डॉ चंद्रकांत त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से इन सभी को शॉल, माला और अभिनंदन पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इनके साथ ही डॉ संतोष गाबा, साहित्य सेवी आदर्श नंदन गुप्त, डॉ रमेश तनेजा और डॉ. बृजेश शर्मा का भी स्वागत किया गया।

यह भी रहे प्रमुख रूप से शामिल: इस दौरान महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के डॉ प्रमोद जोशी, इंदिरा गांधी नेशनल ट्राईबल यूनिवर्सिटी मध्यप्रदेश के डॉ रमेश, रोहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की डॉ कीर्ति प्रजापति, एनसीआरटी भोपाल के डॉ सौरभ कुमार, रोहेलखंड विश्वविद्यालय के डॉ रश्मि रंजन, ज्ञान महाविद्यालय अलीगढ़ के डॉo गौतम गोयल, डीईआई दयालबाग के डॉ एके कुलश्रेष्ठ व डॉo केसी वशिष्ठ भी मंच पर मौजूद रहे।
महाविद्यालय के निदेशक रविकांत चावला और शिक्षिका पिंकी

वर्मा ने संचालन किया। आयोजन सचिव डॉ एके अग्रवाल, डॉo गुरु प्रसाद, सौरभ शाक्य, डॉ सुषमा सत्संगी, डॉ रागिनी मित्तल, डॉ चांदनी गौड़, डॉ संगीता सिंह और निरोज यादव ने व्यवस्थाएं संभालीं। (ब्यूरो)

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