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भवतु सब्ब मंगलम का विचार

डॉ दिलीप अग्निहोत्रीलखनऊ के लोकभवन आध्यात्मिक वातावरण का साक्षी बना। अवसर था डॉ आंबेडकर सांस्कृतिक केंद्र के शिलान्यास का। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वर्चुअल माध्यम से शिलान्यास किया। इसके पहले स्वस्ति वाचन ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। गौतम बुद्ध किसी को मानसिक पीड़ा पहुंचाना भी पाप समझते थे। प्राणिमात्र के प्रति उन्होंने अहिंसा का सन्देश दिया। इसमें किसी के प्रति ईर्ष्या द्वेष को अनुचित माना गया। सर्वमंगल का कामना की गई।

राष्ट्रपति इस वातावरण से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इसअवसर पर स्वस्ति वाचन व बौद्ध भिक्षुओं के संगायन तथा परिपाठ से एक आध्यात्मिक वातावरण सृजित हो गया। बौद्ध भिक्षुओं के गायन में जिस भवतु सब्ब मंगलम शब्द का उल्लेख हुआ है,बाबा साहब इसे बार बार दोहराते थे। भवतु सब्ब मंगलम’ का अर्थ है सबकी भलाई। बाबा साहब तर्क दिया करते थे कि लोकतंत्र में सरकारों का दायित्व है कि सबकी भलाई के लिए कार्य करें।

वर्तमान सरकार भवतु सब्ब मंगलम के मूलभाव को साकार कर रही है।उनके जीवन मूल्यों और आदर्शाें के अनुरूप समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करने में ही हमारी वास्तविक सफलता है। इस दिशा में हमने प्रगति की है,किन्तु हमें अभी और आगे जाना है। उनके आदर्शाें पर आगे चलते हुए हम समता,समरसता, सामाजिक न्याय पर आधारित सशक्त और समृद्ध भारत के निर्माण में सफल होंगे।

स्नेह भूमि लखनऊ

राष्ट्रपति ने कहा कि लखनऊ शहर से भी बाबा साहब डाॅ आंबेडकर का खास सम्बन्ध रहा है,जिसके कारण लखनऊ को बाबा साहब की स्नेह भूमि भी कहा जाता है। बाबा साहब के लिए गुरु समान,बोधानन्द जी और उन्हें दीक्षा प्रदान करने वाले भदंत प्रज्ञानन्द जी,दोनों का निवास लखनऊ में ही था। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के स्मारक के रूप में सांस्कृतिक केन्द्र का निर्माण करने की उत्तर प्रदेश सरकार की पहल सराहनीय है।

प्रस्तावित शोध केन्द्र बाबा साहब की गरिमा के अनुरूप उच्च स्तरीय शोध कार्य करे और शोध जगत में अपनी विशेष पहचान बनाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि यह सांस्कृतिक केन्द्र सभी देशवासियों,विशेष कर युवा पीढ़ी को बाबा साहब के आदर्शाें एवं उद्देश्यों से परिचित कराने में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएगा।उनके विजन में चार सबसे महत्वपूर्ण बातें, नैतिकता,समता, आत्मसम्मान और भारतीयता रहीं।

उन्होंने भगवान बुद्ध के करुणा और सौहार्द के संदेश को अपने जीवन व राजनीति का आधार बनाया। डाॅ आंबेडकर ने भगवान बुद्ध के विचारों को प्रसारित किया। उनके इस प्रयास के मूल में करुणा, बंधुता, अहिंसा, समता और पारस्परिक सम्मान जैसे भारतीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का और सामाजिक न्याय के आदर्श को कार्यरूप देने का उनका उद्देश्य परिलक्षित होता है।

शीघ्र होगा उद्घाटन

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा भारत रत्न डाॅ भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केन्द्र का शिलान्यास हम सभी के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में बाबा साहब की स्मृतियों को जीवन्त बनाए रखने के उद्देश्य से कार्य किया गया है। मध्य प्रदेश स्थित उनका जन्म स्थान महू छावनी, नागपुर में उनकी दीक्षा भूमि, दिल्ली स्थित महापरिनिर्वाण स्थल, मुम्बई में चैत्य भूमि तथा लंदन का वह घर,जहां ब्रिटेन में रहते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई की, को ‘पंच तीर्थ’ के रूप में विकसित किया गया है। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा आज भारत रत्न डाॅ भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केन्द्र का शिलान्यास कराया गया है। उन्होंने कहा कि प्रयास किया जाए कि शीघ्र ही इस केन्द्र का निर्माण कर इसका उद्घाटन भी सम्पन्न किया जाए।

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