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बसपा को बड़ा झटका… दस साल में आधा रह गया जनाधार; 17 सुरक्षित सीटों पर भी 21 लाख से ज्यादा वोट हो गए कम

लखनऊ:  लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी को बड़ा झटका लगा है। बीते 10 साल में उसका जनाधार आधा खत्म हो चुका है। इतना ही नहीं, इस चुनाव में प्रदेश की 17 सुरक्षित सीटों पर उसके 21 लाख से ज्यादा वोट कम हो गए, जो प्रत्याशियों की हार की वजह बन गए। ये वोट सपा-कांग्रेस गठबंधन को ट्रांसफर होने के कयास लगाए जा रहे हैं। बसपा के बीते तीन लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सामने आता है कि वह अपने काडर वोटबैंक को सहेज कर रखने में भी नाकामयाब साबित हुई है।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा को कुल 1,59,14,194 वोट मिले थे, जो इस बार सिमट कर महज 82,53,489 रह गए। पार्टी का आधा वोटबैंक चुनाव-दर-चुनाव विपक्षी दलों के पाले में चला गया। यही वजह है कि बसपा को चुनाव में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है।

सुरक्षित सीटों पर बुरा हाल
बसपा का सुरक्षित सीटों पर बुरा हाल हुआ है। वर्ष 2014 के चुुनाव में उसे सुरक्षित सीटों पर 39,71,139 वोट मिले थे, जबकि हालिया चुनाव में उसे इन सीटों पर केवल 18,24,322 वोट ही मिले हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में बसपा ने 10, जबकि सपा ने सात सुरक्षित सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। भाजपा ने 17 सीटों में से 15 पर जीत दर्ज की थी, जबकि बसपा को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी।

क्या गलत था वोट ट्रांसफर नहीं होने का आरोप
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा पर उसके वोट ट्रांसफर नहीं होने का आरोप लगाकर गठबंधन को तोड़ दिया था। उनका यह फैसला अब सवालों के घेरे में आ चुका है।

बसपा को बीते चुनावों में मिले वोटों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि उसे 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में तकरीबन बराबर वोट मिले थे, जबकि आधी सीटों पर उसने अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। वहीं इस चुनाव में किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करने पर उसके वोट आधे रह गए। उसका कोई भी प्रत्याशी जीत के लायक वोटों के आसपास तक नहीं पहुंच सका।

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