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सीडीओ ने फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कर अभियान का किया शुभारंभ

• फाइलेरिया उन्मूलन के लिए मां काशीराम चिकित्सालय से शुरू हुआ आईडीए अभियान

• सीएमओ, डीएमओ सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भी किया दवा सेवन

• सीडीओ की अपील, आशा कार्यकर्ता के सामने ही करें फाइलेरिया दवा का सेवन

कानपुर नगर। जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सुधीर कुमार ने गुरुवार को मां कांशीराम जिला संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर के सभागार में फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कर फाइलेरिया उन्मूलन अभियान का शुभारंभ किया। मौके पर उन्होंने जिलावासियों से 10 से 28 अगस्त तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए आशा कार्यकर्ता के सामने ही दवा का सेवन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि जिला के सभी प्रखंडों में व्यापक स्तर पर फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम किया जाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ ले सकें। इस दौरान उन्होंने सभी को फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन करने और दूसरों को भी प्रेरित करने हेतु शपथ दिलाई।

इस दौरान कल्याणपुर ब्लॉक में सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) संस्था द्वारा गठित फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट ग्रुप की सदस्य और फाइलेरिया रोगी पूजा सिंह ने बताया कि मुझे करीब 12 सालों से बाएं पैर में फाइलेरिया है। मैं 12 सालों से इस बीमारी के साथ जी रही हूं। इसलिए मैं अब चाहती हूं कि इस बीमारी को लेकर जिन मुश्किलों का सामना मैंने किया है, कोई और उन परेशानियों से न जूझे।

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फाइलेरियारोधी दवा का सेवन जरूर करें। 10 से 28 अगस्त तक फाइलेरिया से बचाव की दवा आशा द्वारा घर-घर खिलाई जाएगी। सभी से मेरी प्रार्थना है कि आप लोग खुद भी यह दवा खाएं, अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी यह दवा खाने के लिए प्रेरित करें।

अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, डॉ अंजू दुबे ने कहा की हमें अपने जिले से ही नहीं इस देश से भी फाइलेरिया रोग का समूल नाश करने के लिए अभियान के दौरान स्वास्थ्य कर्मी के सामने ही दवा का सेवन करना है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अलोक रंजन ने कहा की इस सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम में जनपद में 46.31 लाख लक्षित लाभार्थियों को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए 3702 टीम के माध्यम से बूथ लगा कर एवं घर-घर जाकर इन दवाओं का सेवन सुनिश्चित करवाया जाएगा। दवाओं का वितरण बिल्कुल भी नहीं किया जायेगा।

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए अभियान शुरू

फाइलेरिया उन्मूलन के नोडल व एसीएमओ डॉ आरपी मिश्रा ने बताया कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। साल में एक बार और लगातार तीन साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खाकर ही इस बीमारी से बचा जा सकता है। आईडीए अभियान में आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन और एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। आइवरमेक्टिन ऊंचाई के अनुसार खिलाई जाएगी। एल्बेंडाजोल को चबाकर ही खानी है। फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन एक वर्ष के बच्चों, गर्भवती, एक माह के बच्चे वाली प्रसूता और गंभीर बीमार को छोड़कर सभी को करना है। एक से दो वर्ष की आयु के बच्चों को केवल एल्बेंडाजोल खिलाई जाएगी।

जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह ने बताया कि जनपद की सभी 10 सीएचसी सहित मां कांशीराम जिला संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर, जिला पुरुष अस्पताल, सीएमओ कार्यालय, जिला मुख्यालय, केपीएम अस्पताल, एलएलआर चिकित्सालय, विकास भवन में भी बूथ लगा कर दवा सेवन करवाया जायेगा। साथ ही कहा कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।

हालांकि इन दवाओं का कोई विपरीत प्रभाव नहीं है, फिर भी किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं। ऐसे लक्षण इन दवाओं के सेवन के उपरांत शरीर के भीतर परजीवियों के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं। सामान्यतः ये लक्षण स्वतः समाप्त हो जाते हैं परंतु ऐसी किसी भी परिस्थिति के लिए प्रशिक्षित 63 रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) भी बनाई गई है। आवश्यकता पड़ने पर आरआरटी को उपचार के लिए तुरंत बुलाया जा सकता है।

इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ स्वसदेश गुप्ता , डिप्टी सीएमओ डॉ एसपी यादव, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश्वर, जिला मलेरिया अधिकारी एके सिंह, सहायक मलेरिया अधिकारी यूपी सिंह सहित फाइलेरिया नेटवर्क समूह के सदस्य और सहयोगी संस्था सीफार, पाथ सीएचआरआई के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने दवाओं का देवन किया।

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर

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