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Chikungunya : खुद डॉक्टर तक हो रहे बीमार

जबलपुर। डेंगू और चिकनगुनिया Chikungunya की बीमारी तेजी से शहर से लेकर गांवों तक फैल रही है। क्लीनिक से लेकर अस्पतालों तक मरीजों की कतार लगी है। अब मेडिकल समेत निजी अस्पतालों के डॉक्टर भी इस बीमार की चपेट आते जा रहे हैं। लोक स्वास्थ्य राज्यमंत्री शरद जैन तक यह स्वीकार कर चुके हैं कि बीमारी काफी फैल गई है। बीमारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन फिर भी मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है।

Chikungunya के 32 नए मरीज

इस बीच डेंगू के 13 व Chikungunya चिकनगुनिया के 32 नए मरीज और सामने आए हैं। डेंगू-चिकनगुनिया से पीड़ित मरीजों में अब एक नए तरह का लक्षण देखने को मिल रहा है, जो इस बीमारी से बड़ी परेशानी बना है। इसका कारण एडीज एजिप्टाई मादा मच्छर को बताया जा रहा है। यह मच्छर लोगों के खून में ऐसा वायरस छोड़ रहा है, जो सीधे हड्डियों पर प्रहार करता है। जिस कारण बुखार तो 3 से 4 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन हड्डियों का दर्द ठीक होने में तकरीबन 15 से 20 दिन लग जाते हैं। इन सब के बीच मरीज पैथोलॉजी लैब की मनमानी फीस से भी परेशान हैं। उनका आरोप है कि उनसे मनमाने रुपए वसूले जा रहे हैं। उन्हें बिल भी नहीं दिया जा रहा है।

डेंगू और चिकनगुनिया की जांच के लिए कार्ड और एलाइसा टेस्ट होते हैं। यहां कार्ड टेस्ट निजी पैथोलॉजी में हो रहा है। इस टेस्ट में 5 दिन के पहले ही वायरस की एंटीबॉडी दिख जाती है। लेकिन कई बार कार्ड टेस्ट कराने पर भी बीमारी नहीं मिलती। जबकि लक्षण उसी बीमारी के होते हैं। इसलिए कार्ड टेस्ट का सुनिश्चित करने एलाइसा टेस्ट के लिए एनआईआरटीएच में भेजा जा रहा है।
डेंगू-चिकनगुनिया के ठीक होने के बाद भी एंटीबॉडी खून में रहती है। इससे मरीज ठीक होने के बाद भी यदि रक्त की जांच कराएगा तो उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आएगी। इससे उसे यह लगेगा कि वह ठीक नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा नहीं है, वह ठीक हो चुका होता है। एक से दो महीने तक यह लक्षण मिलते हैं।

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