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मां विंध्यवासिनी के दर्शन को उमड़ी आस्था , बिखरी अलौकिक छटा

– अब नौ दिन तक गुलजार रहेगा विंध्य पर्वत

मीरजापुर। आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी धाम में रविवार को शारदीय नवरात्र मेला शुरू हो गया। अब नौ दिन तक हिन्दुस्थान समाचार आपके साथ मां विंध्यवासिनी के नौ स्वरूपों की कहानी साझा करेगा। पहले दिन मां विंध्यवासिनी के दरबार चलते हैं। यहां रात से ही आस्था का संगम देखने को मिल रहा है। विंध्य पर्वत और मां गंगा के मिलन स्थल विंध्यधाम में मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए श्रद्धालु आने शुरू हो गए हैं। भोर की मंगला आरती के साथ नवरात्र मेले की भी शुरुआत हो गई है।

विश्व प्रसिद्ध विंध्याचल धाम में आधी रात से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। मंगला आरती के बाद से ही श्रद्धालु मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के लिए कतारबद्ध हो गए थे।शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन आदिशक्ति जगत जननी मां विंध्यवासिनी की चौखट पर श्रद्धा, विश्वास व आस्था का समागम दिखा। रविवार तड़के ही मां विंध्यवासिनी के शैलपुत्री स्वरूप के दर्शन को श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। हर कोई मां की झलक पाने को लालायित दिखा। आस्था की डगर पर अलौकिक छटा बिखरी तो नवरात्र मेले की रौनक लौट आई।

आधी रात से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा
हिंदू धर्म में नवरात्र का काफी महत्व है। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। वैसे तो वर्ष भर में कुल चार नवरात्र आती है, जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्र का काफी महत्व होता है। पूरे देश भर में नवरात्र पर्व रविवार से प्रारंभ हो गया है। मीरजापुर जनपद के विंध्याचल धाम में भी मां विंध्यवासिनी के दरबार में आधी रात से ही श्रद्धालुओं का जमघट लगना शुरू हो गया था। मां विंध्यवासिनी के मंगला आरती के बाद से ही दूर-दराज से आए श्रद्धालु लंबी-लंबी लाइनों में लगकर हाथों में नारियल चुनरी लेकर जयकारा लगाते दर्शन पूजन कर रहे हैं।

मां की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालु बेताब दिखे। घंटों लाइन में लगकर बारी-बारी से मां के दरबार में पहुंचकर मां की एक झलक पाकर निहाल हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन शैलपुत्री स्वरूप का भक्त दर्शन-पूजन कर रहे हैं।नवरात्र के पहले दिन मां का दर्शन करने का अपना अलग ही माहात्म्य है। चाहे वह चैत्र नवरात्र हो या शारदीय नवरात्र। प्रथम दिन रविवार भोर से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया।

भोर की मंगला आरती के बाद विंध्यधाम एक बार फिर घंटा-घड़ियाल के बीच मां विंध्यवासिनी के जयकारे से गुंजायमान हो उठा। हाथ में नारियल, चुनरी, माला-फूल प्रसाद के साथ कतारबद्ध श्रद्धालु मां की भक्ति में लीन दिखे। मां विंध्यवासिनी का भव्य शृंगार किया गया था। मंदिर भी प्राकृतिक फूलों व रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था, जो अलौकिक छटा बिखेर रहा था। किसी ने झांकी तो किसी ने गर्भगृह से मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की।

मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर पर विराजमान समस्त देवी-देवताओं के चरणों में शीश झुकाया। हवन-कुंड की परिक्रमा की। इसके बाद विंध्य पर्वत पर विराजमान मां अष्टभुजा व मां काली के दर्शन को पैदल निकल पड़े। मां अष्टभुजा व मां काली का दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर के पास रेलिंग पर चुनरी बांध मन्नतें मांगी। इसके बाद शिवपुर स्थित तारा मंदिर के दर्शन को निकल पड़े।

मां तारा मंदिर पहुंच पूजन-अर्चन किया। भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। गंगा घाटों पर भी स्नानार्थियों की भीड़ दिखी। दर्शन-पूजन के बाद वापस लौटते समय श्रद्धालुओं ने प्रसाद के रूप में जरूरत के सामानों की खरीदारी की। वहीं बच्चों ने भी माता-पिता से जिद कर मन-पसंद खिलौने खरीदे। श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरा से मेला क्षेत्र की निगहबानी की जा रही है। चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। वहीं पंडा समाज भी भक्तों की सेवा में जुटा रहा।

नवरात्र मेला से काफी उम्मीदें
दरअसल, विंध्याचल के दुकानदारों को शारदीय नवरात्र से काफी उम्मीद है। नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं की संख्या देख दुकानदार काफी खुश दिखे।

नवरात्र मेले को लेकर कड़ी सुरक्षा
विंध्याचल नवरात्र मेले को सुरक्षा की दृष्टि से दो सुपर जोन, 10 जोन और 21 सेक्टरों में बाटा गया है। प्रत्येक सुपर जोन में अपर पुलिस अधीक्षक, जोन में पुलिस उपाधीक्षक और सेक्टर में निरीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी लगाए गए हैं। गंगा किनारे एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सिविल ड्रेस में भी पुलिस की ड्यूटी लगाई गई है। साथ ही सीसीटीवी के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। मेला क्षेत्र में 2000 के लगभग पुलिस बल की तैनाती की गई है।

कालीखोह व अष्टभुजा मंदिर की भी भव्य सजावट
विंध्याचल धाम में स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर,मां काली खोह मंदिर और अष्टभुजा मंदिर को देसी व विदेशी फूलों भव्य सजावट की गई हैं। कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों मंदिरों पर सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन पूजन कर रहे हैं।

नौ दिनों तक पूजन-अनुष्ठान के लिए भक्तों ने जमाया डेरा
नवरात्र के प्रथम दिन ही विंध्याचल के सभी होटल लगभग फुल थे। नौ दिनों तक पूजन-अनुष्ठान करने वाले भक्त पहले ही डेरा जमा चुके हैं। नवरात्र के प्रथम दिन से मंदिर की छत पर पूजन-अनुष्ठान का दौर शुरू हो गया, जो नवमी तक चलेगा।

रोप-वे से भरी उड़ान, श्रद्धालुओं की राह हुई आसान
पर्यटन विभाग ने 16 करोड़ की लागत से पीपीपी माडल पर विंध्य पर्वत पर रोप-वे का निर्माण कराया है। यह पूर्वांचल का पहला रोप-वे है। पहले मां अष्टभुजा व मां काली के दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ी चढ़कर जाना होता था, जो बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए खासा थकान भरा होता था। रोप-वे संचालन शुरू होने से श्रद्धालुओं की राह आसान हो गई है और काफी सहूलियत भी होने लगी है।

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