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योग का विश्वव्यापी विस्तार

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

दुनिया में योग लोकप्रिय हो रहा है. क्योंकि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का आधार है. यह भारत के राष्ट्रीय गौरव का विषय बन गया है. किसी अन्य देश की विरासत को इस प्रकार की प्रतिष्ठा कभी नहीं मिली. दो सौ से अधिक देशों में योग दिवस पर व्यापक समारोहों का आयोजन हुआ.

वैज्ञानिक अनुसंधानो ने यह प्रमाणित कर दिया है कि योग के गर्न्थो में वर्णित आसान, प्राणायाम ध्यानात्मक आसान षटकर्म के अभ्यास से तनाव प्रबंधन में सहायता मिलती हैं। दिनचर्या में योग को शामिल करना बहुत लाभदायक है. योग भारत की अमूल्य धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से आज विश्व में इसकी गूंज है। आठ वर्ष पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा में योग दिवस मनाने का प्रस्ताव किया था, इस पर सबसे कम समय में सर्वाधिक देशों के समर्थन का रिकार्ड कायम हो गया। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा ने जिस ऐतिहासिक समर्थन से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को स्वीकार किया था, वह राष्ट्रीय गौरव का विषय था।अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भारत की महान धरोहर के प्रति विश्व की सहमति है। लोगों को इसमें अपना हित नजर आ रहा है।

इसकी भवभूमि में व्यक्ति को विराट जगत सत्ता से जोड़ने का विचार समाहित है। लेकिन शारीरिक लाभ के विचार से किया जाने वाला योग भी कल्याणकारी होता है। इससे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार का स्वास्थ्य लाभ होता है। अनेक बीमारियों से निदान मिलता है। सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा मिलता है।

योगी आदित्यनाथ ने ठीक कहा था कि व्यक्ति का जीवन भोग के लिए नहीं, बल्कि योग के लिए है। योग रोग से मुक्ति प्रदान करता है। साथ ही चराचर जगत के अनेक सुखद रहस्यों का साक्षात्कार भी कराता है, जिनका सामान्य रूप से अनुभव नहीं किया जा सकता। यह क्षमता केवल योग से प्राप्त होती है। ईश्वर की सभी कृतियों में मनुष्य को ही विवेक शक्ति मिली है। इसे योग के माध्यम से जागृत किया जा सकता है। योग शरीर के साथ मन को भी स्वस्थ रखता है। ऐसा कोई दूसरा शरीर विज्ञान आज तक नहीं बन सका है। नरेंद्र मोदी ने इसको विश्व से परिचित कराया। इसका विराट रूप योग दिवस पर विश्व में दिखाई देता है। यह भारत की गौरवशाली उपलब्धि है। योग के आधुनिक प्रवर्तक पतंजलि के अनुसार

योगश्चित्तवृतिनिरोध।

अर्थात चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग कहलाता है। वेदांत के अनुसार आत्मा का परमात्मा से पूर्ण रूप से मिलन होना ही योग कहलाता है। इक्कीस जून को ग्रीष्म संक्रांति होती है। इस दिन सूर्य धरती की दृष्टि से उत्तर से दक्षिण की ओर चलना शुरू करते हैं, यानी सूर्य जो अब तक उत्तरी गोलार्ध के सामने था, अब दक्षिणी गोलार्ध की तरफ बढ़ना शुरू हो जाता है। योग के नजरिए से यह समय संक्रमण काल होता है, यानी रूपांतरण के लिए बेहतर समय होता है।कुछ लोग मजहबी आधार पर योग का विरोध करते हैं, जिसका कोई मतलब नहीं है। योग को मजहबी दृष्टि से देखना गलत है।

इस्लामी मुल्कों के साथ पूरे विश्व में योग किया जा रहा है। अमेरिका व योरोप में करोड़ों लोगों की जीवन शैली में योग शामिल हो गया है। नरेंद्र मोदी ने विश्व कूटनीति में सांस्कृतिक तत्व को बेजोड़ अंदाज में शामिल किया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भारत के लिए गर्व का विषय है। इसे राजनीति की दृष्टि से देखना गलत है। अनेक विपक्षी पार्टियां राष्ट्रीय गौरव के इस अवसर से अपने को अलग रखती हैं। फिर भी यह सन्तोष का विषय है कि आम लोगों में इस गौरवशाली दिन को लेकर उत्साह रहता है। पूरे विश्व में योग दिवस का माहौल दिखाई देता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक में इसे लेकर उत्साह रहता है। यह एक दिन का उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि इसे प्रतिदिन दिनचर्या में शामिल करने की प्रेरणा भी मिलती है.

भारत ने केवल विश्व कल्याण का उद्घोष ही नहीं किया था, बल्कि उसके अमल की राह भी दिखाई थी। इसी ने भारत को विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित किया था। योग में भी मानव कल्याण का विचार समाहित है। यह शरीर के साथ ही मन को संतुलित करता है। नकारात्मक चिंतन शरीर के साथ ही समाज को भी उद्वेलित करते हैं, अराजकता फैलाते हैं। नरेंद्र मोदी ने योग को मानवता के लिए धरोहर बताया था। उनके विचारों पर विश्व समुदाय ने ध्यान दिया था। मोदी का कहना था कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह दिमाग और शरीर की एकता का प्रतीक है। मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य है। विचार, संयम और पूर्ति प्रदान करने वाला है तथा स्वास्थ्य और भलाई के लिए एक समग्र दृष्टिकोण को भी प्रदान करने वाला है।

योग को भारत की अमूल्य धरोहर है.योग की अपनी जीवन शैली में शामिल करने की आवश्यकता है. योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया. कहा कि उनके प्रयासों के फलस्वरूप आज पूरी दुनिया में योग मनाया जा रहा. नरेंद्र मोदी ने भारतीय ऋषि परंपरा के उपहार योग को न केवल भारत में, बल्कि दुनिया में प्रतिष्ठित किया है। इस समय देश आजादी का अमृत महोत्सव भी माना रहा है. इसको ध्यान में रखते हुए उत्तर के 75,000 स्थानों पर योगाभ्यास संपन्न हुआ है। दुनिया के दो सौ से अधिक देश हमारी ऋषि परंपरा व विरासत के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हैं. भारतीय मनीषा ने

शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्

का संदेश दिया. अर्थात शरीर स्वस्थ है तो धर्म के सभी साधन अपने आप क्रम से सफल होते जाएंगे। योग का पहला नियम अनुशासन से जुड़ा है।योग अनुशासन में बांधकर निरोगता और शारीरिक व मानसिक विकास की ओर ले जाता है।

(उपरोक्त लेखक के निजि विचार हैं…..!!)

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