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लॉकडाउन का असरः कई बड़ी कंपनियां सीधे घर तक पहुंचा रहीं सामान, इन स्टार्टअप्स से किया करार

कोरोनावायरस का संक्रमण रोकने के लिए सरकार ने पूरे देश में तीन मई तक लॉकडाउन घोषित कर रखा है। ऐसे में लोगों को रोजाना इस्तेमाल में आने वाली वस्तुएं तक नहीं मिल पा रही हैं। इसे देखते हुए हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, मोंडेलेज़, प्रॉक्टर एंड गैंबल, डाबर और कोलगेट सहित एक दर्जन से अधिक उपभोक्ता सामान बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने सीधे उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचना शुरू कर दिया है। ये कंपनियां इसके लिए नई स्टार्टअप कंपनियां जैसे डंज़ो, स्कूटी और स्विगी आदि की मदद ले रही हैं।

आईटीसी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक बी सुमंत ने कहा, “ये साझेदारी सहयोग की शक्ति का एक संकेत है क्योंकि अकेले ब्रांड के लिए इन अभूतपूर्व समय के दौरान जरूरतों को पूरा करना मुश्किल है।” मोहित मल्होत्रा, सीईओ, डाबर ने कहा कंपनियां इस समय मैनपावर की कमी से जूझ रही हैं। ऐसे में हम अपने उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीति बना रहे हैं और नए समाधान खोज रहे हैं। जिसके तहत रिटेल आउटलेट के लिए ऑनलाइन डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के साथ समझौता किया है।

एफएमसीजी कंपनियों ने हाइपरलोकल डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर स्टोरफ्रंट स्थापित किए हैं और विशेष ब्रांड स्टोरों से और सीधे वितरण केंद्रों से ऑर्डर प्राप्त कर रही हैं, ताकि डिलीवरी साझेदारों का उपयोग करके सीधे घर तक सामान पहुंचाया जा सके। फूड ऑर्डरिंग फर्म स्विगी ने अपने स्टोर नेटवर्क का विस्तार 200 से अधिक शहरों में किया है, जिससे उपभोक्ता पड़ोस की दुकानों से किराने का सामान ऑर्डर कर सकते हैं।

ब्रिटानिया के एमडी वरुण बेरी ने कहा कि इस समय हम उत्पादन और श्रमिकों की कमी की समस्या से गुजर रहे हैं। हम 60-65 फीसदी मैनपावर के साथ कर रहे हैं। सप्लाई चेन में दिक्कत न हो इसके लिए कंपनी संभव प्रयास कर रही है। सरकार की गाइलाडन को फाॅलो किया जा रहा है।

फ्रोजन फूड स्पेस मार्केट में आईटीसी की 15 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। लॉकडाउन के दौरान कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने को लेकर काम कर रही है। आईटीसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी कम वर्कफोर्स में भी ग्राहकों के लिए जरूरी सामानों की सप्लाई में जुटीं हुई है। श्रमिक की कमी और कम प्रोडक्ट्स के बावजूद देश भर में आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से चले इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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