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जनपद में विटामिन ए की दवा पिलाने का बढ़ा ग्राफ

• नौनिहालों को कुपोषण से मुक्त कराने और संक्रमक बीमारियों से बचाव में सहायक है विटामिन ए

• नौ माह से 5 साल तक के बच्चों को जरूर पिलायें विटामिन ए

• रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को साल में दो बार दी जाती है विटामिन ए की खुराक

औरैया। विटामिन की कमी से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा आती है। विटामिन की कमी सीधे नहीं उभरती है, लेकिन धीरे धीरे इसका असर दिखाई देता है। बच्चों में नजर के के चश्मे लगना भी विटामिन ए की कमी का एक मुख्य लक्षण है। इसलिए जरूरी है कि विटामिन ए की कमी को दूर किया जाए।

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साल में दो बार दी जाने वाली इस खुराक से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा होता है। औरैया जनपद में 9 माह से 35 माह तक के बच्चों को विटामिन ए की डोज देने का प्रतिशत बढ़ा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे – 4 (एनएफएचएस) 2015-16 में इस आयु वर्ग में 43.0 प्रतिशत बच्चों को विटामिन ए दे जाती थी। जबकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे – 5 (एनएफएचएस) 2019-21 में यह प्रतिशत बढ़कर 84.7 प्रतिशत हो गया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अर्चना श्रीवास्तव का कहना है कि शिशु की विटामिन ए की जरूरत को कई तरह के खाद्य पदार्थों से पूरा किया जा सकता है।विटामिन ए एक ऐसा जरूरी विटामिन है जो शरीर खुद नहीं बना सकता है। इसलिए आहार में विटामिन ए युक्‍त चीजों को शामिल करना जरूरी है। दिल, फेफड़ों, किडनी और अन्‍य अंगों के कार्य में विटामिन ए मददगार है। उन्होंने बताया की 28 दिसंबर से बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाने का अभियान चल रहा है। उन्होंने अपील की कि एक माह तक चलने वाले इस अभियान के दौरान प्रत्येक बुधवार और शनिवार को अपने नौ माह से 5 साल तक के बच्चों को इसका सेवन ज़रूर करवायें।

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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ राकेश सिंह का कहना है कि हर बच्‍चे को अलग मात्रा में विटामिन ए की जरूरत होती है। हालांकि, उम्र के आधार पर यह निर्णय लिया जा सकता है कि बच्‍चे को कितनी मात्रा में विटामिन ए चाहिए। नौ माह से 12 माह तक के बच्चों को नियमित टीकाकरण सत्र के दौरान एमआर के प्रथम टीके के साथ आधा चम्मच (एक एमएल), 16 से 24 महीने के बच्चों को एमआर के दूसरे टीके साथ एक पूरा चम्मच (दो एमएल), दो वर्ष से पांच वर्ष तक के बच्चों को छह-छह माह के अंतराल पर विटामिन ए सम्पूरण कार्यक्रम के दौरान पूरा चम्मच (दो एमएल) विटामिन ए का घोल पिलाया जाता है।

बच्‍चों में विटामिन ए की कमी से रतौंधी का खतरा

100 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय के एसएनसीयू इंचार्ज और बाल रोग विषेशज्ञ डॉ रंजीत सिंह कुशवाहा का कहना है कि संतुलित आहार की कमी या लिवर से जुड़े विकारों के कारण विटामिन ए की कमी हो सकती है। यदि गंभीर रूप से विटामिन ए की कमी हो तो आंखों में धुंधलापन, तेज रोशनी से आंखें चुंधियाना, आंखों के सफेद हिस्‍सों पर पैचेज, रात में दिखाई न देना, आंखों में गंभीर रूप से ड्राईनेस जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बच्‍चे में विटामिन ए की कमी के संकेत दिखने पर बाल रोग चि‍कित्‍सक को दिखाएं।

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर

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