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नाका गुरुद्वारा में साहिब गुरु हरिराय का ज्योतिजोत दिवस पुण्यतिथि एवं आठवें गुरु हरिक्रिशन साहिब का गुरु गद्दी दिवस मनाया गया

लखनऊ। सिखों के सातवें गुरु साहिब गुरु हरिराय जी का ज्योति जोत दिवस (पुण्यतिथि) एवं आठवें गुरु हरिक्रिशन साहिब जी महाराज का गुरु गद्दी दिवस 19 अक्टूबर को ऐतिहासिक गुरूद्वारा श्री गुरू नानक देव जी नाका हिंडोला, लखनऊ में बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया। प्रातः का विशेष दीवान 5.30 बजे आरम्भ हुआ जो 10.30 बजे तक चला। सुखमनी साहिब के पाठ के उपरान्त रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह ने अपनी मधुरवाणी में शबद कीर्तन गायन कर समूह साध संगत को निहाल किया। ज्ञानी लखविन्दर सिंह ने गुरु हरिराय जी का ज्योति जोत दिवस पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि जब पंजाब में अकाल पड़ गया और लोग रोटी के एक-एक टुकड़े को तरसने लगे तब गुरु जी ने उनकी मदद की। गुरूजी दुखी गरीबों को वाहिगुरु के सिमरन से स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करते। गुरू जी ने बीमार लोगों के लिए एक बहुत बड़ा दवाखाना बनवाया जहां निःशुल्क दवा दी जाती थी। इतिहास में दर्ज है कि शाहज़हां का बेटा दारा शिकोह जब बीमार पड़ गया तो इसी दवाखाने से उसका इलाज हुआ था। आज ही के दिन अपने छोटे पुत्र गुरु हरिक्रिशन जी को गुरु गद्दी सौंप गुरु हरिराय जी वाहेगुरू के धाम सिधार गये।

साहिब श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी के गुरु गद्दी पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि साहिब श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी का जन्म कीरत पुर में हुआ था। आपके पिता जी का नाम श्री हरिराय जी व माता जी का नाम कृष्ण कौर जी था। श्री गुरु हरिराय ने अपने बड़े बेटे को गुरुगद्दी न सौंपकर अपने छोटे बेटे को गुरुगद्दी पर आसीन कराया। श्री हरिक्रिशन जी में बचपन से ही प्रभु भक्ति एवं अन्य सात्विक गुणों का प्रभाव देखने को मिलता था। आप सभी दस गुरुओं के सबसे छोटी उम्र में गुरु गद्दी पर आसीन हुए। इसी लिए आप को ‘‘बाला प्रीतम’’ के नाम से भी जाना जाता है।

एक बार जिला अम्बाला के पंजखोरे गांव में एक पंडित कृष्ण लाल ने छोटे से बालक को गुरु मानने से इन्कार करते हुए कहा कि यदि गुरु जी गीता के श्लोकों का अर्थ करके दिखायें तो मै इन्हें गुरु मान लूँगा। गुरु जी ने कहा आप किसी को ले आएं श्री गुरु नानकजी की कृपा दृष्टि की तसल्ली मै करवा दूँगा। पंडित एक महा मूर्ख को ले आया। गुरु जी की कृपा से वह मूर्ख एक विद्वान की तरह गीता के श्लोकों का अर्थ सुनाने लगा इससे गुरु जी की महिमा पहले से भी ज्यादा फैल गयीं। गुरु जी दिल्ली में ही थे कि चेचक की बीमारी सारे इलाके मे फैल गयी। गुरु जी ने गरीबों, दुखियों की सहायता करनी शुरु कर दी। एक दिन गुरु जी को तेज बुखार हुआ। उनके शरीर पर चेचक के लक्षण दिखाई देने लगे।

उन्होंने अपने जाने का समय नजदीेक जान कर साध संगत को आदेश दिया कि ‘‘बाबा बकाला’’ जिसका भाव था कि हमारे बाद गुरु गद्दी की जिम्मेदारी संभालने वाला महापुरुष गांव बकाले (अमृतसर) में है। लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रवक्ता सतपाल सिंह मीत ने बताया कि अपने जन्मदिन के अवसर पर विशेष रुप से पधारी महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने गुरु महाराज के चरणों में माथा टेका और गुरु चरणों में अरदास की ओर गुरु महाराज और संगतों का आर्शीवाद प्राप्त किया।

लखनऊ गुरुद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बग्गा और प्रबन्धक कमेटी ने उन्हें गुरु घर का सम्मान सिरोपा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। महापौर संयुक्ता भाटिया ने श्री गुरु हरिराय जी का ज्योति जोत दिवस पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये और श्री गुरु हरिक्रिशन साहिब जी महाराज का गुरु गद्दी दिवस की बधाई दी। तत्पश्चात महापौर संयुक्ता भाटिया ने खालसा इंटर कॉलेज में जाकर बच्चे और बच्चियों को मिष्ठान वितरण किया। विद्यार्थियों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया और उनको जन्मदिन की बधाई दी। जहां पर खालसा इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल वीरेंद्र सिंह ने उनको शॉल भेंट करके सम्मानित किया और बधाई दी। समाप्ति के पश्चात् चाय का लंगर श्रधालुओं में वितरित किया गया।

रिपोर्ट-दया शंकर चौधरी

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