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धर्म, अर्थ और ज्ञान का अद्भुत संगम हैं भगवान श्रीकृष्ण: युद्धष्ठिर दास

लखनऊ। लोक परमार्थ सेवा समिति के तत्वधान में पुराना किला, छोटी पार्क के निकट, गोकुलेश दास के निवास पर सामूहिक हरिनाम संकीर्तन व सत्संग-भजन का आयोजन किए गया। सत्संग भजन कार्यक्रम के दौरान श्री वृंदावन धाम से आए चन्द्रोदय मंदिर के उपाध्यक्ष युद्धिष्ठिर दास जी ने हरिनाम संकीर्तन के बाद उपस्थित श्रद्धालु भक्तों को एक माला “हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे” का स्मरण भी करवाया।

इस अवसर पर उन्होने श्रद्धालु भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव जन्म चौरासी लाख योनियों के बाद मिलता है। ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि और विवेक का वरदान दिया है। इसलिए विवेक का इस्तेमाल करते हुए लोकल्याण के लिए तत्पर रहना चाहिए। हालांकि ईश्वर का अंश सभी प्राणियों में समान रूप से विद्यमान होता है इसलिए सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखना चाहिए। किन्तु गऊ माता एक ऐसी प्राणी है जिसमें देवी देवताओं का वास माना जाता है, भगवान श्री कृष्ण भी गऊ माता के प्रति अनन्य प्रेम रखते थे।

इसलिए सभी मनुष्यों को चाहिए कि गऊ माता के प्रति अनन्य प्रेम का भाव रखें। उन्होने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण कर्म, योग और ज्ञान का अद्भुत संगम हैं, इस लिए सभी को भगवान कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति बढानी चाहिए, जिससे जगत का कल्याण होने के साथ-साथ आत्मसंतुष्टि और मन की शुद्धि भी होती है।

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समिति की उपाध्यक्ष किरन बाला शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर लोक परमार्थ सेवा समिति की ओर से युधिष्ठिर दास जी का सम्मान शाल व प्रमाण पत्र के साथ किया गया। इस धार्मिक आयोजन में श्रीमती किरन बाला शर्मा, श्रीश शर्मा, कृष्णा, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, अलका उपाध्याय, प्रिंसी, लालू भाई आदि शामिल हुए।

दया शंकर चौधरी
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