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अंग्रेजी हुकूमत के समय से लटकाकर फांसी देने का चलन

दिल्ली में साल 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप के चारों गुनहगारों को फांसी की सजा सुनाई गई है. निर्भया के दोषी मुकेश, पवन और विनय की पुनर्विचार याचिका भी सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है, जबकि अक्षय की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में अभी लंबित है.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका को स्वीकार कर लिया है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर कब सुनवाई करेगा. निर्भया के दोषियों ने राष्ट्रपति के पास रहम की भी गुहार लगाई है. राष्ट्रपति भवन से दया याचिका खारिज होते ही निर्भया के दोषियों को फांसी में लटकाने का काम शुरू हो जाएगा.

इन चारों गुनहगारों के नाम पटियाला हाउस कोर्ट से ब्लैक वारंट यानी मौत का आखिरी पैग़ाम जारी किया जाएगा और फिर फांसी के फंदे पर लटका दिया जाएगा. भारत में अंग्रेजी हुकूमत के समय से ही फांसी के फंदे पर लटकाकर सजा देने की परंपरा चली आ रही है. आज भी जल्लाद ही कैदी को फांसी के फंदे पर चढ़ाता है. अभी तक इसमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं हुआ है. हालांकि दुनिया के देशों में मृत्युदंड देने के लिए कई तरह के तरीके अपनाए जाते हैं.

दुनिया के देशों में कितने तरीके से दिया जाता है मृत्युदंड?

कुछ देशों में गोली मारकर, कुछ देशों में सिर काटकर और कुछ देशों में जहरीला इंजेक्शन देकर मृत्युदंड दिया जाता है. इसके अलावा इलेक्ट्रोक्यूशन और जहरीली गैस से भी कैदियों को सजा-ए मौत दी जाती है.

अफगानिस्तान और सूडान में गोली मारकर, फांसी पर लटकाकर और पथराव करके कैदियों को सजा-ए-मौत देने का प्रावधान है. वहीं, बांग्लादेश, कैमरून, सीरिया, युगांडा, ईरान, कुवैत और मिस्र जैसे देशों में फांसी पर लटकाकर और गोली मारकर कैदियों को मौत दी जाती है.

मलेशिया, बोत्सवाना, तंजानिया, जाम्बिया, दक्षिण कोरिया और जिम्बाब्वे में फांसी के फंदे पर लटकाकर मौत की सजा दी जाती है. यमन, थाइलैंड, बहरीन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, चिली, इंडोनेशिया, अर्मीनिया और घाना में कैदियों को गोली मारकर सजा-ए मौत दी जाती है. वहीं, चीन में जहरीला इंजेक्शन और गोली मारकर मृत्युदंड दिया जाता है. जबकि फिलीपींस में जहरीला इंजेक्शन लगाकर सजा-ए मौत दी जाती है. अमेरिका में इलेक्ट्रोक्यूशन, जहरीली गैस, फांसी के फंदे पर लटकाकर और गोली मारकर मौत की सजा देने का प्रावधान है.

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