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‘मधुमेह एवं रक्तचाप से बचाव एवं प्राथमिक चिकित्सा’ विषयक कार्यक्षमता वृद्धि व्याख्यानमाला के अन्तर्गत तृतीय प्रस्तुतीकरण का हुआ आयोजन

लखनऊ। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र के मुख्य आतिथ्य में ‘मधुमेह एवं रक्तचाप से बचाव एवं प्राथमिक चिकित्सा’ विषयक कार्यक्षमता वृद्धि व्याख्यानमाला के अन्तर्गत लोक भवन ऑडिटोरियम में तृतीय प्रस्तुतीकरण का हुआ आयोजन किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि मधुमेह एवं रक्तचाप अभिशाप नहीं वरदान है। सचिवालय कर्मियों को स्वस्थ रहने के लिये खानपान तथा लाइफ स्टाइल को दुरुस्त रखना चाहिये।

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मुख्य सचिव ने निदेशक गिनी हेल्थ मोहाली-पंजाब व पूर्व प्रोफेसर एण्ड हेड ऑफ डिपार्टमेंट, एंडोक्रिनोलॉजी, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ डॉ अनिल भंसाली का धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि उन्होंने सचिवालय के सभी कर्मियों तथा उनके परिवार को मधुमेह एवं रक्तचाप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। सचिवालय कर्मी डॉ भंसाली द्वारा दिये गये सुझावों को अमल में लायें।

इससे पूर्व, डॉ अनिल भंसाली ने बताया कि मधुमेह की बीमारी को डायबिटीज और शुगर भी कहा जाता है। यह बीमारी अनुवांशिक भी होती है और खराब जीवनशैली के कारण भी होती है। डायबिटीज के लक्षण और निदान के बारे में जानना मरीजों के लिए बहुत जरूरी है, ताकि मधुमेह की वक्त पर पहचान हो सके और इसका इलाज भी हो सके। उन्होंने बताया कि मधुमेह के मरीजों को अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मधुमेह के मरीज का ब्लड शुगर लेवल का न तो सामान्य से अधिक होना ठीक रहता है और न ही सामान्य से कम होना ठीक रहता है। ऐसे में इसकी जांच कर लेवल का पता लगाते रहना चाहिए। अगर मधुमेह का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाए या फिर बहुत ज्यादा कम हो जाए, तो दोनों ही स्थिति में मरीज की सेहत पर खतरा मंडराता है। ये दोनों ही स्थितियां जानलेवा मानी जाती हैं।

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उन्होंने बताया कि इन्सुलिन एक तरह का हार्माेन है, जो शरीर के भीतर पाचन ग्रंथि से बनता है। इसका काम भोजन को ऊर्जा में बदलना होता है। ऐसे में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि मधुमेह के मरीज कब और क्या खा रहे हैं। इससे ब्लड शुगर का लेवल नियंत्रित रहता है। मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप एक दूसरे के लिए प्रतिरोधी एवं शरीर के लिए घातक है। उन्होंने बताया कि मोटापा, शिथिल जीवनचर्या, धूम्रपान का त्याग एवं नित्यप्रति व्यायाम-सफल जीवन की कुंजी है। मधुमेह को खतरनाक बीमारी माना जाता है। इससे बचने के लिए सही खानपान बेहद जरूरी है। साथ ही जीवनशैली भी सही होनी चाहिए। डायबिटीज के टाइप-1 और टाइप-2 में ना केवल खाने से जुड़ी जानकारी का ध्यान रखना होता है, बल्कि इस बात पर भी जोर देना होता है कि खाना कब और कितना खाना चाहिए। डायबिटीज के टाइप-2 से बचाव के लिए शारीरिक गतिविधियां करना जरूरी होता है। इससे मधुमेह नियंत्रण में रहता है। इसके साथ ही हृदय रोग और ब्लड शुगर से जुड़ी जटिलताओं को भी रोकने में मदद मिलती है।

इस बीच डाक्टर अनिल भंसाली से सचिवालय कर्मियों ने मधुमेह एवं रक्तचाप से संबंधित सवाल भी पूछे, जिसका उन्होंने शंका समाधान भी किया। इस अवसर पर डॉ अनिल भंसाली और डॉ आरके धीमान को ओडीओपी उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट किये गये। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव सचिवालय प्रशासन हेमन्त राव, अपर मुख्य सचिव खेल नवनीत कुमार सहगल, निदेशक एसजीपीजीआई डॉ आरके धीमान समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

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