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गेहूं की कीमतों को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला, यूक्रेन-रूस युद्ध से गेहूं आपूर्ति प्रभावित

देश में इस समय आटा 12 साल में सबसे महंगा बिक रहा है, केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर लगातार बढ़ती गेहूं की कीमतों को संभालने के लिए शनिवार को बड़ा फैसला किया।

ये फैसला इंटरनेशनल मार्केट में गेहूं के बेतहाशा बढ़ रहे दाम के मद्देनजर लिया गया है. इसके साथ ही, हीट वेव यानी लू के कारण गेहूं के पैदावार में गिरावट की आशंकाओं और घरेलू खाद्य दामों में तीव्र बढ़ोतरी भी इस फैसले की वजहों में शामिल है.

गेहूं की कीमत में कमी आने के बाद दूसरा बड़ा फायदा ये होगा कि इसकी कीमत निर्धारित 2,015 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के करीब पहुंच जाएगी।डीजीएफटी की अधिसूचना में कहा गया कि सभी तरह के गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा रही है।

दिल्ली के बाजार में गेहूं की कीमत लगभग 2,340 रुपये प्रति क्विंटल थी, जबकि निर्यात के लिए बंदरगाहों पर 2575-2610 रुपये प्रति क्विंटल की बोली लगाई गई थी।

रूस-यूक्रेन तनाव के चलते वैश्विक बाजारों में गेहूं के दाम काफी प्रभावित हुए हैं. दरअसल, दोनों ही देश गेहूं के बड़े उत्पादक हैं. लेकिन, जब से युद्ध शुरू हुआ है, तभी से इसकी आपूर्ति बाधित हो गई है.

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