कोयला घोटाला : ईडी ने अटैच किया 1.23 करोड़ की संपत्ति

यूपीए सरकार में हुए बहुचर्चित कोयला घोटाले में इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने पहली बार बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपितों की 1.23 करोड़ रुपये की संपत्तियों को मंगलवार को अटैच किया। यह कार्रवाई चंदौली की मेसर्स फर्टिको मार्केटिंग एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों अरुण अग्रवाल, अनिल अग्रवाल व अन्य के खिलाफ की गयी है।

कोयला घोटाला : पांच कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

इस मामले की जांच ईडी इलाहाबाद जोन द्वारा की जा रही है। इसकी जांच सीबीआई लखनऊ ने भी की थी जिसमें फर्टिको मार्केटिंग एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड समेत पांच कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गयी थी। इसके बाद ईडी ने भी केस दर्ज कर उनकी संपत्तियों का पता लगाना शुरू कर दिया था।दरअसल वर्ष 2012 में सीबीआई द्वारा इस मामले की चार्जशीट दाखिल करने के बाद ईडी ने इन सभी कंपनियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। जांच के दौरान पता चला कि इन कंपनियों ने नॉदर्न कोल फील्ड से एक एग्रीमेंट किया था। जिसमें सस्ती दरों पर कच्चा कोयला लेकर उन्हें स्मोक फ्री बनाना था। जांच में सामने आया कि इन कंपनियों ने सरकारी कोयला लेने के बाद उसे चंदौली की चंदासी बाजार में बेच दिया।

संपत्ति को बैंक में गिरवी रखा

इससे एनसीएल को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। गहन जांच के बाद ईडी ने इनमें से एक कंपनी फर्टिको मार्केटिंग एंड इंवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड की चंदौसी स्थित रामनगर इंडस्ट्रियल एरिया में करीब एक लाख स्क्वायर फीट भूमि, बिल्डिंग, प्लांट, मशीनरी इत्यादि को अटैच कर लिया है। जांच में यह भी पता चला कि कंपनी की रामनगर स्थित अपनी यह संपत्ति को बैंक में गिरवी रखा था जिसे घोटाले के बाद मिली काली कमाई की मदद से छुड़ा लिया गया। ईडी जल्द ही इस मामले में बाकी कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है।

जालसाजी करने वाली मैगनेम फायनेंस

वहीं दूसरी ओर राजधानी से संचालित मैगनम फायनेंस कंपनी की चार दुकानों को भी ईडी ने मंगलवार को अटैच कर लिया। ये सभी दुकानें जानकीपुरम स्थित जानकी प्लाजा में है जिनके मालिक मैगनम के डायरेक्टर अरुण चतुर्वेदी और वरुण चतुर्वेदी हैं। ध्यान रहे कि हजारों निवेशकों के साथ जालसाजी करने वाली मैगनेम फायनेंस की डेढ़ करोड़् रुपये की संपत्तियां ईडी पूर्व में भी अटैच कर चुकी है। कंपनी के खिलाफ गुंडबा थाने में निवेशकों ने कई एफआईआर भी दर्ज करायी थी जिसके बाद ईडी ने इस मामले में मनी लांड्रिंग के प्रमाण मिलने पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।

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