अम्बेडकरनगर। टिकट की चाहत रखने वाले नेताओं ने उप चुनाव का माहौल गर्म कर दिया है। विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव की असर दिखने लगा है। भाजपा तथा विपक्षी सपा के बीच कांटे का मुकाबला कड़ा मुकाबला होने के आसार नजर आने लगा है। भाजपा व सपा में चुनावी टिकट की चाहत रखने वालों की लंबी लाइन है। इन दोनों दलों के नेताओं द्वारा अपनी अपनी मजबूत दावेदारी को पार्टी नेतृत्व तक को पहुंचाने के लिए इस समय चुनावी मैदान में ताल ठोंकने की तैयारियों को लेकर छोटी बड़ी बाजारों के अलावा चौराहों के साथ गांवों के प्रमुख स्थानों पर बडे़ बड़े पोस्टर दिख रहे हैं।
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दोनों दलों में पोस्टर की होड़ लग गयी है। जबकि भाजपा व सपा ने अभी किसी अधिकृत प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। जैसा कि विधानसभा क्षेत्र कटेहरी की सीट पर काबिज रही समाजवादी पार्टी अपनी उपलब्धि को किसी कीमत खोना नहीं चाहती है।एक बार पुनः चुनावी मैदान को अपने पक्ष में करने में शीर्ष नेतृत्व लगा है।
वैसे तो विधानसभा क्षेत्र स्तर पर चुनावी तैयारियों से ज्यादा उम्मीदवार अभी पार्टी नेतृत्व को प्रभावित करने में लगे है। कटेहरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे लालजी वर्मा अब सांसद चन चुके हैं। उनकी कोशिश है कि पार्टी की जीत को यहां काबिज रखना है। सपा सांसद लालजी वर्मा की बेटी डॉ छाया वर्मा का नाम उछल जा रहा है। तो कभी उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शोभावती वर्मा का नाम जन चर्चाओं आ रहा।
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कभी चर्चा में पूर्व विधायक जयशंकर पांडेय पूर्व एम एल सी विशाल वर्मा, शंखलाल मांझी भीम निषाद शेष कुमार वर्मा चर्चा में है। भाजपा से अवधेश द्विवेदी, सुधीर सिंह मिंटू व पूर्व विधायक धर्मराज निषाद, शिव नायक वर्मा, रमाशंकर सिंह के नामों की चर्चा आम है। वहीं अजीत सिंह भी दावेदारों में हैं।
भाजपा और सपा के साथ बसपा भी चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि तीनों दलों ने अभी अभी तक अपने उम्मीदवारों का पता नहीं खोले है। मुख्यमंत्री के लगातार दौरे तथा विधानसभा क्षेत्र कटेहरी में पहुंचने से चुनावी माहौल नया मोड़ लेने लगा है। वहीं सपाई पूरी ताकत से जनाधार की जड़ को मजबूत बनाने में लगे हैं। उम्मीदवारों के नाम सामने नहीं आने से मतदाताओं और दावेदारों की धड़कने भी तेज है। बसपा और इसके टिकट के दावेदार चुप्पी चुनावी माहौल को गर्म कर चुकी है।
लोकसभा चुनाव में मजबूत जनाधार पाने के बाद सपा में उत्साह ज्यादा ही है। भाजपा लोकसभा चुनाव में हार के बाद बहुत फूंक फूंक कदम रख रही है। भाजपा ने कटेहरी को अपने लिए चुनौती माना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वर्ग चुनावों कमान संभाल कमल खिलाने को कोशिश में जुटे हैं। भाजपा शीर्ष नेतृत्व में खास कर सीएम ने विधानसभा क्षेत्र कटेहरी के उप चुनाव जीतने में दम-खम झोंक दिया है। यहां जनता पर सबकुछ न्यौछावर करके
भाजपा जनाधार समेटने की प्रत्येक गुंजाइश पर नजर टिकाए व जनता से जुड़ने का भरपूर प्रयास कर रही है। गौरतलब हो कि यहां भाजपा राम लहर में पूर्व मंत्री अनिल तिवारी ने जीत दर्ज किया था।उसके बाद से भाजपा के खाते में जीत नहीं आयी। कभी बसपा तो कभी सपा के खाते में यह सीट काबिज रही।
जातिगत समीकरण में निषाद कुर्मी बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र कटेहरी में जीत का समीकरण साधने में उम्मीदवार अपनी-अपनी रणनीति और जनाधार का गणित बैठाने में लगे हैं। पाटीं शीर्ष नेतृत्व भी जातीय समीकरण को नजरंदाज नहीं करने वाला है। लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण की पैठ को देखते हुए जीत के लिए उम्मीदवार का चयन सबसे महत्वपूर्ण होने वाला है।
भाजपा और सपा से चुनावी मैदान में उतरने वाले कुछ नामों की चर्चा अब जनता की जुबान पर भी जोरशोर से तैरने लगी है। ये नाम पार्टी के शीर्ष गलियारों तक भी पहुंच रहे हैं। बसपा इस बार लोकसभा चुनाव के अपने मतदाताओं को बिखरने से मजबूती के साथ रोकेगी। बसपा मतदाताओं की टूटन चुनावी गणित बदल दिया था। निर्णायक भूमिका में दलित मतदाता होंगे। दलित मतदाताओं पर प्रभाव किसका होगा आने वाला समय बतायेग।
रिपोर्ट-जय प्रकाश सिंह