नाका गुरुद्वारा में बाबा बन्दा सिंह बहादुर का 306वां शहीदी दिवस मनाया गया

लखनऊ। बाबा बन्दा सिंह बहादुर जी का 306वाँ शहीद दिवस ऐतिहासिक गुरूद्वारा श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरू सिंह सभा नाका हिन्डोला लखनऊ में 25 जून (शनिवार) को बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया।

नाका गुरुद्वारा में बाबा बन्दा सिंह बहादुर जी का 306वां शहीदी दिवस मनाया गया

प्रातः का दीवान 6.00 बजे श्री सुखमनी साहिब के पाठ से आरम्भ हुआ जो 10.30 बजे तक चला। हजूरी रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह ने ‘सूरा सो पहिचानिअै जु लरै दीन के हेत। पुरजा-पुरजा कटि मरै कबहु न छाडै खेतु।’ शबद कीर्तन गायन कर समूह साध-संगत को निहाल किया। ज्ञानी सुखदेव सिंह ने बाबा बन्दा सिंह बहादुर जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सिख इतिहास की महान शख्शियत जिसको सिख जगत में सिखों का पहला बादशाह, खालसा राज के मुखिया, महान जरनैल निर्भय सूरमा, कुशल शासक, के नाम से याद किया जाता है।

बाबा बन्दा सिंह बहादुर जी का जन्म 27 अक्टूबर 1670 को कश्मीर के जिला पुछँ के शहर रजौड़ी में हुआ था। आपके पिता जी का नाम रामदेव जी बचपन से ही शिकार खेलने की लग्न लग गई। क्योंकि जंगली इलाके में शिकारी स्वभाव होना जरुरी है नही तो आप शिकार हो जाओगे। एक दिन आप से एक गर्भवती हिरनी का शिकार हो गया आंखों के सामने हिरनी और बच्चे ने दम तोड़ दिया आप का दिल टूट गया। आपने कमान तोड़ दी तीर फेंक दिये शिकारी वेषभूषा उतार दी और घर बाहर त्याग कर बैरागी बन गये। मैदानी इलाके का भ्रमण किया और जानकीदास साधु के चेले बन गये। इस साधु ने आप का नाम माधोदास रख दिया।

बैरागियों के साथ अलग-अलग स्थानों की यात्रा के कुछ समय बाद आप का मिलाप गुरु गोबिन्द सिंह जी से हुआ गुरु जी के एक सवाल पूछने पर माधोदास ने बड़े चाव एवं सत्कार से कहा ‘हजूर मै तो आपका बन्दा (सेवक) हूँ गुरु जी ने उन्हें अमृतपान कराकर बन्दा सिंह बनाकर “बहादुर“ का खिताब दिया और पंजाब भेजने से पहले मौजूदा हकूमत से टक्कर लेने से पहले पूर्ण रुप से तैयार कर लिया और उन्हे एक नगाड़ा ,झन्डा और अपने पास से तीर दिए बाबा बन्दा सिंह बहादुर ने पंजाब में मौजूदा हुक्मरानों को पराजित कर खालसा राज स्थापित किया।

सन 1710 ई0 को सरहंद पर हमला करके छोटे साहिबजादों के कातिलों को मौत के घाट उतार कर लगभग 6 साल तक पंजाब की धरती पर बाबा बन्दा सिंह बहादुर ने राज किया। सन् 1716 में दिल्ली के बादशाह ने भारी फौज भेज कर बाबा बन्दा सिंह बहादुर और उनके साथियों को गुरदास नंगल की कच्ची गढ़ी में 8 महीने के घेरे के बाद गिरफ्तार करके दिल्ली में लाकर उनके साथियों को यातनाएं देकर शहीद कर दिया गया और बाबा बन्दा सिंह बहादुर के पुत्र का कलेजा निकाल कर उनके मुँह में उाला गया और उन्हें अनेक प्रकार की यातनाएं देकर शहीद कर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन सतपाल सिंह मीत ने किया।

दीवान की समाप्ति के उपरान्त राजेन्द्र सिंह बग्गा अध्यक्ष ऐतिहासिक गुरूद्वारा श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरू सिंह सभा नाका हिन्डोला लखनऊ ने शहीद बन्दा सिंह बहादुर सिंह जी को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये उपरान्त चाय का लंगर समूह संगत में वितरित किया गया।

रिपोर्ट-दयाशंकर चौधरी

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