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चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से…चारिन दिन मा सब पानी-पानी होय गवा

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

ककुवा ने भारी बारिश, तेज आंधी और जल भराव की चर्चा करते हुए कहा- चारिन दिन मा सब पानी-पानी होय गवा। जोरदार आँधी ते पूरा उत्तर भारत हिल गवा। लोगन का कयू घण्टा बिन बिजुली क रहय का परा। तमाम जगह तौ बहिया केरी स्थिति बनि गवै। शहर के शहर पानी मा डूबि गये। गांवन मा तमाम कच्चे घर गिरि गये। बिरवा जर ते उखरि गये। इ आपदा मा दर्जनों लोग बेमौत मरीगे। खेती क बड़ा नुकसान पहुंचा हय। निचले इलाके की फसलें बर्बाद होय गईं। मुला, धान केरी फसल का अघायक पानी मिलि गवा। इ आकाचित्ति वाली बरीखा ते सबका जीना मुहाल होय गवा। नखलऊ मा तौ बिफै का जैसे सन साठ वाली बहिया आय गय रहय।

चतुरी चाचा अपने चबूतरे पर बड़े इत्मिनान से हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। आसमान में बादल उमड़-घुमड़ रहे थे। मौसम बहुत बढ़िया था। धूप और छांव की लुकाछिपी चल रही थी। कासिम चचा, मुंशीजी, बड़के दद्दा व ककुवा मेरा इंतजार कर रहे थे। मेरे चबूतरे पर पहुंचते ही ककुवा शुरू हो गए। ककुवा का कहना था कि अचानक मौसम बिगड़ने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। कुछ घण्टों की बरसात ने शहर से लेकर गांव तक पानी-पानी कर दिया। भारी बारिश और तेज आंधी से जानमाल को काफी क्षति हुई है।

मुंशीजी ने ककुवा की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- प्रकृति से हो रही छेड़छाड़ से प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। कहीं नदी की धारा रोकी जा रही है। कहीं पहाड़ में सुरंग और सड़क बनाई जा रही है। समुद्र को मथा जा रहा है। धरती पर ही नहीं, बल्कि आसमान में भी कूड़ा-कचरा छोड़ा जा रहा है। हरियाली पर आरा चल रहा है। आबादी बढ़ रही है। जंगल कम हो रहे हैं। वायु, ध्वनि, जल प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। इसी वजह से अब जाड़ा, गर्मी व बरसात अपने निर्धारित समय और मात्रा में नहीं होती है। इससे मानव जीवन की मुसीबतें बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन का असर खेती पर भी पड़ रहा है। कहीं बाढ़ आती है तो कहीं सूखा पड़ता है।

भूकम्प और तूफान जैसी आपदाएं आती हैं। इन सब चीजों से जानमाल का भारी नुकसान होता है। परन्तु, मानव अपनी सुख-सुविधा बढ़ाने में जुटा है। वह प्रकृति से मनमाना व्यवहार कर रहा है। तभी चबूतरे के पास बड़को काकी व नदियारा भौजी ठिठक गईं। ककुवा ने बड़को से पूछा- अरे! बड़को भउजी, सबेरे-सबेरे अपनी बहुरिया क लैके कहाँ जाय रही हौ? बड़को बोली- भइय्या, मुल्ला क दौड़ मस्जिद तक। घर केरा चौका-टहल निबटायक ख्यातय जाय रहिन। लौकी, तोरई, कद्दू सब पानिम डूबा हय। कौनिव जुगत ते ख्यात क्यार पानी उतारी जाये। आजु ख्यात ते पानी जौ न निकरा तौ छह बीघा कय फसल सत्यानाश होय जाई। इतना कहकर बड़को काकी चकहार की तरफ बढ़ गईं।

कासिम चचा ने विषय परिवर्तन करते कहा- चतुरी भाई, आपको आज सबका मुंह मीठा कराना चाहिए। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 71वां जन्मदिन था। चतुरी चचा कुछ बोलते उसके पहले ही बड़के दद्दा बोल पड़े- कासिम चचा, क्या मोदी जी आपके प्रधानमंत्री नहीं हैं। अगर मोदी जी आपके भी पीएम हैं, तो आप ही मिठाई मंगवा लो। कासिम चचा बोले- बड़के, तुम पता नहीं क्यों मेरे ही पीछे पड़े रहते हो? चलो, मैं ही मिठाई मंगवा लेता हूँ। इतना कहकर कासिम चचा ने पांच सौ की नोट बड़के की तरफ बढ़ा दी। बड़के दद्दा तो जैसे इसी बात का इंतजार ही कर रहे थे। वह चचा से रुपए लेकर तुरन्त कस्बे मिठाई लेने चले गए।

कासिम चचा ने कहा- मैं व्यक्तिगत तौर से प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा मुरीद हूँ। मोदी जी भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा करने के लिए रात-दिन काम करते हैं। मोदी जी ने निर्धनों व जरूरतमंदों के लिए बीते सात साल में बहुत कुछ किया है। उन्होंने भ्र्ष्टाचार की गर्त में समाते भारत को उबारा है। मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर किसी को मिल रहा है। उनकी किसी योजना में हिन्दू/मुस्लिम का खेल नहीं है। मोदी-योगी राज में मुस्लिम सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं। यह अलग बात है कि मुट्ठी भर कट्टरपंथी हर वक्त हिन्दू और मुस्लिम के मध्य खाई खोदा करते हैं। पहले बात-बात पर हिन्दू-मुस्लिम दंगे होते थे। परन्तु, मोदी-योगी सरकार में सब जगह पुर-सुकून है। सबसे बड़ी बात दुनिया भर में भारत का परचम फिर लहराने लगा है।

इसी बीच चंदू बिटिया जलपान लेकर आ गयी। आज हम लोगों के लिए घुइँया के पत्तों की पकौड़ियाँ और कुल्हड़ वाली स्पेशल चाय थी। बड़के दद्दा भी कस्बे से ‘मिलिकेक’ लेकर आ गए थे। सबसे पहले हम लोगों ने मोदी जी के जन्मदिन वाली मिठाई खाई। फिर सैंढ़ा के साथ चाय की चुस्कियां ली गईं। जलपान के अल्पविराम के बाद बड़के दद्दा ने प्रपंच को आगे बढ़ाते हुए कहा- शुक्रवार को मोदी जी के जन्मदिन पर देश में दो करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य रखा गया था। दोपहर तक एक करोड़ टीके लगाने का इतिहास रच दिया गया था। शाम तक विश्व में एक नया रिकॉर्ड बन गया था। एक दिन में दो करोड़ 22 लाख लोगों को वैक्सीन लगाई गई थी। भारत में अबतक 78 करोड़ से अधिक वैक्सीन लगाई जा चुकी है।

देश में 18 वर्ष से ऊपर वाले सभी नागरिकों को मोदी सरकार मुफ्त में कोरोना टीका लगवा रही है। देश में टीकाकरण का अभियान बड़ी तेजी से चल रहा है। आगामी 31 मार्च तक देश के सभी 94 करोड़ वयस्क नागरिकों को टीका लगाने का लक्ष्य है। बस, बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी है। अभी बच्चों की वैक्सीन पर परीक्षण चल रहा है। ऐसे में हम लोगों को कोविड-19 के नियमों का पालन कड़ाई से करना होगा। साथ ही, बच्चों को लेकर अधिक सावधानी बरतनी होगी। इधर, रहस्यमयी बुखार से यूपी, बिहार में अनेकानेक बच्चों की जान जा चुकी है।

चतुरी चाचा ने खेती-बाड़ी की बात करते हुए कहा- तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने धान को छोड़कर सभी फसलों को क्षति पहुंची है। सबसे ज्यादा नुकसान फल-सब्जी की फसलों को हुआ है। निचले इलाके में जलभराव होने से धान की फसल को भी हानि पहुँची है। क्योंकि, तेज हवा से धान की फसल जमीन पर लेट गयी है। खेतों में पानी जमा रहने पर यह धान सड़ जाएगा। बाकी ऊपरी इलाकों में धान की फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। वहां धान की फसल गिर जाने से भी पैदावार में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बहरहाल, जोरदार बारिश से धरती मईया तृप्त हो गई हैं। हम लोग बारिश के पानी का समुचित संरक्षण नहीं कर पाते हैं। अगर बारिश के जल को जमीन में रिचार्ज कर लिया जाए तो घटते जल स्तर पर काबू पाया जा सकता है।

मैंने हमेशा की तरह कोरोना का अपडेट देते हुए सबको बताया कि विश्व में अबतक करीब 23 करोड़ लोगों को कोरोना हो चुका है। इनमें करीब 47 लाख लोगों की मौत हो गई। इसी तरह भारत में अबतक तीन करोड़ 34 लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें चार लाख 44 हजार से ज्यादा लोग बचाए नहीं जा सके। यूपी सहित उत्तर भारत में अभी तक कोरोना महामारी नियंत्रण में है। लेकिन, केरल, महाराष्ट्र सहित दक्षिण भारत में कोरोना अपना रौद्र रूप दिखा रहा है।

अंत में चतुरी चाचा ने सबको अवगत कराया कि कल से पितृ पक्ष शुरू हो गया है। सब लोग अपने पुरखों को तर्पण करें। विधि-विधान से अपने पूर्वजों की श्राद्ध करें। इससे हमारे पितरों की आत्मा प्रसन्न होगी। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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