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दिव्यांग जनों में स्वावलंबन का संचार

डॉ दिलीप अग्निहोत्री
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

दिव्यांग शब्द के प्रचलन मात्र से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आया है। इससे दिव्यंजनो में स्वाभिमान व उत्साह का संचार हुआ है। समाज में यह परिलक्षित भी हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने भी इसके दृष्टिगत अनेक प्रयास किये है। दिव्यांगजनों को सुविधा,सम्मान व प्रोत्सान हेतु अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। यह सन्देश दिया गया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है। इसको अवसर में बदलने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंभीर विचार के बाद इस शब्द को प्रचलित किया था। इसे व्यापक रूप में स्वीकृति मिली है। सभी व्यक्तियों में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। इसे पहचाने तथा आगे बढ़े। दिव्यांगजन किसी से कम नहीं है। वह सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर रहे है।

दिव्यांग जनों को अपनी क्षमता का विकास करना चाहिए। 2015 से दिव्यांगों को विशेष सम्मान सरकार द्वारा दिया जा रहा है। इस शब्द से दिव्यांगों के भाव और मानसिकता में बदलाव आया है, उनको मानसिक मजबूती मिली है। उनमें आत्मविश्वास का संचार हुआ है। इसीलिए जीवन के हर क्षेत्र में उनकी भागेदारी बढ़ी है। विकलांगता कोई कमजोरी नही है, इन्हें सहयोग दिया जाए तो यह अपनी मानसिक मजबूती के बल पर उन दुर्बल लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।

जिनको प्राप्त करना किसी भी रूप में आसान नहीं है। सभी दिव्यांग जनों को यूडीआईडी कार्ड के माध्यम से सरकार द्वारा चल रही समस्त योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। सरकार द्वारा विकलांग बच्चों के लिए अलग से स्कूल, अलग से शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व दिव्यांग दिवस पर प्रत्येक जिले में सौ दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दिये जाने की घोषणा की। सरकार इसके लिए युद्धस्तर पर कार्य कर रही है।

विश्व दिव्यांग दिवस पर डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्विद्यालय के अटल ऑडीटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाली संस्थाओं को राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरित किये गए। दिव्यांगजनों को उपकरण का वितरण भी किया। योगी अदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी परिस्थितियों में शारीरिक व मानसिक रूप से कोई कमी रह गई है तो उनकी प्रतिभा को ऊर्जा प्रदान करने का काम हो रहा है। कोरोना महामारी के बावजूद देश के पैराओलम्पिक खिलाड़ियों ने टोक्यो में शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने उन्नीस मेडल प्राप्त किए।

छप्पन खिलाड़ियों का दल पैराओलम्पिक में भागीदार बना। राज्य सरकार ने सभी मेडल प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि से सम्मानित किया। पैराओलम्पिक में सफलता इस बात को प्रदर्शित करती है कि थोड़ा भी इन्हें प्राेत्साहन दिया जाए तो वे अपनी प्रतिभा का लाभ राष्ट्र को दे सकते हैं। वर्तमान में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल देने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा हैं।

तकनीक के साथ दिव्यांग जनों को जोड़ा जा रहा है। नरेंद मोदी ने दिव्यांगजनों की प्रतिभा को बहुत नजदीक से पहचाना है। भारत की ऋषि परम्परा में अष्टवक्र हुए।

2017 से दिव्यांगजनों की पेंशन, कुष्ठ जनों को पेंशन, कृतिम अंग, मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, दिव्यांगजनों की शादी के लिए भी सरकार धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप उपलब्ध कराती है। परिवहन निगम की बसों में नि:शुल्क यात्रा की व्यवस्था,दिव्यांगजन विश्वविद्यालयों में सीटों का आरक्षण करने का भी काम सरकार ने किया है।

प्रदेश सरकार ने तय किया कि भारत सरकार की तर्ज पर दिव्यांगता की कैटगरी को सात से इक्कीस तक पहुंचाने और साथ-साथ उन्हें शासकीय सेवाओं में आरक्षण का लाभ मिल सके, इसका दायरा बढ़ाने का काम भी सरकार ने किया है।

दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों में ट्राईसाइकिल,व्हीलचेयर प्रदान कर उन्हें बनाया जा रहा है।

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