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डिजिटल इंडिया, डिजिटल कृषि, डिजिटल युवा : डिजिटल प्रौद्योगिकी के ज़रिए कृषि को सशक्त बनाना समय की माँग

    किशन भावनानी 

भारत एक कृषि और गांव प्रधान देश है और भारत की करीब 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या इसमें जुड़ी है। इसलिए, मीडिया से लेकर राजनीति के बड़े-बड़े लोग अलग-अलग मंचों पर कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों की चर्चा करते रहते हैं। इस क्षेत्र में विकास, रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्कीमों, अनुदान पर अनेक बातें और वाद-विवाद तो हम सुनते ही हैं। हाल ही में तीन कृषि कानूनों को लेकर शायद, भारत के इतिहास में अब तक का इतना बड़ा विरोध, इतनी लंबी अवधि का आंदोलन भी देश ने देखा।

देश ने यह भी देखा कि इस आंदोलन की वजह से सरकार को केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून वापिस लेने पर मजबूर होना पड़ा। हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों से सरकार सकारात्मक कदम उठाते हुए कृषि क्षेत्र को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल कृषि की ओर आगे बढ़ रही है।फिर भी, आज के डिजिटल इंडिया में कृषि कार्यों में प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमता का बढ़ता उपयोग और जलवायु की चुनौती से सुरक्षा, सालों से समय की मांग बनी हुई है।

डिजिटल कृषि और कृत्रिम बुद्धिमता को बढ़ाने के लिए आज अनेक कृषि क्रियाओं को प्रौद्योगिकी से जोड़ा गया है जिसमें हल चलाने, धान काटने, कीटनाशकों, पोषक तत्वों पर छिड़काव करने, ड्रोन का उपयोग, भूमि डिजिटल रिकॉर्ड, फसल मूल्यांकन सहित अनेक कृषि क्रियाओं, प्रक्रियाओं और कृषि संबंधी कार्य को आज एक तरह से रोबोट और मशीनरी से क्रियान्वित किया जा रहा है।

डिजिटल कृषि से जुड़े फायदों की बात करें तो इससे कृषि कार्यों में ही नहीं बल्कि, इसका दूरगामी सकारात्मक लाभ खाद्य सुरक्षा, भंडारण, फसल की उन्नत किस्मों की खोज, नवाचार, नवोन्मेष का कृषिक्षेत्र में रणनीतिक रोडमैप बनाकर लॉन्गटर्म बेनिफिट देने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इससे भारत कृषि प्रधान देश के रूप में तेज़ी से विकास करते हुए विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा में चार चांद लगा सके।

5 फरवरी 2022 को एक कार्यक्रम में संबोधन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी डिजिटल कृषि पर जोर दिया है। पीआईबी के अनुसार, उन्होंने बदलते भारत के एक और आयाम यानी डिजिटल कृषि का उल्लेख किया। उन्होंने इस आयाम को भारत का भविष्य बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रतिभाशाली भारतीय युवा इस क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने फसल मूल्यांकन, भूमि रिकॉर्ड डिजिटलीकरण, ड्रोन द्वारा कीटनाशकों और पोषक तत्वों का छिड़काव जैसे सुविधाओं को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि हम इन कार्यों में प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग को देख रहे हैं। उन्होंने कहा, “डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाने के लिए भारत के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों और 6 मौसमों की चर्चा करते हुए भारतीय कृषि के समृद्ध प्राचीन अनुभव पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि भारत का फोकस, अपने किसानों को जलवायु चुनौती से सुरक्षा प्रदान करने के लिए मौलिकता को फिर से अपनाने और भविष्य की ओर बढ़ने के तालमेल पर है। उन्होंने कहा, हमारा ध्यान हमारे 80 प्रतिशत से अधिक किसानों पर है, जो छोटे किसानों की श्रेणी में आते हैं और जिन्हें हमारी सबसे ज्यादा जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित वे लोग हैं, जो कम संसाधनों के साथ विकास के अंतिम पायदान पर हैं। इसीलिए, उन्होंने दुनिया से जलवायु परिवर्तन पर विशेष ध्यान देने के लिए भारत के अनुरोध को दोहराया। उन्होंने लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट; पी3 – प्रो प्लेनेट पीपल मूवमेंट और 2070 तक भारत नेट जीरो टारगेट के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत ने क्लाइमेट चैलेंज से निपटने के लिए दुनिया से इस पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है। प्रो-प्लेनेट पीपल एक ऐसा मूवमेंट है, जो क्लाइमेट चैलेंज से निपटने के लिए, हर कम्युनिटी को, हर इंडिविजुअल को क्लाइमेट रिस्पांसिबिलिटी से जोड़ता है। ये सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत सरकार के एक्शन्स में भी रिफ्लेक्ट होता है।

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि अमृत काल में, भारत उच्च कृषि विकास के साथ-साथ समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कृषि क्षेत्र में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा, कृषि में आबादी के एक बड़े हिस्से को गरीबी से बाहर निकालने और उन्हें बेहतर जीवन-शैली की ओर ले जाने की क्षमता है। यह अमृत काल भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम क्षेत्रों के किसानों को भी नए साधन उपलब्ध कराएगा।

भारत एफपीओ और एग्रीकल्चर वैल्यू चेन स्थापित करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।  मोदी ने कहा, देश के छोटे किसानों को हजारों एफपीओ में संगठित करके हम उन्हें एक जागरूक और बड़ी मार्केट फोर्स बनाना चाहते हैं।
प्राधानमंत्री ने कहा है कि भारत का लक्ष्य सिर्फ खाद्यान्न का उत्पादन बढ़ाना नहीं है। भारत के पास विश्व के एक बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम को चलाने के लिए पर्याप्त अतिरिक्त खाद्यान्न उपलब्ध है। उन्होंने कहा हम खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पोषण सुरक्षा पर फोकस कर रहे हैं।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,,डिजिटल कृषि,,यह कृषि कार्यों में प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमता का बढ़ता उपयोग और जलवायु चुनौती से सुरक्षा समय की मांग है तथा प्रतिभाशाली भारतीय युवाओं को डिजिटल प्रौद्योगिकी के माध्यम से कृषि को सशक्त बनाने में भरपूर योगदान देने की तात्कालिक ज़रूरत है।

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