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समय पर किया लॉकडाउन नहीं तो अब तक 20 लाख लोग कोरोना संक्रमित होते- स्वास्थ्य मंत्रालय

भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज 22 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कोरोना वायरस से 37,000-78,000 मौतें हो सकती थीं. 14-29 लाख मामले हो सकते थे, लाखों मामले नहीं फैले, क्योंकि हमने फैसला किया कि हम घर की लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करेंगे.

उन्होंने बताया कि पिछले चार दिन से कोविड-19 के लिए रोजाना एक लाख से अधिक जांच की जा रही है. सरकार ने कहा है कि लगभग 80 प्रतिशत केस पांच राज्य, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और दिल्ली से हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत में कोरोना का प्रकोप सीमित क्षेत्र तक ही है. सरकार ने कहा है कि दो स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों द्वारा तैयार मॉडल से पता चलता है कि लॉकडाउन के कारम लगभग 23 कोविड-19 के केस और 68,000 मौतों को टाला गया है.

24 घंटे में कोविड-19 के 3,234 मरीज ठीक हुए

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शुक्रवार दोपहर एक बजे तक कोविड-19 की 27,55,714 जांच की गई. एक दिन में 1,03,829 नमूनों की जांच हुई. उन्होंने बताया कि 3.13 प्रतिशत से घटकर 3.02 प्रतिशत हो गई. मंत्रालय के अनुसार 24 घंटे में कोविड-19 के 3,234 मरीज ठीक हुए और अब तक 48,534 मरीज अभी तक ठीक हो चुके हैं.

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कोरोना वायरस को फैलने से रोक दिया

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 21 मई तक कोरोना वायरस का संक्रमण कुछ राज्यों और शहरों/जिलों में केंद्रित हो चुका है. डॉ वीके पॉल ने बताया कि पांच राज्यों में लगभग 80त्न केस और पांच शहरों में 60प्रतिशत से अधिक, 10 राज्यों में 90प्रतिशत से अधिक और 10 शहरों में 70प्रतिशत से अधिक मामले कोविड 19 के आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण कोविड 19 मौतों की संख्या की वृद्धि दर में भी काफी गिरावट आई है.

कोरोना में आ रही गिरावट

कुछ आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि कोविड 19 मामलों की वृद्धि दर में 3 अप्रैल, 2020 से लगातार गिरावट देखी गई है. समय से अगर लॉकडाउन न लगाया गया होता तो आज 14 से 29 लाख के बीच कोरोना मरीज होते. पॉल के मुताबिक लॉकडाउन के कारण आज हजारों जिंदगियों को बचा पाए हैं. उन्होंने भारत सरकार की योजना आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब तक 1 करोड़ लोग इलाज करा चुके हैं. ये बहुत बड़ी उपलब्धि हैं.

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