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इजरायल, यूएई और अमेरिका के साथ मज़बूत आर्थिक सहयोग बनाने के लिए तैयार “भारत”

भारत, इजरायल, यूएई और अमेरिका के नए ताकतवर समूह आइ2 यू2 का पहला शिखर सम्मेलन 14 जुलाई को होगा। वर्चुअल माध्यम से आयोजित किए जा रहे इस शिखर सम्मलेन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, इजरायल के पीएम नफ्ताली बेनेट और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान वर्चुअली शामिल होंगे। आइ2यू2 का गठन मिडिल-ईस्ट इलाके में अपना प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है, ताकि यहां पर चीन के प्रभाव को सीमित किया जा सके। आई2यू2 में आई का मतलब इंडिया और इस्राइल से है। वहीं यू का मतलब यूएई व यूएस (अमेरिका) से है।

विदेश मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी किए गए बयान में कहा गया है कि वर्चुअल माध्यम में आयोजित होने वाले इस शिखर सम्मलेन का मुख्य फोकस संयुक्त निवेश, आर्थिक सहयोग और निजी क्षेत्र के सहयोग पर है। बयान में आगे कहा गया आई2 यू2 का उद्देश्य पानी, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे छह क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करना है। यह संगठन बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण उद्योगों के लिए कम कार्बन उत्सर्जन, सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार और महत्वपूर्ण उभरती और हरित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए निजी क्षेत्र की पूंजी और विशेषज्ञता को एक साथ एक मंच पर लाएगा।

चूंकि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन आई2 यू2 के इस पहले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। ऐसे में यह समझना आसान है कि अमेरिका के लिए इस सम्मलेन का क्या महत्व है. पिछले महीने एक प्रेस कांफ्रेंस में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने भी इस बात पर जोर देते हुए कहा था कि ऐसे बहुत है कारण है, जिसके चलते अमेरिका इस सम्मलेन में शामिल होने के लिए रूचि दिखा रहा है।

उन्होंने कहा कि अन्य सभी तीन देश प्रौद्योगिकी और नवाचार के केंद्र हैं, इसलिए प्रौद्योगिकी, व्यापार और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उन्हें लंबे समय तक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण भागीदार बनाना है. उन्होंने यह भी कहा कि आई2 यू2 के माध्यम से अमेरिका मौजूदा संबंधों को फिर से सक्रिय करना चाहता है, साथ ही उन रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहता है जिन पर शायद अभी तक अधिक जोर नहीं दिया गया है। अमेरिका भी अनुकूल रूप से आई2 यू2 की ओर देख रहा है, ताकि मिडिल-ईस्ट में इज़राइल के एकीकरण को बढ़ाया जा सके।

इस वर्चुअल समिट का उद्देश्य क्या है? ऐसे कौन से कारक हैं, जो अमेरिका को भागीदारी को प्रेरित कर रहे हैं? यह समूह भारत को वैश्विक राजनीति में लाभ उठाने में कैसे मदद कर सकता है? विदेश मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने इनके जवाब में कहा कि सभी तीन साझेदारों अमेरिका, इज़राइल और यूएई के भारत के साथ लंबे समय से संबंध हैं और हमें विश्वास है कि आई2 यू2 उन तीनों देशों के साथ हमारी साझेदारी को और मज़बूती देगा। मुख्य रूप से, भारत पश्चिम एशिया में चीन का मुकाबला करना चाहता है और मेरा मानना है कि आई2यू2 उस लक्ष्य को प्राप्त करने की शुरुआत है।
चीन का मुकाबला करने और गहरी आर्थिक साझेदारी के निर्माण के साथ चारों देश एक नया रणनीतिक गठबंधन शुरू करने के लिए तैयार हैं। आने वाले समय में इस समूह के महत्व को आसानी से जाना जा सकेगा।

रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी

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