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बहुत कुछ कहता है भारतीय संविधान, मूल प्रति देखने से मिलेगी भारतीय धर्म और संस्कृति की झलक

       दया शंकर चौधरी

जिस संविधान को 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने अपनाया था। आज जिस संविधान से देश चलता है, उस संविधान की मूल प्रति को देखना अपने आप में दिलचस्प है। भारतीय संविधान की मूल प्रति वैसे तो भारतीय संसद में संरक्षित है, जिसे भारतीय संसद की लाइब्रेरी में हीलियम से भरे केस में रखा गया है। उस मूल प्रति की एक प्रति मेरठ कॉलेज के विधि विभाग की लाइब्रेरी में भी है। इस प्रति को देख आप उसके लिखावट और स्वरूप को महसूस कर सकते हैं।

मेरठ कॉलेज में रखे संविधान की मूल प्रति में संविधान सभा के सदस्यों के वास्तविक हस्ताक्षरों को देखा जा सकता है। संविधान की मूल प्रति हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में हाथ से लिखी गई है। टाइपिंग या प्रिंट नहीं है। मेरठ कॉलेज की लाइब्रेरी में अंग्रेजी में लिखी गई मूल प्रति की फोटो कॉपी है। जिसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था। रायजादा ने पेन होल्डर निब से संविधान के हर पन्‍ने को बहुत ही खूबसूरत इटैलिक अक्षर में लिखा है। संविधान को बनाने में दो साल 11 महीने और 18 दिन लगे थे, लेकिन छह महीने में इसे लिखा गया। संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए। मूल संविधान में दस पेज पर सभी के हस्ताक्षर हैं।

मूल प्रति में 14 भाषाएं और आठ अनुसूची के बाद सबसे पहले तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को हस्ताक्षर करना था, लेकिन मूल प्रति में अनुसूची के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के हस्ताक्षर हैं। मूल प्रति में करीब 46 लोगों के हिंदी में हस्ताक्षर हैं। पहला हिंदी में हस्ताक्षर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का है। संविधान लिखने के लिए रायजादा ने कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था। हर पेज पर नाम लिखने की शर्त रखी थी, जो सभी पेजों पर दिखता है। संविधान की मूल प्रति देखने से भारतीय परंपरा, धर्म और संस्कृति को भी महसूस किया जा सकता है। मेरठ कॉलेज में रखे संविधान की प्रति में प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस और विश्व भारती शांति निकेतन के कलाकारों की बनाई तस्वीरों को भी देख सकते हैं। संविधान में मोहनजोदड़ो, वैदिक काल, रामायण, महाभारत, बुद्ध के उपदेश, महावीर के जीवन, मौर्य, गुप्त व मुगल काल, इसके अलावा गांधी, सुभाष, हिमालय से लेकर सागर आदि के चित्रों को भी आप देख सकते हैं।

लोकतांत्रिक प्रणाली का मूलाधार संविधान

भारत गणराज्य का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। संविधान दिवस का भव्य समारोह आजादी के बाद पहली बार भाजपा नीत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में संविधान सभा के प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव #आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर को संविधान दिवस मनाया गया। संविधान सभा ने भारत के संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया था। इसके बाद गणतंत्र भारत में 26 जनवरी 1950 से संविधान को भारत में लागू किया गया था। यह बात अलग है कि आंबेडकरवादी और बौद्ध लोगों द्वारा कई दशकों पूर्व से ‘संविधान दिवस’ मनाया जाता है। 26 नवंबर का दिन संविधान के महत्व का प्रसार करने और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और अवधारणाओं का प्रसार करने के लिए चुना गया था। इस दिन संविधान निर्माण समिति के वरिष्ठ सदस्य डॉ सर हरीसिंह गौर का जन्मदिवस भी होता है।

गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (एक्ट) (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे एक #लोकतान्त्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। *26 जनवरी को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई. एन. सी.) ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।* भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन लाहौर में सन् 1929 के दिसंबर में पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुआ था। जिसमें प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, तो ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित इकाई बन जाने और उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा की जाएगी। कांग्रेस ने उसी दिन से अपना सक्रिय आंदोलन भी आरंभ किया था।

उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। इसके पश्चात स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया। #भारत के स्वतंत्र हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से आरंभ कर दिया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ. भीमराव अम्बेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयां थी, जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ. भीमराव आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर ने 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपूर्द किया। इसलिए 26 नवंबर को भारत में संविधान दिवस के रूप में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की।

इसकी बैठकों में प्रेस (मीडिया) और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत #संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। जैसा कि आप सभी जानते है कि 15 Aug 1947 को अपना देश हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद अंग्रेजों की दासता (अंग्रेजों के शासन) से मुक्त हुआ था। इसके बाद 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय शासन और कानून व्यवस्था लागू हुई। ये सभी जानते हैं कि इस स्वतन्त्रता को पाने में अपने देश की हजारों माताओं की गोद सूनी हो गई थी, हजारों बहनों बेटियों की माँग का सिंदूर मिट गया था, तब कहीं इस महान बलिदान के बाद देश स्वतंत्र हो सका था।

संविधान सभा के 284 सदस्यों में 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए। मूल संविधान में दस पेज पर सभी के हस्ताक्षर हैं। मूल प्रति में 14 भाषाएं और आठ अनुसूची के बाद सबसे पहले तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को हस्ताक्षर करना था, लेकिन मूल प्रति में अनुसूची के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के हस्ताक्षर हैं। मूल प्रति में करीब 46 लोगों के हिंदी में हस्ताक्षर हैं। पहला हिंदी में हस्ताक्षर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का है। संविधान लिखने के लिए रायजादा ने कोई पारिश्रमिक नहीं लिया था। हर पेज पर नाम लिखने की शर्त रखी थी, जो सभी पेजों पर दिखता है। संविधान की मूल प्रति देखने से भारतीय परंपरा, धर्म और संस्कृति को भी महसूस किया जा सकता है। संविधान की प्रति में प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस और विश्व भारती शांति निकेतन के कलाकारों की बनाई तस्वीरों को भी देख सकते हैं। संविधान में मोहनजोदड़ो, वैदिक काल, रामायण, महाभारत, बुद्ध के उपदेश, महावीर के जीवन, मौर्य, गुप्त व मुगल काल, इसके अलावा गांधी, सुभाष, हिमालय से लेकर सागर आदि के चित्रों को भी आप देख सकते हैं।

संविधान को पूरी तरह अपनाए जाने से पहले संविधान सभा ने दो साल 11 महीने और 18 दिन के समय में 166 बार बैठक की थी।भारत का संविधान असल में उन सिद्धांतों और दृष्टांतों का लेखा जोखा है, जिनके आधार पर देश की सरकार और नागरिकों के लिए मौलिक राजनीतिक सिद्धांत, प्रक्रियाएं, अधिकार, दिशा निर्देश, प्रतिबंध और कर्तव्य आदि तय होते हैं। भारत का संविधान भारत को संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक गणतंत्र घोषित करता है और अपने नागरिकों के लिए समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी देता है।

  • 9 दिसंबर 1946: संविधान निर्माण के लिए संविधान सभा ने पहली बैठक की थी।
  • संविधान अंग्रेज़ी और हिंदी में लिखा गया। अंग्रेज़ी में हस्तलिखित मूल ​संविधान में कुल 1,17,369 शब्दों में 444 आर्टिकल, 12 शेड्यूल और 115 संशोधन लिखे गए।
  • अंग्रेज़ी भाषा में इसे सुंदर कैलिग्राफी में हाथ से लिखने का प्रेमबिहारी नारायण रायज़ादा ने 6 महीनों में किया था। जबकि हिंदी भाषा में वसंत कृष्ण वैद्य ने हाथ से लिखा था।नंदलाल बोस ने संविधान के पन्नों पर चित्रांकन किया था।
  • संविधान की मूल हस्तलिखित कॉपियां संसद भवन की लाइब्रेरी में एक खास हीलियम केस में रखी गई हैं।
  • संविधान के पहले ड्राफ्ट में 2000 से ज़्यादा संशोधन किए गए थे और फाइनल ड्राफ्ट 26 नवंबर 1949 को तैयार हुआ था।
  • जनवरी 2019 तक भारत के संविधान में कुल 103 संशोधन किए गए जबकि संविधान लागू होने के पहले 62 वर्षों में सिर्फ 94 संशोधन हुए थे।
  • 24 जनवरी 1950 : संविधान सभा के सदस्यों ने हाथ से लिखी गई संविधान के दो कॉपियों पर संसद भवन के सेंट्रल हॉल में दस्तखत किए थे।

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