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युवा पीढ़ी को अनजान स्वाधीनता सेनानियों के त्याग और तपस्या से परिचित कराया जाना ज़रूरी 

  • उपराष्ट्रपति द्वारा स्वाधीनता सेनानी तथा राजनेता स्वर्गीय हेमवती नन्दन बहुगुणा की जीवनी का लोकार्पण

  • हेमवती नंदन बहुगुणा निर्भीक नेता थे जिन्होंने समाज के गरीब दुर्बल वर्गों के  उत्थान के लिए काम किया

  • Published by- @MrAnshulGaurav
  • Wednesday, May 04, 2022

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति निवास पर, बुधवार को, आयोजित एक अवसर पर, स्वाधीनता सेनानी तथा राजनेता स्वर्गीय हेमवती नन्दन बहुगुणा की जीवनी ‘हेमवती नंदन बहुगुणा : भारतीय चेतना के संवाहक’ का लोकार्पण उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के हाथों किया गया। यह जीवनी, हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों ही संस्करणों में उपलब्ध है, जिसे प्रो. रीता बहुगुणा जोशी तथा डा. राम नरेश त्रिपाठी द्वारा लिखी गईं हैं।

युवा पीढ़ी को अनजान स्वाधीनता सेनानियों के त्याग और तपस्या से परिचित कराया जाना ज़रूरी 

इस अवसर पर,  करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास मातृभूमि के लिए असीम प्रेम और निःस्वार्थ त्याग की ऐसी अनगिनत गाथाओं से भरा पड़ा है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि हमारे स्वाधीनता आंदोलन के अनेक नायकों को इतिहास की पुस्तकों में वो सम्मान और स्थान नहीं मिला है जिसके कि वो अधिकारी थे।

श्री नायडू ने कहा कि उन्होंने नई युवा पीढ़ी को इन विभूतियों के त्याग और तपस्या से परिचित कराने का आह्वाहन किया जिससे नई पीढ़ी देश के निर्माण हेतु उनके पदचिन्हों का अनुसरण कर सके। हेमवती नन्दन बहुगुणा को प्रसिद्ध स्वाधीनता सेनानी, राजनेता और कुशल प्रशासक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने अपना सारा जीवन देश सेवा में अर्पित कर दिया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब आप उनकी जीवनी पढ़ते हैं तो पहले पहल बहुगुणा जी विद्रोही प्रतीत होते हैं लेकिन जैसे जैसे आप आगे पढ़ते जाते हैं तब समझ आता है कि उनके लिए वस्तुतरू राष्ट्र ही सर्वाेपरि था।

उन्होंने कहा कि बहुगुणा जी आज़ादी की अवधारणा से निकट से जुड़े रहे। सत्रह वर्ष की किशोरावस्था में ही स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गए, लेकिन अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार हुए जहां उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण अनेक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि बहुगुणा जी के राष्ट्र समर्पण की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनके जीवन का एक वाक्या भी उद्धृत किया जिसमें उन्होंने स्वाधीनता सेनानी कोटे से मिलने वाले जमीन के टुकड़े को लेने से, यह कहते हुए इंकार कर दिया कि उसे किसी अन्य जरूरतमंद स्वतंत्रता सेनानी को आबंटित कर दिया जाय।

समाज के दुर्बल वर्गों के प्रति बहुगुणा जी की संवेदना का उदाहरण देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे अक्सर युवा लड़कों को एकत्र कर, उन्हें गांव की सफाई अभियान में जोड़ लेते या फिर दूर से पानी लाने में ग्रामीण महिलाओं की सहायता करवाते।

इस संदर्भ में श्री नायडू ने सरकार द्वारा जनहित में प्राथमिकता के आधार पर चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान जैसे विभिन्न कार्यक्रमों की सराहना की और लोगों से ऐसे कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया जिससे एक हरे भरे स्वच्छ भारत का निर्माण हो सके।

प्रसंगवश उपराष्ट्रपति ने 1980 की उस घटना का भी उल्लेख किया जब हेमवती बहुगुणा ने अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था तथा सिद्धांत के आधार पर साथ ही साथ संसद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। यद्यपि तब तक दल बदल कानून लागू नहीं हुआ था, जिसके तहत, उनके इस्तीफे की अनिवार्यता हो। उन्होंने कहा कि बहुगुणा जी सत्ता नहीं बल्कि व्यवस्था में बदलाव चाहते थे।

समकालीन भारतीय राजनीति के प्रमुख राजनेता के जीवन पर विस्तार से गहराई में शोध की गई ऐसी जीवनी के प्रकाशन के लिए उपराष्ट्रपति ने पुस्तक के लेखकों, प्रो. रीता बहुगुणा जोशी तथा डा राम नरेश त्रिपाठी का अभिनंदन किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी जीवनियां देश के युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरणा देंगी।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से केन्द्रीय मंत्री राज नाथ सिंह, डा0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय,  एस. पी. एस. बघेल, उत्तराखण्ड विधान सभा अध्यक्ष  ऋतु खण्डूरी, जस्टीस  अशोक भूषण, शेखर बहुगुणा, वेद प्रकाश वैदिक, प्रो0 राम गोपाल यादव, पूर्व मंत्री डा0 महेश शर्मा, पूर्व गृहमंत्री महाराष्ट्र कृपा शंकर सिंह सहित कई विधायकगण, वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी, कलाकार, लेखक सहित अलग-अलग विधाओं के विशिष्ठ लोग उपस्थित रहे।

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