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साँस्कृतिक राष्ट्रवाद की विरासत 

   डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सन्यास और राष्ट्र सेवा का भाव गौरक्ष पीठ से विरासत में मिला है. इस पीठ का साँस्कृतिक राष्ट्रवाद के जागरण में उल्लेखनीय योगदान रहा है. पीठाधीश्वर के रूप में योगी आदित्यनाथ इसका सतत संवर्धन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री पद के संवैधानिक दायित्व का निर्वाह भी वह इसी भावना के अनुरूप कर रहे हैं. यही कारण है कि संस्कृति और विकास के क्षेत्र में अभूत पूर्व कार्य हुए है।

गौरक्ष पीठ द्वारा करीब दो दर्जन शिक्षण संस्थानों का संचालन किया जाता है. इन सभी में ज्ञान-विज्ञान के साथ ही भारतीय संस्कृति के प्रति स्वाभिमान की प्रेरणा दी जाती हैं. मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ ने ऐसे अनेक सामाजिक सेवा और जन जागृति के कार्यों को विस्तार दिया है. उनके सभी कार्य संविधान की परिधि में है. इसका निहितार्थ है कि संविधान निर्माता भारत के समग्र विकास चाहते थे। पूर्ववर्ती सरकारों ने सेक्यूलर राजनीति के नाम पर भेद भाव किया. उन्होने वोट बैंक सियासत को अहमियत दी. साँस्कृतिक राष्ट्रवाद से इनको परहेज रहा।

नरेन्द्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की सरकारें सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास की भावना से कार्य कर रहीं हैं. भारत में नए सिरेमिक राष्ट्रीय स्वाभिमान का जागरण हो रहा है. इससे सर्वाधिक परेशानी विपक्षी पार्टियों को हो रही है. उनकी परम्परागत राजनीति को लोग समझने लगे हैं. इसमें परिवारवाद और वोटबैंक के समीकरण ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं. इन पार्टियों की सरकारें कभी अयोध्या में श्री राम मन्दिर और काशी में भव्य श्री विश्वनाथ धाम निर्माण की कल्पना भी नहीं कर सकती थी।

आज सदियों पुरानी समस्याओं का शांति पूर्ण समाधान हो रहा है. विकास कार्यों के भी कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं. भारतीय संस्कृति और परिवेश के अनुरूप शिक्षा नीति बनाने का कार्य भी इसी सरकार में सम्भव था. नई शिक्षा नीति पर प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है. योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी की तिरपनवीं तथा ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी की आठवीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह में संस्कृति और सेवा की महान विरासत का उल्लेख किया. कहा कि गोरक्षपीठ के पूज्य आचार्यद्वय ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ ने धर्म, समाज और राष्ट्र की समस्याओं से पलायन न करने का आदर्श स्थापित किया। उनकी साधना और सिद्धि प्रेरणादायक है।

उन्होंने गोरक्षपीठ को मात्र पूजा पद्धति और साधना स्थली तक सीमित नहीं रखा.बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के विभिन्न आयामों से जोड़कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया. गोरक्षपीठ की परंपरा सनातन धर्म की महत्वपूर्ण कड़ी है। आश्रम पद्धति और समाज,देश और धर्म के प्रति दायित्व मार्गदर्शन इस पीठ ने किया है। कुछ दिन पहले योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि भारतीय संस्कृति के आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः के सूत्र वाक्य को आत्मसात करते हुए उसके श्रेष्ठ अभ्यास को शासकीय संस्थानों में लागू किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ज्ञान के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक आयामों का बेहतर समावेश है। यह नीति समाज को स्वाबलम्बन और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने में सहायक सिद्ध होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी होने से विद्यार्थी किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका व्यावहारिक व तकनीकी ज्ञान भी समृद्ध होगा।

प्रदेश के सबसे बड़े अन्तर्विभागीय कन्वर्जेंस कार्यक्रम ऑपरेशन कायाकल्प और स्कूल चलो अभियान का करीब डेढ़ लाख स्कूलों में सफल क्रियान्वयन हुआ है। विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए छह हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का निवेश किया गया है। शिक्षा की गुणवत्ता राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। योगी आदित्यनाथ के समाजसेवा संकल्प के चलते ही उत्तर प्रदेश चिकित्सा क्षेत्र में नंबर वन पर पहुँच गया है।

करीब दो माह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में एक साथ नौ जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण किया था। इस कार्यक्रम का आयोजन सिद्धार्थ नगर में किया गया था। यह उत्तर प्रदेश के लिए राज्य के लिए ऐतिहासिक अवसर था। जिसमें एक साथ नौ जिलों में मेडिकल कॉलेजों का संचालन शुरू हुआ। चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार व बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में मेडिकल कॉलेज निर्माण की योजना संचालित है। इस योजना को कोरोना कालखंड में भी तेजी से क्रियान्वित किया गया। इस कारण नौ जनपदों में मेडिकल कॉलेजों के निर्माण संभव हुआ। देवरिया, एटा, फतेहपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, सिद्धार्थ नगर, गाजीपुर, मिर्जापुर और जौनपुर में मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए।

इनके साथ ही उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या अड़तालीस हो गई है। तेरह अन्य मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य भी तेज गति से चल रहा है। पांच वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश में मात्र बारह मेडिकल कालेज थे। विगत पांच वर्षों के दौरान इनकी संख्या चार गुना बढ़ गई है। हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास कार्य जारी है। इन संस्थानों में साढ़े चार सौ से अधिकसंकाय सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। प्रत्येक मेडिकल कालेज में सौ सौ सीटें एमबीबीएस की होंगी। इस तरह एमबीबीएस की कुल नौ सौ सीटें बढ़ जाएंगी।अभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की करीब तीन हजार सीटें हैं।

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल पैसठ हजार से अधिक डॉक्टर पंजीकृत हैं, जिनमें से बावन हजार से अधिक राज्य में प्रैक्टिस करते हैं। राज्य की आबादी और डॉक्टरों की इस संख्या के अनुसार प्रत्येक डॉक्टर पर करीब अड़तीस सौ मरीजों को देखने की जिम्मेदारी है। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रत्येक डॉक्टर के जिम्मे एक हजार मरीज होने चाहिए। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मात्र तेरह हजार डॉक्टर कार्यरत हैं। जबकि राज्य की बढ़ती आबादी और मरीजों के आंकड़ों के लिहाज से यह संख्या लगभग पैंतालीस हजार होनी चाहिए।

सरकार ने प्रदेश के सुल्तानपुर सोनभद्र, चंदौली, बुलंदशहर, पीलीभीत, औरैया, बिजनौर, कानपुर देहात, कुशीनगर, गोंडा, कौशाम्बी, ललितपुर और लखीमपुर खीरी में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए हैं। प्रत्येक मेडिकल कालेज के निर्माण पर करीब सवा तीन सौ करोड़ रुपये खर्च होने हैं। धरातल पर देखें तो इनमें से कुछ जिलों में मेडिकल कॉलेज के लिए नींव पड़ गई, तो कहीं कार्यालय ही स्थापित हो पाए हैं। वहीं कुछ जमीन चिन्हित ही कर पाए हैं। अधिकतर मेडिकल कॉलेजों को पूरा करने के लिए अठारह माह का लक्ष्य दिया गया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में चार दशकों के दौरान इंसेफेलाइटिस प्रतिवर्ष डेढ़ हजार तक बच्चे इस बीमारी के चलते दम तोड़ देते थे। चालीस साल में पचास हजार मौतें हुईं। योगी सरकार ने स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाकर, शासन-प्रशासन के साथ जनता के सहयोग से बीमारी का समाधान निकाला। इन सब का परिणाम यह है कि इंसेफलाइटिस से होने वाली मौतें अब शून्य की तरफ हैं। स्पष्ट है कि गोरक्षपीठ ने शिक्षा स्वास्थ्य और सेवा के विभिन्न आयामों से जोड़कर लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।

इस भावना आज उत्तर प्रदेश के विकास में परिलक्षित हो रही है. योगी ने कहा कि दौर में जब बहुत से लोग लोग भौतिकता के पीछे दौड़ते हैं, देशकाल व समाज के अनुरूप कार्यक्रमों से जुड़कर यह पीठ ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ व ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ द्वारा स्थापित आदर्शों को युगानुकूल तरीके से आगे बढ़ा रही है। जब देश पराधीन था तब यह धार्मिक पीठ सीमित संसाधनों से शिक्षा का अलख जगाने के अभियान से जुड़ती है। पूज्य संतों ने आजादी के आंदोलन को नेतृत्व दिया। इस दिशा में गोरक्षपीठ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब धर्म पराधीनता के दंश को झेल रहा था तो गोरक्षपीठ खुद को कैसे अलग रख सकती थी। आजादी मिलने के बाद राष्ट्र निर्माण के अभियान को गति देने में भी सदैव योगदान दिया. ब्रह्मलीन महंतद्वय का व्यक्तित्व एवं कृतित्व सदैव प्रेरणादायी है। श्रीराम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने के साथ ही उन्होंने गोरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के विभिन्न प्रकल्पों को प्रवाहमान बनाया।

अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के मार्ग प्रशस्त होने से भारत के लोकतंत्र व न्यायपालिका की ताकत वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित हुई है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन एवं प्रयागराज का दिव्य भव्य कुंभ सांस्कृतिक विजय के अभियान का हिस्सा है। प्राकृतिक खेती के लिए भारतीय गोवंश ही आधार होगा। भारतीय नस्ल के गोवंश संरक्षण की बात वैश्विक मंचों से की जा रही है। इससे गाय भी बचेगी और मानवता को बीमारियों से मुक्ति भी मिलेगी।

वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है। सभी को इस पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में अपना देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। आजादी के शताब्दी वर्ष तक हमारा लक्ष्य भारत को विकसित एवं दुनिया की महा ताकत बनाने का होना चाहिए। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हम सभी को विगत स्वाधीनता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए पंच प्रणों से जुड़ना होगा। अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति करनी होगी। विकसित भारत बनाने के लिए अपने-अपने कार्य क्षेत्र के कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करना होगा। गुलामी के किसी भी अंग को स्वीकार नहीं करना होगा। हर भारतीय के मन में अभाव होना चाहिए कि अपना देश व धर्म सुरक्षित है। देश अच्छी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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