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ज्यादातर लोगों की ख्वाहिश- घर पर मिले कुछ वक्त अपने लिए

गोदरेज इंटेरियो की ‘होमस्केप्स’ स्टडी से हुआ खुलासा

मुंबई। आधुनिक भारत के तेज़-तर्रार और गतिशील परिदृश्य में, लोगों के अपने घरों तक पहुंचने के तरीके में एक उल्लेखनीय बदलाव आ रहा है, जैसा कि गोदरेज समूह की प्रमुख कंपनी गोदरेज एंड बॉयस के कारोबार गोदरेज इंटेरियो द्वारा किए गए ‘होमस्केप्स’ (Homescapes)अध्ययन में पता चला है। यह अध्ययन घर की सजावट के लिए उनकी प्राथमिकताओं में लोगों के व्यक्तित्व और मूल्यों की विशिष्ट अभिव्यक्ति पर प्रकाश डालता है, घरों और लोगों के विकास के बीच अंतर्निहित संबंध पर जोर देता है।

ज्यादातर लोगों की ख्वाहिश- घर पर मिले कुछ वक्त अपने लिए

रिपोर्ट के निष्कर्षों ने बदलते उपभोक्ता व्यवहार के दिलचस्प पहलुओं का खुलासा किया, पर्सनल स्पेस के महत्व और व्यक्तिगत विकास के साथ इसके संबंध पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे बढ़ती संख्या में भारतीय सक्रिय रूप से अपने घरों की सीमा के भीतर ‘मी-टाइम’ की तलाश कर रहे हैं। अपने काम और घर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे अधिकतर भारतीयों के लिए ‘पर्सनल-टाइम’ एक विलासिता बनता जा रहा है।

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‘होमस्केप्स’ अध्ययन के अनुसार, अधिक भारतीय अब ‘मी टाइम’ की तलाश में हैं, जहां वे घर पर अपने निजी स्थान पर आराम कर सकें। रिपोर्ट में इस तथ्य पर भी जोर दिया गया है कि पर्सनल स्पेस पहली चीज है जिसके बारे में बढ़ती संख्या में भारतीय अपना घर खरीदने की योजना बनाते समय सोचते हैं। मुंबई (37 प्रतिशत) और कोलकाता (31 प्रतिशत) दोनों में प्रत्येक तीन उत्तरदाताओं में से एक और बेंगलुरु (27 प्रतिशत) में एक चौथाई से अधिक उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि अपने पहले घर की कल्पना करते समय उनका ध्यान इस बात पर जाता है कि इस घर में वो पर्सनल स्पेस है या नहीं, जहां वे कुछ पल सुकून के साथ बिता सकें।

ज्यादातर लोगों की ख्वाहिश- घर पर मिले कुछ वक्त अपने लिए

इस प्रवृत्ति पर टिप्पणी करते हुए गोदरेज इंटरियो (Godrej Interio) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हैड स्वप्निल नागरकर ने कहा, हमारी ‘होमस्केप्स’ स्टडी लोगों, उनके परिवारों और उनके घरों के बीच गहरे भावनात्मक बंधन को रेखांकित करती है। हमारा अध्ययन उनके अस्तित्व के एक महत्वपूर्ण पहलू के बारे में उपभोक्ताओं की भावनाओं का पता लगाता है-उनका घर दरअसल उनके जीवन के प्रतिबिंब के रूप में नजर आना चाहिए। सर्वेक्षण से जुड़ा डेटा लोगों की कार्यक्षमता और उनके सौंदर्यबोध दोनों को प्राथमिकता देने की दिशा में आए बदलाव पर रोशनी डालता है।

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लोग यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि घर न केवल कुशल और सुव्यवस्थित हो, बल्कि आकर्षक और सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया गया हो। गोदरेज इंटेरियो में, हम ऐसा फर्नीचर बनाने में गर्व महसूस करते हैं जो विजुअल अपील से भी आगे जाते हुए आधुनिक भारतीय जीवनशैली के पूरक सुविधाओं की पेशकश करता है। हमारा फर्नीचर किसी के घर और जीवनशैली का एक जरूरी हिस्सा बन जाता है, जो शैली और व्यावहारिकता दोनों का प्रतीक है।

इसके अलावा, अध्ययन से पता चलता है कि कोलकाता, बेंगलुरु और मुंबई टॉप थ्री ऐसे शहर हैं जहां के लोग बाहरी दुनिया की हलचल से बचते हुए अपने घरों में सुकून की तलाश कर रहे हैं। लगभग 33 प्रतिशत उत्तरदाताओं का दावा है कि उनका घर आराम करने, कुछ वक्त अपने साथ बिताने के लिए, सोने, ध्यान करने, खुद पर ध्यान देने और अपनी बालकनी या गार्डन में समय बिताने आदि के लिए सबसे सुरक्षित जगह है, आधे से अधिक उत्तरदाताओं के साथ कोलकाता में 56 प्रतिशत, बेंगलुरू में 40 फीसदी उत्तरदाता और 39 फीसदी मुंबईकर यह दावा कर रहे हैं।

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अध्ययन में आगे कहा गया है कि 44 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने पिछले दो से तीन वर्षों में घर में बालकनी गार्डन या मिनी-गार्डन जोड़ा है। लगभग आधे उत्तरदाताओं – 46 प्रतिशत का दावा है कि उन्होंने घर पर एक नया वर्कआउट या योग दिनचर्या शुरू कर दी है।

इसके अतिरिक्त, 56 फीसदी प्रतिभागियों ने अपनी पसंदीदा कुर्सी पर, आँगन में या लिविंग रूम में सुबह की चाय या कॉफी का आनंद लेने की परंपरा को पुनर्जीवित करने की इच्छा व्यक्त की। यह सर्वेक्षण बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और लखनऊ सहित 7 शहरों में रहने वाले 2822 भारतीयों के साथ किया गया था।

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