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साल में एक बार जरूर खाएं फाइलेरिया से बचाव की दवा – जिला मलेरिया अधिकारी

● फाइलेरिया ग्रसित मरीजों और स्वयं सहायता समूह को दिया प्रशिक्षण

कानपुर। फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला संक्रामक रोग है। इसे हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। मच्छर जब किसी फाइलेरिया के मरीज को काटकर किसी दूसरे व्यक्ति को काट ले तो दूसरा व्यक्ति भी फाइलेरिया की जद में आ सकता है। इसलिये फाइलेरिया से बचाव के लिए हर साल एक बार दवा का सेवन जरूर करना चाहिए। इस प्रक्रिया का पांच साल तक पालन करना है। दो साल से कम आयु के बच्चों, गर्भवती व गंभीर मरीज को छोड़कर अन्य लोग दवा को खा सकते हैं। यह बातें फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत गुरुवार को ग्राम बिनौर, कल्याणपुर में मोर्बिडिटी मैनजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेन्शन (एमएमडीपी )प्रशिक्षण के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) एके सिंह ने कहीं।

सेण्टर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में बिनौर ग्राम के फाइलेरिया ग्रसित मरीजों सहित माता सागर देवी समूह के सदस्यों व आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया ! लखनऊ से आये प्रशिक्षक सीफार के स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ सतीश पाण्डेय ने सभी की काउंसिलिंग की।

डॉ पाण्डेय ने फाइलेरिया को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर किया और झाड़-फूंक से बचते हुए उपचार कराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया ग्रसित मरीज साल में चार बार 12-12 दिन का दवा का कोर्स करे तो फाइलेरिया के संक्रमण को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव भी कहा जाता है। फाइलेरिया संक्रमण के लक्षण कई सालों तक नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

डीएमओ ने कहा कि फाइलेरिया को हाथी पांव भी कहा जाता है। यह क्यूलेक्स मच्छर काटने की वजह से होता है। यह मनुष्य के रक्त में रात के समय सक्रिय होता है। इस कारण स्वास्थ्य विभाग की टीम रात में ही पीड़ित का ब्लड सैंपल लेती हैं। उन्होंने समूह के सदस्यों को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में आईडीए और एमडीए के महत्व के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने समूह के सदस्यों को बताया कि मरीजों को शरीर के अंगों की सामान्य पानी व साबुन से नियमित साफ-सफाई करनी चाहिए। इसके साथ ही चिकित्सक द्वारा बताए गए व्यायाम को करने से सूजन नहीं बढ़ती।

नियमित व्यायाम करने से सामान्य जीवन व्यतीत करने में सहायता मिलती है। इसके साथ ही डॉ पाण्डेय ने पैर धुल कर पैर साफ सुथरा रखने का तरीका बताया। इसके साथ ही समूह को व्यायाम करके दिखाया और समूह के सदस्यों ने भी उस प्रक्रिया को दोहराया।

फाइलेरिया से बचाव

• फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें।
• पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें।
• सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें।
• हाथ या पैर में कहीं चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें।

रिपोर्ट-शिव प्रताप सिंह सेंगर

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