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आपदा में अवसर: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 9 करोड़ का घोटाला

दया शंकर चौधरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 9 करोड़ का घोटाला सामने आया है। इसके तहत बिना छात्राओं की उपस्थिति के ही 9 करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये। प्रदेश के 18 जिलों में ये घोटाला सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक, कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते  कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राएं आई नहीं और इस दौरान अफसरों ने 9 करोड़ रुपये खातों से निकाल लिये। ये रकम छात्राओं के भोजन, दवाओं और स्टेशनरी के नाम पर निकाली गई। डीजी स्कूल एजुकेशन व राज्य परियोजना निदेशक ने इस पूरे प्रकरण पर 18 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों से जवाब तलब किया है। सूत्रों का कहना है कि, 11 फरवरी से 31 मार्च के बीच 9 करोड़ रुपये निकाले गये। सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के बरेली, बिजनौर, देवरिया, फतेहपुर, गाज़ियाबाद, गोंडा, कासगंज, मऊ, मेरठ, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, रायबरेली, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, सोनभद्र, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी में ये खेल हुआ है। प्रदेश के डीजी स्कूल एजुकेशन ने 15 जून तक रिकॉर्ड तलब किया है। यही नहीं, डीजी स्कूल एजुकेशन ने सख्त रुख अपनाते हुये कहा है कि कहीं भी गड़बड़ी मिली तो सख्त कार्रवाई होगी।

यह मामला तब खुला जब सुलतानपुर जनपद के 12 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के 53 लाख रुपये खर्च कर दिए गए। महकमे ने 22 लाख रुपये तो भोजन मद में ही भुगतान कर दिया है। इस मामले का जब से खुलासा हुआ है तब से अफसर बचते नजर आ रहे हैं, जबकि विभागीय सूत्रों का दावा है कि बिस्तर, स्टेशनरी व बैग, ड्रेस आदि की आपूर्ति तो हुई लेकिन खाद्यान्न एक तोला विद्यालय में नहीं पहुंचाया गया। आपको बता दें कि कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कोरोना काल में संक्रमण की वजह से बंद चल रहे हैं। इसमें पढ़ने वाली छात्राओं को घर भेज दिया गया है।

सुलतानपुर में 12 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं। दस में 100- 100 व दो में 50-50 छात्राएं अध्ययनरत हैं। संक्रमण बढ़ा तो शासन ने सभी विद्यालय बंद कर दिए। केजीबीवी में पढ़ने वाली छात्राओं को घर भेजने के निर्देश दिए गए थे। यही वजह है कि मार्च महीने तक कोई भी छात्रा स्कूल नहीं गई। बस वार्डन व कार्यालय प्रभारी ही हर हफ्ते ड्यूटी बजाने जाते हैं। बताया जाता है कि महकमे के लेखाधिकारी आरएस यादव ने सभी खरीदारी व भुगतान को स्वीकार किया कि 1100 छात्राओं के लिए राशन खरीदा गया और भोजन के मद में 22 लाख का भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं स्टेशनरी के लिए 12 लाख रुपये व गद्दा, चद्दर, रजाई व तकिया, कंबल के लिए आठ लाख रुपये का भी भुगतान किया गया है।

ड्रेस, जूता, बैग, ट्रैकसूट जैसी कंटीजेंसी वाली वस्तुओं के लिए भी 11 लाख रुपये आपूर्तिकर्ता फर्म को दे दिया गया। सूत्रों के अनुसार बिस्तर, बैग, जूता व स्टेशनरी आदि तो विद्यालयों में फर्मों द्वारा सीधे पहुंचाए गए, जिन्हें छात्राओं को समय-समय पर बुलाकर दे दिया गया है या विद्यालय में सुरक्षित रखा गया है। उनका यह भी दावा हैं कि भोजन के लिए कोई भी सामान विद्यालय में पहुंचाया नहीं गया। हालांकि शासन में शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए गए हैं और बीएसए से पूरी रिपोर्ट तलब की गई है।

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