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संसद सत्र से ठीक एक दिन पहले पेगासस रिपोर्ट आना सोची समझी रणनीति का हिस्सा : सरकार

नई दिल्ली। स्पाईवेयर पेगासस के जरिए जासूसी का मुद्दा संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन दोनों सदनों में गूंजा और इस पर खूब हंगामा हुआ। सरकार की तरफ से इस मामले पर बोलते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा कि संसद के मानसून सत्र से पहले जासूसी से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास है और संसद के सत्र से ठीक एक दिन पहले ये रिपोर्ट आना कोई संयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि जब नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है।

उधर कांग्रेस ने इस पूरे मामले में जांच कराए जाने की मांग की है। कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि इजरायली स्पाइवेयर पेगासस का उपयोग करके कई प्रमुख व्यक्तियों एवं पत्रकारों का कथित पर फोन टैप किए जाने के मामले में स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर इस मामले को लेकर कटाक्ष भी किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘हम जानते हैं कि वह आपके फोन में सब कुछ पढ़ रहे हैं।”

वैष्णव ने कहा, ‘बीती रात एक वेब पोर्टल द्वारा एक बेहद संवेदनशील स्टोरी पब्लिश की गई। इस स्टोरी के आधार पर कई बड़े आरोप लगाए गए। यह रिपोर्ट संसद के मानसून सत्र से ठीक एक दिन पहले आई। यह कोई संयोग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘पहले भी पेगासस के जरिए व्हाट्सऐप की निगरानी के ऐसे ही दावे किए गए थे। उन रिपोर्टों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और सभी पक्षों द्वारा इसे नकार दिया गया था।

पेगासस कैसे यूजर्स का फोन हैक करता है

पेगासस को इजराइल स्थित साइबर इंटेलिजेंस और सुरक्षा फर्म एनएसओ ग्रुप द्वारा विकसित किया गया था। यह एप्पल के मोबाइल फोन ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस और एंड्रॉयड डिवाइस में घुस सकता है। पेगासस का इस्तेमाल सरकारों द्वारा लाइसेंस के आधार पर किया जाना था। मई 2019 में, इसके डेवलपर ने सरकारी खुफिया एजेंसियों और अन्य के लिए पेगासस की बिक्री सीमित कर दी। यह स्पाइवेयर किसी हानिकारक लिंक या मिस्ड व्हाट्सएप्प वीडियो कॉल से एंट्री करता है। फिर यह फ़ोन के बैकग्राउंड में चुपचाप सक्रिय हो जाता है। इस तरह इस स्पाईवेयर की फोन के कॉन्टैक्ट, मैसेज और बाकी डेटा तक पूरी पहुंच हो जाती है। यह सॉफ्टवेयर यूजर के फोन का माइक्रोफ़ोन और कैमरा भी खुद से ऑन कर सकता है। यूजर के फोन में चुपचाप घुसने के बाद यह स्पाईवेयर पूरा डेटा और खुफिया जानकारियां उड़ा लेता है।

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