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सैम्पल ट्रांसपोर्टर से टीबी की जाँच में आयेगी तेज़ी

• हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से जाँच केंद्र तक सैम्पल पहुंचाने का करेंगे काम

• एक सैम्पल ट्रांसपोर्टर के जिम्मे होंगे चार से सात हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर

कानपुर नगर। वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के सपने को साकार करने के लिये सरकार की तरफ से एक नई पहल की गयी है। इसके तहत आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से निकटतम परीक्षण केंद्र तक सैम्पल पहुंचाने के लिए सैम्पल ट्रांसपोर्टर की मानदेय के आधार पर तैनाती की जाएगी। इससे बलगम कलेक्शन के बाद जाँच रिपोर्ट जल्दी से जल्दी आने की राह आसान बन सकेगी। इसी क्रम में बुधवार को एनटीईपी के ब्लॉक कर्मचारियों को जिला क्षयरोग केंद्र में जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना द्वारा प्रशिक्षित किया गया।

जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ एपी मिश्रा का कहना है कि मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय द्वारा प्रेषित पत्रानुसार अब जनपद सहित प्रदेश को तय समय में टीबी मुक्त बनाने में यह पहल अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया की पत्र में लिखा है की अब घर के नजदीक ही संभावित टीबी मरीजों के बलगम कलेक्शन की व्यवस्था आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर की गयी है। इसलिए दो हफ्ते से अधिक समय से खांसी आने, बुखार बना रहने, वजन गिरने, खांसते समय खून आने जैसी समस्या हो तो तत्काल नजदीकी सेंटर पर सम्पर्क करें, क्योंकि यह टीबी के लक्षण हो सकते हैं।

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डॉ मिश्रा ने बताया की सैम्पल को जल्द से जल्द निकटतम परीक्षण केंद्र तक पहुंचाने की भी व्यवस्था अब कर दी गयी है। इसके लिए रूट चार्ट और माइक्रो प्लान तैयार किया जायेगा। इसके तहत एक सैम्पल ट्रांसपोर्टर को चार से सात हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से सैम्पल ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेदारी दी जायेगी ताकि सैम्पल उसी दिन जाँच केंद्र तक पहुँचाया जा सके और रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि होने के बाद जल्दी से जल्दी उनका इलाज शुरू किया जा सके।

जिला कार्यक्रम समन्वयक राजीव सक्सेना ने बताया कि जनपद के करीब 256 एक्टिव हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के लिए 40 – 50 सैम्पल ट्रांसपोर्टर को मानदेय के आधार रखे जाने की योजना है। इसके लिए सेंटर पर तैनात कम्युनिटी हेल्थ आफीसर आशा और एएनएम को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। सैम्पल पैकिंग जाँच केंद्र भेजने और रिपोर्ट को निक्षय पोर्टल पर समय से अपडेट करने की जिम्मेदारी सीएचओ की होगी जिसके लिये उन्हें प्रशिक्षित किया जा चुका है।

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उन्होंने बताया कि सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत करते हुए उनकी आईडी बना दी गयी है। सीएचओ किसी भी तरह की समस्या आने पर सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर व अन्य द्वारा मदद प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही बताया क्षय रोगियों को इलाज के दौरान हर माह 500 रुपए पोषण भत्ता भी मिलता है।

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