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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में दिख रही हैं अध्यात्म और प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाएँ

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का व्यस्त कार्यक्रम था। यहां भी उनकी चिरपरिचित कर्मयोगी की कार्यशैली दिखाई दी। वह सन्यासी हैं। करीब तीन दशक बाद अपने पूर्व आश्रम की माँ से मिलने गए। किंतु यात्रा अधिकांश हिस्सा समाज के हित में समर्पित रहा। उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के बीच सम्पत्तियों से संबंधित अनेक समस्याएं करीब तीन दशक से लंबित थी। सपा बसपा जैसे क्षेत्रीय दलों की सरकारें इस समस्या से बेपरवाह रहीं।

भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है। इसके साथ ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर पर उसका विश्वास है। इस दृष्टि से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को अलग करके नहीं देखा जा सकता। भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा बहुत व्यापक है। योगी आदित्यनाथ ने अपनी उत्तराखंड यात्रा के दौरान इस तथ्य को प्रमाणित किया। हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, काशी, मथुरा, अयोध्या में होने वाले विकास कार्य किसी एक प्रदेश की सीमा तक ही महत्वपूर्ण नहीं होते। इनका तो देश ही नहीं विदेश तक महत्व होता है। इस क्रम में योगी आदित्यनाथ हरिद्वार में भागीरथी पर्यटक आवास गृह का लोकार्पण किया। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अलकनन्दा पर्यटक आवास गृह की चाबी सौंपी।

भागीरथी पर्यटक आवास गृह का निर्माण उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग द्वारा कराया गया है। छह तल में निर्मित इस पर्यटक आवास गृह में सौ कक्ष व हॉल आदि हैं। उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड करीब तीन दशक से लंबित विवादों विवादों का संवाद के माध्यम से समाधान कर लिया है। दोनों राज्य आपसी सहयोग को आगे बढ़ा रहे है। योगी ने कहा कि देश के तीर्थस्थल हमारी आस्था के केंद्र मात्र नहीं है। यह राष्ट्रीय एकात्मता को सुदृढ़ बनाने वाले सूत्र भी है। तीर्थस्थलों से ही राष्ट्रीय एकाता को ऊर्जा मिलती है। भागीरथी व अलकनन्दा के मिलने से गंगा बनती है। गंगा जी भारत की जीवनधारा हैं।

उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड में आध्यात्मिक पर्यटन एवं प्राकृतिक पर्यटन की अपार सम्भावनाएं हैं। उत्तर प्रदेश में भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो चुका है। केदारनाथ धाम भव्य रूप में निर्मित किया गया है। अयोध्या में श्री।राम मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। इधर बद्रीनाथ धाम में पुनरुद्धार के कार्य प्रगति पर हैं। मथुरा विंध्याचल।हरिद्वार,ऋषिकेश में विभिन्न विकास कार्य क्रियान्वित हो रहे है।

प्रयागराज कुम्भ के दिव्य एवं भव्य स्वरूप को पूरी दुनिया ने देखा। अनेक विश्वस्तरीय कीर्तिमान कायम हुए। वृन्दावन में वैष्णव कुम्भ का भव्य आयोजन किया गया।श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के दूसरे चरण का कार्य इस माह के अन्त तक पूरा हो जाएगा। अब यहां एक साथ पचास हजार श्रद्धालु दर्शन पूजन कर सकते हैं। अयोध्या पूरी दुनिया में सबसे सुन्दर एवं आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है। प्रदेश के अन्य पवित्र तीर्थस्थलोंगोकुल, बरसाना,शुकतीर्थ, नैमिषारण्य,चित्रकूट, विंध्यवासिनी धाम, महर्षि वाल्मीकि की स्थली लालापुर, तुलसीदास जी की स्थली राजापुर में विभिन्न पर्यटन विकास के कार्य किये जा रहे हैं। साथ ही, बौद्ध, जैन एवं सिख तीर्थस्थलों के विकास के लिए भी कार्य प्रगति पर हैं।

राज्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न पवित्र स्थलों पर आयोजित होने वाले आयोजनों को एक इवेंट के रूप में यादगार बनाने के कार्य किये हैं। अयोध्या का दीपोत्सव,बरसाना का होली उत्सव,काशी की देव दीपावली एवं मथुरा का कृष्ण जन्मोत्सव का कार्यक्रम देश और दुनिया में प्रदेश की विशिष्ट पहचान को निर्मित कर रहा है। देश के भौतिक विकास के साथ ही आध्यात्मिक विकास की यात्रा भी प्रारम्भ हुई है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी इस यात्रा के ध्वजवाहक हैं। धर्म एवं संस्कृति का उत्थान हो रहा है तथा प्रदेश का समग्र विकास हो रहा है।

भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का सपना अवश्य साकार होगा। भाजपा सरकारों ने पर्यटन विकास के अनुकूल वातावरण निर्मित किया है। पवित्र तीर्थाें को सर्किट के रूप में विकसित हो रहे है। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड मिलकर नॉर्दर्न टूरिज्म को बढ़ाएंगे। जिसके अन्तर्गत रामायण सर्किट एवं महाभारत सर्किट प्रमुख होंगे। उत्तराखण्ड सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर संसार की सबसे पुरानी पदयात्रा को जीवन्त रखने हेतु महाभारत रेल शुरू करेगी। गुरु गोरखनाथ के सम्मान में उत्तराखण्ड सरकार शीघ्र ही गुरु गोरखनाथ से जुड़े स्मृति स्थलों गुफाओं एवं पीठों को जोड़ने हेतु नाथ सर्किट का निर्माण करेगी।

वर्तमान सरकारें पर्यटन व तीर्थ स्थलों का विकास एक वैचारिक आधार कर रही है। योगी आदित्यनाथ ने कहा भी था कि पिछली सरकारें इन स्थलों का नाम लेने से डरती थी। अब इनका विकास हो रहा है। काशी को विश्वस्तरीय तीर्थाटन स्थल के रूप में प्रतिष्ठित करने का विचार और विजन पहले नहीं था। नरेंद्र मोदी ने काशी को क्वेटो की तरह सुविधा संपन्न बनाने का संकल्प लिया था। इसके पीछे काशी को पौराणिक महिमा के अनुरूप विकसित करने का ही विचार था। दुनिया की सर्वाधिक प्राचीन इस नगरी के प्रति देश-विदेश के असंख्य लोगों की आस्था है। करीब ढाई शताब्दी के बाद आस्था के प्रमुख केंद्र श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है।

इसके पहले मंदिर के जीर्णोद्धार हेतु महारानी अहिल्या बाई, महाराणा रणजीत सिंह ने अपने।अपने समय में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। तीर्थाटन की दृष्टि से उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश का विशेष महत्व रहा है। यहां के अनेक स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रहे हैं। लेकिन विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं की ओर पहले अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। वर्तमान सरकारें इस कमी को दूर कर रहे हैं। गत वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या विकास प्राधिकरण की तरफ से मास्टर प्लान में शामिल बीस हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की समीक्षा की थी। मास्टर प्लान में सभी विकास परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इसमें पुरातत्व महत्व के मंदिरों और परिसरों का जीर्णोद्धार व सुंदरीकरण शामिल है।

बीस हजार करोड़ रुपए के इन प्रोजेक्ट में क्रूज पर्यटन परियोजना, रामकी पैड़ी पुनर्जनन परियोजना,रामायण आध्यात्मिक वन, सरयू नदी आइकॉनिक ब्रिज, प्रतिष्ठित संरचना का विकास पर्यटन सर्किट का विकास,ब्रांडिंग अयोध्या, चौरासी कोसी परिक्रमा के भीतर दो सौ आठ विरासत परिसरों का जीर्णोद्धार,सरयू उत्तर किनारे का विकास आदि शामिल हैं। इसके साथ ही अयोध्या को आधुनिक स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जा रहा है। सरकार ने सैकड़ों पर्यटकों के सुझाव के बाद एक विजन डॉक्यूमेंट भी तैयार किया है। अयोध्या के विकास की परिकल्पना एक आध्यात्मिक केंद्र, वैश्विक पर्यटन हब और एक स्थायी स्मार्ट सिटी के रूप में की जा रही है।

कनेक्टिविटी में सुधार के प्रयास जारी है। इनमें एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन के विस्तार,बस स्टेशन, सड़कों और राजमार्गों व ढांचा परियोजनाओं का निर्माण शामिल है। ग्रीनफील्ड टाउनशिप भी प्रस्तावित है।।योगी आदित्यनाथ का दावा है कि अयोध्या आने वाले समय में वैश्विक मानचित्र में एक नया स्थान बनाने जा रहा है।

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