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गर्भावस्था में होता है ‘जेस्टेशनल डायबिटीज’ का खतरा

• गर्भवती में लक्षण दिखते ही करायें उपचार
• अनदेखी से गर्भवती व गर्भस्थ को भी हो सकता है नुकसान

वाराणसी। गर्भावस्था के सातवें महीने में सेनपुरा की रहने वाली शालिनी को घरेलू कामकाज के दौरान चक्कर आया। उसने अपने आप को संभालने का बहुत प्रयास किया पर बिस्तर पर गिर कर वह बेहोश हो गयी। हालांकि कुछ पल बाद ही उसे होश आ गया पर उसकी यह हालत देख परिवार के लोग घबरा गये। डाक्टर को दिखाया और जांच कराया तो पचा चला कि वह गर्भावस्था के दौरान होने वाले जेस्टेशनल डायबिटीज (गर्भावस्था के दौरान होने वाले शुगर की बीमारी ) से अब पीड़ित हो चुकी है।

गर्भावस्था में होता है ‘जेस्टेशनल डायबिटीज’ का खतरा- डॉ आरती दिव्या

वहीं रमाकांत नगर कालोनी की रहने वाली रागिनी पहली बार मां बनने वाली है। गर्भावस्था के छठे माह में उसे अत्यधिक प्यास लगने और बार-बार पेशाब होने की शिकायत हुई। शुरू में रागिनी से इसे सामान्य रूप में लिया पर इस समस्या के कारण जब उसे पूरी रात जगना पड़ने लगा तो वह चिकित्सक के पास पहुंची। उसका हाल जानने के बाद जब चिकित्सक ने उसके खून की जांच करायी तो पता चला कि उसे भी जेस्टेशनल डायबिटीज हो चुका है।

गर्भावस्था में होता है ‘जेस्टेशनल डायबिटीज’ का खतरा-डॉ आरती

रागिनी और शालिनी ने गर्भ ठहरने के पहले माह में अपने खून की जांच करायी थी तब उनकी रिपोर्टं ठीक आई थी। हालांकि रिपोर्ट में शुगर होने का जिक्र नहीं था लेकिन शुगर ने उन्हें कब जकड़ लिया पता ही नहीं चला। पंडित दीनदयाल चिकित्सालय स्थित एमसीएच विंग की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ आरती दिव्या बताती हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई हार्मोनल असंतुलन के दौर से गुजरना पड़ता है।

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ऐसे ही हार्मोनल असंतुलन से ही कुछ ऐसी गर्भवतियों में ब्लड शुगर काफी बढ़ जाता है, जिन्हें गर्भधारण करने से पहले शुगर नहीं होती है। गर्भधारण के बाद होने वाली शुगर को ही गर्भकालीन मधुमेह या जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है। अधिकांश को गर्भावस्था के 24-28 सप्ताह के बीच चलता है। आजकल ओपीडी में हर माह दो-तीन जेस्टेशनल डायबिटीज के मामले आते हैं।

गर्भावस्था में होता है ‘जेस्टेशनल डायबिटीज’ का खतरा

गर्भावस्था में डायबिटीज के खतरे- गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का होना मां और शिशु दोनों के लिए खतरनाक होता है। इसके कारण बच्चे में जन्मगत विकार की आशंका अधिक रहती है। साथ ही प्रसव के समय मां के साथ-साथ शिशु के जान को भी खतरा रहता है। गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर अधिक बढ़ा होने पर गर्भवती को हाई ब्लड प्रेशर का भी खतरा हो सकता है। इतना ही नहीं गर्भपात अथवा समय से पूर्व प्रसव की भी आशंका बढ़ जाती है।

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डॉ आरती बताती हैं कि आमतौर पर जेस्टेशनल डायबिटीज गर्भावस्था के बाद अपने आप ठीक हो जाती है लेकिन कुछ मामलों में गर्भवती को प्रसव के बाद आगे चलकर डायबिटीज होने का खतरा बन जा जाता है। इतना ही नहीं समय से उपचार न होने पर यह बीमारी होने वाले शिशु के लिए भी खतरनाक हो सकती है उसे भी भविष्य में डायबिटीज होने की आशंका रहती है।

गर्भावस्था में डायबिटीज के लक्षण- डॉ आरती बताती है कि वैसे तो सभी महिलाओं में गर्भकालीन मधुमेह के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन लक्षण ऐसे जरूर होते हैं जिनके दिखते ही उन्हें इस दिशा में सतर्क हो जाना चाहिए। किसी गर्भवती को बार-बार पेशाब आना,अत्यधिक प्यास लगना, थकान, जी मिचलाना, धुंधला दिखना, मूत्राशय और त्वचा का संक्रमण जैसी परेशानियां जेस्टेशनल डायबिटीज के लक्षण हो सकते है। लिहाजा ऐसे लक्षण नजर आते ही गर्भवती को तत्काल किसी चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए, ताकि समय रहते उपचार से इस बीमारी के बड़े खतरे से बचा जा सकता है।

गर्भावस्था में होता है ‘जेस्टेशनल डायबिटीज’ का खतरा

उपलब्ध है जांच की सुविधा- डॉ आरती के अनुसार पं.दीनदयाल उपाध्याय चिकित्सालय स्थित एमसीएच विंग के अलावा जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जेस्टेशनल डायबिटीज से सम्बन्धित जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा प्रत्येक माह की एक, नौ 16 व 24 तारीख को स्वास्थ्य केन्द्रों पर आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस पर भी मिलने वाली सुविधाओं का लाभ गर्भवती ले सकती हैं।

रिपोर्ट-संजय गुप्ता 

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