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केजरीवाल का मामला इतना बड़ा इश्यू नहीं, जितना बन गया!

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को सीएम अरविंद केजरीवाल की एक अर्जी पर अपना आदेश सोमवार तक के लिए सुरक्षित रखा। केजरीवाल ने अपनी अर्जी में कहा था कि उन्हें रोज़ इन्सूलिन दिया जाय और प्रतिदिन अपने डॉक्टर से 15 मिनट के लिए वीडियो कान्फ्रेंसिंग करने दिया जाय, जिसमें उनकी पत्नी भी मौजूद रहें।

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केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल मेडिकल ज़मानत या अस्पताल में इलाज की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल 15 मिनट डॉक्टर से वीडियो कान्फ्रेंसिंग करने की गुहार लगा रहे हैं। कोर्ट में तिहाड़ जेल के वकील ने एक रिपोर्ट पेश की जिसमें कहा गया कि केजरीवाल का ब्लड शुगर लेवल सामान्य है लेकिन घर से जो भोजन आ रहा है, वह डॉक्टर की सलाह के मुताबिक नहीं आ रहा। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल की सेहत की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड भी गठित किया जा सकता है।

कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वकील ने कहा कि केजरीवाल को जो भोजन उनके घर से भेजा गया है, वह डॉक्टरों द्वारा निर्धारित भोजन से मेल नहीं खाता। जेल के वकील ने कहा कि केजरीवाल को सबसे पहले जब जेल लाया गया था, तब उन्होने कहा था कि वो पहले इंसूलिन ले रहे थे, लेकिन बाद में खुद बंद कर दिया।

केजरीवाल का मामला इतना बड़ा इश्यू नहीं, जितना बन गया!

दरअसल, ED ने गुरुवार को एक चौंकाने वाला खुलासा किया था और कोर्ट को बताया था कि केजरीवाल जानबूझ कर अपनी सेहत खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, केजरीवाल डायबिटीक हैं, शुगर के मरीज हैं, परन्तु वो जेल में आम, मिठाइयां और आलू-पूडी-सब्ज़ी खा रहे हैं। ED का आरोप था कि केजरीवाल जान-बूझकर ऐसा कर रहे हैं क्योंकि वो चाहते हैं कि उनका शुगर लेवल बिगड़ जाए और फिर वो अपनी सेहत को ज़मानत मांगने का आधार बना सकें।

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आम आदमी पार्टी सरकार की मंत्री आतिशी ने आरोप लगाया कि जेल में केजरीवाल को बीमार बनाने की एक साजिश चल रही है और ये कोशिश हो रही है कि उन्हें घर से मिल रहा खाना बंद हो। पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी साज़िश का आरोप लगाया। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल ने जेल से बाहर आने के लिए ये नया ड्रामा तैयार किया है, घर के खाने के नाम पर वो ऐसी चीज़ें खा रहे हैं जिससे उनकी तबीयत बिगड़ जाए और बाहर आने का बहाना मिल जाए। कौन क्या खाना खा रहा है, कितना खा रहा है, ये किसी भी व्यक्ति का ज़ाती मामला है, इसे लेकर सार्वजनिक रूप से बहस करना मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता, लेकिन क्या करें? ये मामला इतना बड़ा इश्यू बन गया, केजरीवाल की डाइट की डिटेल्स कोर्ट में आ गई, पब्लिक डोमेन में आ गई, इसीलिए एक-एक बात आपके साथ शेयर करनी पड़ी। केजरीवाल पढ़े लिखे जानकार व्यक्ति हैं, उन्हें 22 साल से डायबिटीज है, इसलिए क्या खाना है, क्या नहीं, ये वो खुद बहुत अच्छी तरह जानते हैं। इसलिए इस बात पर तो यकीन नहीं किया जा सकता कि केजरीवाल को घर से जो खाना भेजा जा रहा है, वो उनकी सेहत खराब करने के लिए है। लेकिन दूसरी तरफ जो तथ्य ED ने कोर्ट के सामने रखे, उन्हें देखने के बाद तो कोई भी सोचेगा कि डायबिटीज़ का मरीज़ अगर आम, मिठाइयां खा रहा है, तो ये नॉर्मल नहीं है। जहां तक आतिशी के तर्कों का सवाल है, तो आतिशी का ये कहना कि केजरीवाल ने जो मिठाइयां खाईं वो शुगर फ्री थीं, ये मान भी लिया जाए तो ये कैसे माना जा सकता है कि आम शुगर फ्री होता है। और दुख की बात ये है कि आतिशी ने इसे सियासत से जोड़ दिया। कहा कि पूड़ी सब्जी तो नवरात्र का प्रसाद था।

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क्या केजरीवाल को बीजेपी के लोग धर्म के रास्ते पर चलने से भी रोकेंगे? केजरीवाल को जेल में मारने की साजिश हो रही है। इन सब बातों से केजरीवाल का केस कमजोर होता है और बीजेपी को भी बयानबाजी करने का मौका मिलता है। ये मसला राजनीति का नहीं, केजरीवाल की सेहत का है और स्वास्थ्य सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर केजरीवाल को डॉक्टर्स की सलाह की जरूरत है तो वो उन्हें मिलनी चाहिए, लेकिन इस सवाल का जवाब भी मिलना चाहिए कि केजरीवाल ने जो खाना खाया, क्या वो डॉक्टर्स की सलाह के मुताबिक था या उन्हें जो खाना दिया गया, उसकी वजह से शुगर लेवल बढ़ा।(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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