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Summer : अस्पताल का बुरा हाल, जनता बदहाल

इलाहाबाद। मई के महीने में Summer की उमस और बढ़ती तपिश से मौसम का कहर बच्चो पर आफत बनकर टूट रहा है। ऐसे में इलाहाबाद के सरकारी अस्पताल की बात करें तो इमरजेंसी वार्ड में यह हालत है कि एक-एक बेड पर तीन-तीन बच्चे इलाज के लिए दाखिल कराये गए हैं। बच्चो के हवा के लिए एसी और पंखे लगे है लेकिन सभी बंद पड़े है, गर्मी से बेहाल बच्चो के साथ आये परिवार अपने बच्चो को गर्मी से निजात दिलाने के लिए बॉस के बने पंखे का सहारा लेना पड़ रहा है। जगह की कमी से जूझ रहे इन सरकारी अस्पतालों में अस्पताल का नर्सिंग स्टाफ की हालत यह की अस्पताल में इलाज के लिए आधा स्टाफ तक उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते अस्पताल में मरीज के साथ उनके परिजन भी बेहद परेशान हैं।

इलाहाबाद का सरोजिनी नायडू चिल्ड्रेन अस्पताल इस summer में..

100 बेड वाले इस सरकारी अस्पताल में इन दिनों बच्चो को इतने बेदर्दी से रख के इलाज किया जा रहा है की सुन के आप के रोंगटे खड़े हो जायेंगे। हालत यह है कि एक बेड पर दो से तीन बच्चे तक लिटाये जा रहे और पंखे लगे है लेकिन सभी बंद पड़े है। गर्मी से बेहाल बच्चे अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे है, इससे परिजन भी काफी परेशान है।

परिजन – 

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इमरजेंसी वार्ड का भी बुरा हाल

इस सरकारी अस्पताल में एक तरफ जहां इमरजेंसी वार्ड में एक की जगह चार-चार बच्चे बेड पर पड़े है तो वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के सबसे संवेदनशील वार्ड ICU का भी हाल अच्छा नहीं है। यहाँ के गहन चिकित्सा कक्ष के इन्क्युबरेटर में एक-एक सेल में तीन-तीन बच्चे रखे गए है। जगह और वार्ड की कमी से जूझ रहे इस अस्पताल में समस्याए यही ख़त्म नहीं हो जाती। अस्पताल में बीमार बच्चो की देखरेख के लिए जितना नर्सिंग स्टाफ चाहिए उससे आधा भी स्टाफ यहाँ मौजूद नहीं है। नर्स और डॉक्टर इसकी वजह सरकारी नीतियों की खामियों में ढूंढ़ती हैं।

एक तरफ कुदरत आसमान से तपिश और उमस भरी गर्मी बरसा रही है तो वही दूसरी तरफ सरकारी बाल चिकित्सालयों में नर्सिंग स्टाफ और वार्ड की भारी कमी… ऐसे में बीमार बच्चे और उनके परिजन जाए तो जाए कहा इसका जवाब अस्पताल प्रशासन के पास नहीं है।

आलोक चतुर्वेदी
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