Girija Devi : ठुमरी की रानी के रोम रोम में संगीत

गिरिजा देवी Girija Devi बनारस के घराने से से थी और कहा जाता है की बनारस घराने के भीतर से संगीत को आप निकल ही नहीं सकते। गिरिजा देवी, बिस्मिल्लाह खां, किशन महाराज, छन्नू महाराज आदि ऐसे ही लोग हैं जिन्होंने बनारस में बेस संगीत को विश्व प्रसिद्द किया।

अनमोल, अद्भुत प्रतिभा की धनी थीं Girija Devi

ठुमरी का नाम लेते ही जो पहला चेहरा ज़हन में आता है ,वह है Girija Devi गिरिजा देवी।

  • गिरिजा देवी एक जमींदार परिवार से थीं।
  • परिवार के लोगों ने उनकी संगीत के प्रति रूचि को देखते हुए उन्हें संगीत सीखने का मौका दिया।
  • गिरिजा देवी के परिवार ने कभी भी उनपर कोई पाबंदियां नहीं लगाई।
  • 15 साल की उम्र में उनकी शादी बनारस में ही मधुसूदन जैन के साथ हो गई थी।
  • उन्होंने पहली परफॉर्मेंस आकाशवाणी इलाहाबाद के लिए 1949 में दी।
  • उन्होंने ठुमरी में अपनी पहचान बनाई और ठुमरी को अपनी पहचान दी, जिसे वो ठेठ बनारसी ठुमरी कहती थीं।
  • 1972 में पद्मश्री, 1989 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
  • उन्होंने पूरा बचपन लड़कों की तरह बिताया।

एक इंटरव्यू में गिरिजा देवी ने बताया था कि उन्हें सलवार कुर्ता के बारे में कुछ नहीं पता, क्योंकि कभी पहना ही नहीं।  पैंट-शर्ट से सीधे साड़ी में आ गईं।

1975 में पति की मौत के मौत के बाद कुछ समय वो संगीत से दूर रहीं  लेकिन उसके बाद तो संगीत ही उनके लिए सब कुछ हो गया।उन्होंने हमेशा माना कि तकनीक को जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करना ठुमरी की आत्मा को मार देता है। ठुमरी के लिए भावनाएं सबसे अहम हैं। वही भावनाएं गिरिजा देवी की गायकी में हमेशा दिखाई और सुनाई देती रही।

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