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डिप्रेशन जैसी गंभीर बीमारी के यह है लक्षण जिससे बचने के लिये बस करना होगा यह उपाय

आज हर पांच में से एक महिला  10 में से एक पुरुष डिप्रेशन ( Depression ) से पीड़ित है. बतौर डिप्रेशन रोगी पहचान होने से वे कतराते हैं. यही कारण है कि 90 फीसदी तक मरीज मनोचिकित्सक तक पहुंचते ही नहीं और बिना इलाज के ही ज़िंदगी गुजार देते हैं.

सबसे बड़ी समस्या
प्रतिस्पर्धा के इस दौर में खुद के लिए समय निकालना, दिनचर्या को सुचारू रखना और मनोरंजन के लिए जतन करना कुछ लोग ही कर पाते हैं. डिप्रेशन की गंभीरता को देखते हुए ये कोशिश महत्वपूर्ण हैं. दुनिया स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि साल 2020 तक डिप्रेशन (हृदय रोगों के बाद) दूसरी सबसे बड़ी समस्या हो सकती है.

मरीजों की बढ़ती संख्या के उपचार के दौरान रोग के कई नए प्रकार भी सामने आए हैं. जैसे कुछ लोगों में जहां किसी कठिनाई के लंबे समय तक बने रहने से अवसाद होता है. वहीं कुछ को मौसमी बदलाव, तेज आवाज, स्त्रियों में प्रसव के बाद डिप्रेशन आदि होता है.

क्या हैं लक्षण
– हर समय उदासी या खालीपन महसूस होना.
– रोजमर्रा की प्रत्येक गतिविधि में दिलचस्पी का अभाव.
– एकाग्रचित होने या किसी भी फैसला लेने में परेशानी.
– भूख कम लगना या अधिक लगना.
– कम या आवश्यकता से ज्यादा नींद.
– हर समय थकान, कमजोरी या निगेटिव महसूस करना.
– आत्मघाती विचार आना.
– शारीरिक गतिविधियां धीमी होना या बोलने की ख़्वाहिश न होना.
– बिना बात के गुस्सा आना या आकस्मित स्वभाव में बदलाव.

लाइलाज नहीं रोग
डिप्रेशन (अवसाद) एक गंभीर रोग है लेकिन लाइलाज नहीं. मनोचिकित्सक की सलाह से ‘एंटीडिप्रेसेंट’ दवाएं 6-12 माह लेने से डिप्रेशन को अच्छा कर सकते हैं. जिन्हें बार-बार डिप्रेशन होता है उन्हें विशेषज्ञ अधिक समय तक ये दवाएं लेने की सलाह देते हैं. साइको थैरेपी, बिहेवरल थैरेपी से भी उपचार होता है. वर्कआउट के रूप में एरोबिक अभ्यास करना संतुलित भोजन लेना लाभकारी है.

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