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भारतीयों के योगदान का सम्मान करता है न्यूजीलैंड

     वीरेंद्र बहादुर सिंह

न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 2,39,193 है। इसमें 1,17,348 लोग ऐसे हैं, जो भारत में पैदा हुए थे। न्यूजीलैंड की कुल जनसंख्या में 4.7 प्रतिशत भारतीय हैं। न्यूजीलैंड के मुख्य शहर ओकलैंड में ही भारतीय मूल के 1,54,824 लोग रहते हैं। वेलिंग्टन में 22,227 भारतीय रहते हैं। न्यूजीलैंड के अन्य शहरों और छोटे-छोटे गांवों में भी भारतीय देखने को मिल जाएंगे। व्यवसाय से ले कर मेडिकल और इंजीनियरिंग तक में भारतीयों का नाम है।

न्यूजीलैंड की गणना दुनिया के स्टूडेंट्स के लिए पढ़ने के लिए श्रेष्ठ जगह मानी जाती है। हर साल एक लाख से अधिक विदेशी छात्र पढ़ने के लिए न्यूजीलैंड आते हैं। इसमें भारतीय छात्रों की संख्या दूसरे नंबर पर है। भारत के चेन्नई में पैदा हुई 43 वर्षीया प्रियंका राधाकृष्णन इस समय न्यूजीलैंड की सरकार में मंत्री हैं। न्यूजीलैंड की तमाम सरकारी और प्राइवेट संस्थाओं में तमाम भारतीय उच्च पदों पर काम कर रहे हैं। न्यूजीलैंड के भारतीय मूल के सांसद डा.गौरव शर्मा ने संस्कृत में शपथ ली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में इस बात का उल्लेख कर के खुशी जाहिर की थी। यह सब कहने का मतलब यह है कि अपने देश के लोगों ने न्यूजीलैंड में अच्छी जगह बनाई है।

न्यूजीलैंड के लोग भी भारतीयों को मेहनती और अच्छा समझते हैं। न्यूजीलैंड ने अभी उनके देश के विकास में बड़ा योगदान करने वाले भारतीयों को सम्मानित किया है।

भारत के विदेश मंत्री एस.जयशंकर बीते बुधवार और गुरुवार को दो दिन के न्यूजीलैंड के दौरे पर गए थे। सामान्य संयोगों में कोई भी मंत्री या अन्य अधिकारी किसी भी देश के दौरे पर जाता है तो अपने समकक्ष से मिलकर बातचीत करता है। एस.जयशंकर ने भी न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री नानिया महुता से मिल कर बात तो की ही, साथ ही न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से भी वन-टू-वन मुलाकात की। एस.जयशंकर से मिलने के लिए जेसिंडा गुलाबी रंग की चुनरी वाली भारतीय ड्रेस पहन कर आई थीं।

न्यूजीलैंड में जेसिंडा और एस.जयशंकर का फोटो वायरल हुआ था और न्यूजीलैंड में रहने वाले भारत मूल के लोग जेसिंडा की ड्रेसिंग पर बहुत खुश हुए थे। भारतीयों के सम्मान के समय जेसिंडा ने कहा था कि इस देश के विकास में भारतीय लोगों ने जो भूमिका अदा की है, वह काबिलेतारीफ है।

हमारा देश इस समय आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इस महोत्सव को एस.जयशंकर की हाजिरी में न्यूजीलैंड में भी मनाया गया। न्यूजीलैंड की सरकार ने इंडिया@७५ का विशेष पोस्टल स्टैंप निकाला है। विदेशमंत्री एस.जयशंकर ने न्यूजीलैंड में मोदी@२० : ड्रिम्स मिट डिलिवरी नामक पुस्तक का लोकार्पण भी किया है। सिख समुदाय के साथ प्रधानमंत्री के लगाव के बारे में पुस्तक हार्टफेल्ट : द लिगसी आफ फेथ का भी विमोचन किया गया। न्यूजीलैंड के वेलिंग्टन में नए दूतावास की बिल्डिंग की ओपनिंग भी की गई। एस.जयशंकर ने न्यूजीलैंड में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के बारे में खुल कर बात की।

उन्होंने कहा कि रूस और यूक्रेन के युद्ध के दौरान जोपोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर हमले का टेंशन बना था। तब दुनिया के तमाम देशों ने भारत से यह अपील की थी कि आप रूस को समझाओ कि वह ऐसा कुछ न करे। न्यूजीलैंड इंटरनेशनल लेबल पर किसी इश्यू पर भारत के पक्ष में खड़ा रहता है। चीन के मुद्दे पर न्यूजीलैंड ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है। चीन के सामने न्यूजीलैंड ने अनेक बार नाराजगी व्यक्त की है। अलबत्ता, चीन के साथ न्यूजीलैंड के व्यावसायिक संबंध यथावत हैं। पिछले अप्रैल महीने में चीन ने सोलोमन आईलैंड के साथ सुरक्षा समझौता किया था। न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया, दोनों ने चीन के इस कदम पर नाराजगी और चिंता व्यक्त की थी। न्यूजीलैंड का दौरा पूरा कर विदेशमंत्री एस.जयशंकर आस्ट्रेलिया के दौरे पर निकल गए थे।

आस्ट्रेलिया और चीन के बीच इस समय छत्तीस का आंकड़ा है। आस्ट्रेलिया चीन के मुद्दे पर खुलेआम भारत के साथ है। क्वाड यानी कि क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलाग में भारत, अमेरिका और जापान के साथ आस्ट्रेलिया भी सदस्य है। क्वाड के ये चारों देश जब भी मिलते हैं, तब चीन को घेरने पर सब से पहले चर्चा होती है। आस्ट्रेलिया की नौसेना द्वारा सितंबर में 14 देशों की नौसेना के साथ युद्धाभ्यास आयोजित किया गया था। अपने नौसेना का युद्धक जहाज आईएनएस सतपुड़ा ने भी इस अभ्यास में हिस्सा लिया था। यह युद्ध अभ्यास चीन को संदेश देने के लिए था कि हम सब साथ हैं, इसलिए तुम मर्यादा तोड़ने की गलती मत करना।

भारत की कूटनीतिक चाल की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। भारत ने रूस और यूक्रेन वाॅर में जो स्टैंड लिया, उसके लिए अमेरिका अंदरखाने से नाराज है। भारत ने पूरी दुनिया के सामने अपना रुख स्पष्ट कर दिया कि भारत पहले से युद्ध के विरोध में है। भारत का मानना है कि युद्ध से किसी का भला हुआ नहीं है। अमेरिका ने रूस पर असंख्य प्रतिबंध लगा दिए, इसके बावजूद भारत ने रूस से अपने संबंध नहीं तोड़े। उलटा रुस से तेल की खरीदारी बढ़ा दी। संभावना थी कि तमाम देश इस मुद्दे पर भारत को बदनाम करने की कोशिश करेंगे। पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों और विदेशमंत्री जयशंकर हों या कोई दूसरा मंत्री या अधिकारी हो, किसी भी देश से जो भी बात होती है, स्पष्ट होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई कोआपरेशन आर्गेनाइजेशन की बैठक में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की उपस्थिति में कहा था कि अब युद्ध का युग नहीं रहा। भारत अंतरराष्ट्रीय संबंध में बैलेंस रख रहा है। अलबत्ता, न्यूट्रल रहना भी आसान नहीं है। अमेरिका भारत के साथ अच्छे संबंधों की बात करता है। पर पिछले कुछ समय से अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट से गुजर रहा है। जब अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप थे, तब उन्होंने पाकिस्तान की मदद करना बंद कर दिया था।

बाइडेन ने भी ट्रंप की पाॅलिसी चालू रखी थी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से तो बाइडेन फोन पर भी बात नहीं करते थे। जब से शाहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तब से बाइडेन पाकिस्तान के प्रति नरम पड़े हैं। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड अमेरिका के करीब हैं। भारत का इस समय यह प्रयास है कि भारत अपना स्टैंड स्पष्ट करता रहे। यही सोच कर न्यूजीलैंड में एस.जयशंकर ने रूस और यूक्रेन की बात छेड़कर कहा कि भारत शांति चाहता है और इसीलिए समाधान के लिए मध्यस्थता भी करने को तैयार है। एस.जयशंकर का न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिय का दौरा आगे चल कर भारत के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा।

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