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बदहाली का शिकार हुआ बरूआ का अंत्येष्टि स्थल, मार्ग, शौचालय, स्नानगृह, हैण्डपम्प झाड़ियों से घिरा, चार वर्ष में सिर्फ दो शवों का हुआ अंतिम संस्कार

बिधूना। प्रदेश सरकार ने ग्रामीणों को अपनों की अंतिम संस्कार के लिए इधर-उधर न जाना पड़े इसलिए गांव में अंत्येष्टि स्थल बनवा कर राहत देने का काम किया था। मगर कुछ जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के चलते बदहाली के शिकार होते जा रहे अंत्येष्टि स्थलों को देखकर शासन की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। ऐसा ही कुछ हाल विकास खंड बिधूना की ग्राम पंचायत बरुआ के अंत्येष्टि स्थल का है। जिसका निर्माण 24 लाख 36 हजार रूपए खर्च कर कराया गया था। जहां बड़ी-बड़ी झाड़ियां व खरपतवार उगी है।

शासन की तरफ से आयी धनराशि से बरूआ के अंत्येष्टि स्थल में ग्रामीणों के बैठने के लिए टीनशेड, विश्राम स्थल, शौचालय, स्नानघर, इंटरलाकिंग, शवदाह स्थल, लकड़ी भंडार, हैंडपंप, पानी की टंकी आदि का निर्माण किया कराया गया है। ग्राम पंचायत की तरफ से राज्य वित्त की धनराशि से इसका निर्माण वर्ष 2016-17 में कराया गया था। मगर हालात यह हो गये है कि अब अंत्येष्टि स्थल में इतनी गंदगी व झाड़ झंखाड़ उग आयी है कि कोई उधर से गुजरने से भी डरता है।

क्योंकि अंत्येष्टि स्थल के अंदर पूरे परिसर में व बाहर झाड़-झंखाड़ उगे हुए हैं। जहां जहरीले जीव-जंतुओं की मौजूदगी रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा भी बना रहता है। गांव में किसी की मृत्यु हो जाने पर उनके परिजन शव का अंतिम संस्कार या तो खेतों में या किसी घाट पर जाकर करते हैं। बड़ा सवाल यह है कि यदि गांव में इसकी जरूरत नहीं है तो क्यो लाखों रुपये खर्च किये गए है और अगर इसकी जरुरत है तो इसमें दाह संस्कार क्यो नहीं होते हैं। अंत्येष्टि स्थल पर समय से साफ सफाई एवं रख रखाव की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है।

मार्ग, शौचालय, स्नानगृह, हैण्डपम्प झाड़ियों से घिरा – मुख्य मार्ग से अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए कच्चा मार्ग है, जो झाड़ियो में घिरा है। नल व समर सिविल पानी की टंकी की व्यवस्था है, मगर नल भी पूरी तरह झाड़ में गुम हो गया है। स्नानगृह और शौचालय को भी घास और झाड़ियों ने चारो तरफ से घेर रखा है। पूरा परिसर घास का मैदान प्रतीत होता है।

सिर्फ दो शवो का ही हुआ अंतिम संस्कार – ग्राम बरुआ के अंत्येष्टि स्थल में अभी तक सिर्फ दो लोगो की अंत्येष्टि की गई है। अन्य ग्रामीण अंत्येष्टि स्थल पर आने से कतरा रहे है। यहां पर अभी तक केवल बेटा सिंह पुत्र राजेन्द्र सिंह एवं बिट्आ कुंवर पत्नी अपरवल सिंह के शवों की अंत्येष्टि हुई है।

ग्रामीण बोले – ग्रामीण छोटे सिंह, बृजेश सिंह व देवेन्द्र कुमार ने बताया कि अंत्येष्टि स्थल महज एक शो पीस बन कर रह गया है। क्योंकि लोग अभी भी अपनी पुरानी प्रथा में जी रहे हैं। ग्रामीण आज भी गांवो में बने अंत्येष्टि स्थल पर दाह संस्कार करने की अपेक्षा अपने खेतों पर या गंगा जी के घाटों पर दाह संस्कार करना पंसद करते हैं।

ग्रामीण राजेश कुमार एवं सोनू सेंगर का कहना है कि अंत्येष्टि स्थल पर दाह संस्कार के लिए लोग नहीं जाते हैं, फिर भी साफ सफाई तो होनी चाहिए। परिसर के अंदर बड़े बड़े झाड़ और घास खड़ी है। बाहर भी गेट से लेकर पूरे रास्ते पर खरपतवार व झाड़ियां है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जब अंत्येष्टि स्थल का परिसर साफ था तब कुछ दबंग लोग अपनी पकी हुई फसलों व अनाज के लिए भी इसका इस्तेमाल करते थे।

प्रधान पति ने कहा – प्रधान निर्मला देवी के पति महेश चन्द्र ने बताया कि अंत्येष्टि स्थल की साफ सफाई को पिछली कार्ययोजना में दिया था और नई कार्ययोजना में भी इसको सम्मलित किया गया है। जल्द ही इसकी साफ-सफाई का काम पूरा किया जाएगा। कहा कि परिसर में बने कमरों की चाबियां अभी तक उन्हें नहीं सौंपी गयीं हैं। मांगने पर खो जाने की बात कही जाती है।

रिपोर्ट – संदीप राठौर चुनमुन

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