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राज्यपाल ने बढ़ाया दिव्यांग विद्यार्थियों का मनोबल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द के माध्यम से स्वाभिमान और सामर्थ्य का सन्देश दिया था। उनका कहना था कि शारीरिक रूप से विकलांग लोगों में ईश्वर प्रदत्त कोई न कोई विशेष क्षमता भी होती है। उन्हें इस क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने की सुविधा व अवसर मिलना चाहिए। केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके दृष्टिगत अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया। सरकारी भवनों व यातायात के साधनों में उनके लिए विशेष व्यवस्था की कार्य योजना पर अमल किया गया। आर्थिक सहायता का भी प्रावधान है। इस क्रम में राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल ने दिव्यांग विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाया। कहा कि प्रकृति ने यदि आपको चुनौतियां दी हैं तो आपको अपनी असीमित क्षमताओं के विकास और विस्तार का हौसला भी दिया है।

टोक्यो पैरालंपिक में प्राप्त हुए बारह पदक इस आत्मविश्वास के प्रतीक है। आइडिया इन्नोवेशन,जोखिम लेने का जज्बा,किसी भी काम को पूरा करने की जिद से उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने दिव्यांग जनों को शिक्षित बनाने पर बल दिया। कहा कि शिक्षा के माध्यम से उनको राष्ट्रीय मुख्यधारा में जोड़ने तथा देश के विकास में उनके योगदान को बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

दिव्यांगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बहु विषयक शोध को प्रोत्साहित करना चाहिये। आनंदीबेन पटेल ने डॉ शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। कहा कि यह विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों की शिक्षा व योग्यता को उत्कृष्ट कर रहा है।

इसके माध्यम से कुछ अक्षमताओं के रहते हुए भी वह अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं। इस विश्वविद्यालय से शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरान्त उपाधि धारकों में एक नवीन ऊर्जा एवं आत्मविश्वास का संचार हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद व्यक्तियों के जीवन को बचाने के लिए मृत्यु के बाद अंगदान जैसे सामाजिक कार्यों से लोगों को जोड़ना चािहए। युवा और बड़ों को देहदान,अंगदान व रक्तदान के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने की जरूरत है। अंगदान से एक व्यक्ति चार से पांच व्यक्तियों को जीवनदान दे सकता है। यह मानवता का विषय है।

पर्यावरण संरक्षण

आनन्दी बेन ने पर्यावरण संरक्षण का भी सन्देश दिया। कहा कि बिगड़ता पर्यावरण चिन्ता का विषय है। इसलिये हम सभी को अपने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि जब हम प्रकृति का संरक्षण करते हैं,तो बदले में प्रकृति हमें भी संरक्षण और सुरक्षा देती है।

प्रकृति के लिये खतरा तभी पैदा हेाता है। जब हम उसके संतुलन से छेड़छाड़ करते हैं। छेड़छाड़ का ही परिणाम है कि आज हमारी अनेक नदियां प्रदूषित हो रही है तथा बहुत सी नदियां विलुप्त होने की कगार पर हैं।

वृक्षारोपण को अपनी प्राथमिकता में शामिल करना चाहिए। अपनी नदियों और जलश्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने की आवश्यकता है। बाराबंकी में विलुप्त होती कल्याणी नदी के पुनर्जीवन कर स्थानीय लोगों ने उदाहरण पेश किया है।

आनन्दी बेन ने कहा कि मुझे भी कल्याणी नदी के पुर्नोद्धार करने का सहभाग प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से अपील की कि लखनऊ की जीवन धारा कही जाने वाली गोमती नदी को बचाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य योजना बनाकर कार्य करें।

हिमानी का सम्मान

आनन्दी बेन ने राजकीय स्पर्श विद्यालय की दृष्टिबाधित तीस बालिकाओं,तथा बचपन डे-केयर सेंटर की पाँच बालिकाओं को फल एवं मिष्ठान का वितरण किया। विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा तथा कौन बनेगा करोड़पति टी.वी.शो में एक करोड़ रूपये जीतने वाली हिमानी बुंदेला को सम्मानित किया।

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

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