Breaking News

राष्ट्रीय चेतना की भव्य अभिव्यक्ति

लखनऊ। कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी के आग्रह पर थाली ताली नाद का नया अध्याय कायम हुआ था। अब अपने ढंग के प्रकाश प्रदर्शन ने भी इतिहास बना दिया। मोदी के विरोधियों को इस पर विचार करना चाहिए। वह मोदी पर हमले में लगे रहते है, उनके प्रत्येक कदम में कमियां निकालते है, जबकि मोदी जनभावना को समझते हुए आगे निकल जाते है। जनमानस को समझना किसी पद मात्र से सम्भव नहीं होता।

मोदी का महत्व केवल प्रधानमंत्री के कारण नहीं है। उनकी कार्यशैली व जीवनशैली आमजन को प्रभावित करती है। इस धरातल पर उनकी बराबरी करने दुर्लभ है। यही कारण है विपक्ष ने नेता उनके मुकाबले बहुत पीछे रह जाते है। गौर कीजिए कि मोदी के आह्वान का विरोध करने वाले नेता इस मुद्दे पर किस मुकाम पर है। क्या ऐसा नहीं लगता कि उन्हें जनमानस ने जबाब दिया है।

पहले ताली थाली के द्वारा जबाब दिया गया। अब दीप प्रज्ज्वलन ने भी इसी को दोहराया है। संविधान के अनुसार लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री बनाया जाता है। लेकिन मोदी की तरह जनमानस का विश्वास सबको नसीब नहीं होता।

भारतीय चिंतन में अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का सन्देश दिया गया। इस विचार को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। यह तथ्य केवल रात्रि के अंधकार तक सीमित नहीं है। रात्रि का अंधकार तो प्राकृतिक व स्वभाविक है। लेकिन आत्मतत्व को अंधकार से निकालने का प्रयास सदैव चलता है। चलना चाहिए। तभी उदार व मानवीय चिंतन प्रकाशित होता है। वर्तमान परिस्थिति में इस पर विचार आवश्यक है।

भारत सहित पूरी दुनिया में कोरोना का कहर व्याप्त है। इसका मुकाबला सामूहिक प्रयास से हो सकता है। लॉक डाउन के पालन के अलावा इससे बचाव का अन्य कोई उपाय नहीं है। इसके लिये आत्मसंयम व आत्मतत्व पर व्याप्त अंधकार का दूर होना अनिवार्य है। इसी के साथ समाज हित के विपरीत कार्य करने का जो अज्ञान है उसका भी समापन होना चाहिए।

भारत में ऐसे अज्ञानी मजहबी भी सक्रिय है। इस कारण भारतीय समाज की जिम्मेदारी बढ़ गई है। शायद इन सबको ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात्रि नौ बजे नौ नौ मिनट के लिए दीपक, टार्च, मोमबत्ती,मोबाइल से प्रकाश करने का आह्वान किया। समाज के मनोविज्ञान को मोदी ने समझा है। सामूहिक रूप से प्रकाश करने से राष्ट्रीय एकता का भाव जागृत हुआ है। यही मोदी का उद्देश्य था। यही भावना कोरोना से मुकाबले में कारगर साबित होगा।

भारतीय दर्शन में……असतो मा सदगमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥
की कामना की गई।
अर्थात हम सभी को असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।।

Loading...


प्रधानमंत्री ने बाइस मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान कोरोना सेवा कर्मियों के सम्मान में ताली,थाली और घंटी आदि बजाने का आग्रह किया था। उस समय भी विपक्ष के अनेक नेताओं ने इसका मजाक बनाया था। लेकिन जनता ने जिस उत्साह से इसपर अमल किया था, उसने इन नेताओं की बोलती बंद कर दी थी। मोदी के इस आग्रह को भारत ही नही दुनिया के अनेक देशों ने अपनाया। यह कई देशों के लिए मिसाल बन गया। आज सभी देश इसे दोहरा रहे हैं। ताली थाली,घंटी बजाने से प्रकट हुआ कि देश संकट के वक्त एकजुट हो सकता है।

PM मोदी ने कहा था कि लॉकडाउन के वक्त आप सभी की सामूहिकता चरितार्थ होती नजर आ रही है। लेकिन विपक्ष के नेताओं ने इससे कोई सबक नहीं लिया। वह मोदी के प्रकाश प्रज्ज्वलन के आग्रह पर भी तंज कसते रहे। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शायराना अंदाज में कहा कि बाहर भी कम न होगी रोशनी दिलों में उजाले बनाए रखिए। बात सही थी। लेकिन मोदी राष्ट्रीय एकजुटता के लिए इससे भी आगे तक कि सोच रहे थे। आमजन ने भी इसे उसी रूप में स्वीकार किया।


कांग्रेस के कपिल सिब्बल, शशि थरूर, पी. चिदंबरम आदि मोदी पर हमला न बोलें ,यह हो नहीं सकता। ये सभी सरकार के कार्यो की दुहाई दे रहे थे। स्पष्ट है कि इनके सोचने की यह निर्धारित सीमा है। इन्होंने अपनी इस मानसिकता को ही उजागर किया। जबकि मोदी सरकार के दायित्वों के निर्वाह के साथ जनता के सामूहिक प्रयास को भी सुनिश्चित करना चाहते थे। चिदम्बरम, सिब्बल का तंज था कि कोरोना की लड़ाई दीपक से।

ये नेता समझ ही नहीं सकते कि यह कोरोना से दीपक की लड़ाई नहीं थी। यह भारतीय समाज के कोरोना से बचाव की इच्छशक्ति एकजुट प्रयास का उद्घोष था। कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन ने कहा कि वह दीपक नहीं जलाएंगे। अब वह आत्मचिंतन करें कि आमजन से कितना दूर हो गए है। मोदी में आमजन को साथ लेकर चलने की क्षमता है। सरकार ने अपने दायित्व का निर्वाह किया। एक लाख सत्तर हजार करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज दिया।

 

ग्यारह हजार करोड़ रुपये राज्यों को दिए गए। सरकार की प्रेरणा से निजी कंपनियां पीपीई किट, वेंटिलेटर, वेंटिलेटर का प्रोटोटाइप, मल्टी यूज़र वेंटिलेटर, बायो सूट हेड गियर आदि युद्ध स्तर पर बनाने लगती है। कई संस्थान और वैज्ञानिक वायरस की रोकथाम और उपचार को लेकर दिन रात काम करने लगते है। जाहिर है कि जनमानस में नरेंद्र मोदी का असर कायम है।

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

Loading...

About Samar Saleel

Check Also

राज्यसभा: 18 सीटों के लिए इस दिन होंगे चुनाव, EC ने किया तारीखों का ऐलान

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 18 सीटों के लिए होने वाले चुनाव की तारीखों का ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *