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पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह का प्रस्ताव, प्रदेश के प्रमुख चौराहों का नामकरण “कामधेनु चौक” किया जाए

• लोक परमार्थ सेवा समिति उत्तर प्रदेश की मांग, गाय को राज्यमाता का दर्जा दिया जाये

• इलाहाबाद हाईकोर्ट का सुझाव, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए

उत्तर प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह (Animal Husbandry Minister Dharampal Singh) ने शुक्रवार (19 मई) को बरेली में घोषणा की कि प्रदेश के प्रमुख चौराहे कामधेनु चौराहे के नाम से जाने जाएंगे। इसके पीछे वजह यह है कि कि गौ माता को और अधिक सम्मान दिया जा सके। क्योंकि सनातन धर्म में गाय को गौ माता के रूप में पूजा जाता है। धर्मपाल ने कहा कि कामधेनु के नाम से प्रमुख चौराहों के नाम रखने के पीछे मंशा यह भी है कि गायों को बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सके। इसके साथ ही गौकशी की घटनाओं पर लगाम लगाने में भी यह कदम सार्थक साबित होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश व्यापी जन जागरुकता अभियान चला कर गायों को बचाने, उनको संरक्षित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

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अमूमन प्रदेश के शहरों के चौराहों पर नेताओं, महापुरुषों की प्रतिमाएँ लगी दिखती हैं, लेकिन अब प्रदेश के कई जनपदों सहित बरेली की तहसील आंवला में भी किसी एक चौराहे पर गाय की प्रतिमा स्थापित कर उस चौराहे का नाम कामधेनु चौक रखा जाएगा। यह योजना मंत्री धर्मपाल सिंह ने ही बनाई है।

उन्होंने एक समाचार पत्र से खास बातचीत में बताया कि गाय हमारी माता है, हमारी संस्कृति भी इसी पर निर्भर है। गाय का दूध अमृत समान है। इन सभी बातों को समझते हुए गौ माता का सम्मान बढ़ाने की दिशा में योगी सरकार अनेक काम कर रही है। इस प्रतिमा की स्थापना से नगर की सुंदरता तो बढ़ेगी ही साथ ही गाय की प्रतिमा से सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होगा। हाल ही में प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्य नाथ ने धर्म-कर्म के क्षेत्र में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हुए बरेली में उच्च स्तर का ‘नाथ कारिडोर’ बनाने के निर्देश अफसरों को लखनऊ में बुला कर दिए थे।

पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के इस बयान का लोक परमार्थ सेवा समिति उत्तर प्रदेश के उपसचिव जितेंद्र सिंह, गौसेवक लालू भाई, मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरी आदि ने स्वागत करते हुए कहा है कि पशुधन मंत्री का यह कदम स्वागत योग्य है। लोक परमार्थ सेवा समिति और महंत देव्या गिरी एक लंबे अरसे से उत्तर प्रदेश में गाय को राज्यमाता का दर्जा दिए जाने की मांग करती रही हैं।

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इसके अलावा श्री मलूकपीठ के दीनबंधु दास जी महाराज ने निगोहां के उत्तरावा गांव में बीते 14 अप्रैल 2023 को बंगलौर जाते समय कुछ समय वरिष्ठ समाज सेवी शैलेंद्र सिंह के निवास स्थान पर रुककर गौ पूजन कर श्रद्धालु भक्तो को गौ माता की महिमा बताई और कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ गौ माता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सराहनीय कार्य कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि गौ माता को उत्तर प्रदेश में राज्य माता का दर्जा मिलना चाहिए। इसके अलावा कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ साथ कई साधु संतो ने भी उत्तर प्रदेश में गौ माता को राज्य माता का दर्जा दिए जाने की मांग की है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 01 सितम्बर 2021 को एक मामले की सुनवाई करते हुए गाय को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव देते हुए कहा कि ‘जब गाय का कल्याण होगा, तभी देश का कल्याण होगा। सरकार को संसद में बिल लाकर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना होगा और उनके खिलाफ कड़ा कानून बनाना होगा जो गाय को नुकसान पहुंचाने की बात करते हैं।’

इलहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश पर महाभारत और रामायण से लेकर ईसा मसीह और बाबर, अकबर, हुमायूं तक का जिक्र आया. हाईकोर्ट ने कहा, ‘वेद शास्त्र, पुराण, रामायण, महाभारत में गाय का महत्व बताया गया है। इसी कारण गाय हमारी संस्कृति का आधार है। स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा है था कि एक गाय अपने जीवनकाल में 4,10,440 लोगों के लिए एक समय का खाना जुटाती है और उसके मांस से केवल 80 लोग ही अपना पेट भरते हैं।’

कोर्ट ने आगे कहा, ‘हिंदू धर्म के अनुसार गाय में 33 कोटी के देवी-देवता वास करते हैं। हजारों साल पुराने वेदों में भी गाय का उल्लेख है। भगवान श्रीकृष्ण को सारा ज्ञान गौचरणों से मिला है। भगवान राम के पूर्वज राजा दिलीप नंदिनी गाय की पूजा करते थे। भगवान शंकर का वाहन नंदी गाय का ही वंशज था। भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवतगीता में कहा है धेनुनामस्मि कामधेनू मतलब गायों में मैं कामधेनु हूं।’ कोर्ट ने ये भी टिप्पणी की कि ‘ईसा मसीह ने कहा है कि एक गाय या बैल को मारना मनुष्य के मारने के समान है। वैज्ञानिक भी ये मानते हैं कि एक गाय ही है जो ऑक्सीजन ग्रहण करती है और ऑक्सीजन ही उत्सर्जित करती है।’

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में बाबर, अकबर और हुमायूं का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा, ‘न सिर्फ हिंदुओं बल्कि मुसलमानों ने भी गाय को संस्कृति का अहम हिस्सा मानते हुए अपने शासनकाल में गायों के वध पर रोक लगाई थी। तार्क-ए-गौकशी, जिसमें गोहत्या न करने की बात लिखी गई है, जिसमें अकबर, हुमायूं और बाबर ने अपनी सल्तनत में गोहत्या न करने की अपील की थी, क्योंकि इससे हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है।’

…इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए

हाईकोर्ट ने कहा, ‘गाय को एक राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और गौरक्षा को हिंदुओं के मौलिक अधिकार में रखा जाए क्योंकि हम जानते हैं कि जब देश की संस्कृति और उसकी आस्था पर चोट होती है तो देश कमजोर होता है। चाणक्य ने लिखा है कि किसी भी देश को नष्ट करना है तो सबसे पहले उसकी संस्कृति को नष्ट कर दो, देश अपने आप नष्ट हो जाएगा।’ इसलिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।

रिपोर्ट-दयाशंकर चौधरी

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