आपका ध्यान किधर है ? बड़के पत्रकार इधर है !

लखनऊ- उत्तरप्रदेश के लखनऊ सीमा मे प्रवेश करते ही आपको एक शब्द बड़ा आम मिलेगा भौकाल । लखनऊ से बाहर वाले व्यक्तियों के लिए यह बड़ा ही अटपटा शब्द है परंतु लखनऊवासी इस शब्द से भलीभाँति परिचित है । झूठी शान बघारने के लिए यह शब्द अराजक तत्वो के लिए तकियाकलाम है । इस भौकाल को बनाए रखने के लिए  अराजकतत्व समाज के परितिष्ठित तमगो का सहारा लेते है । इनसब मे सबसे ज्यादा पुलिस व प्रेस का दुरुपयोग होता है । गाड़ी की चालान से बचने के लिए कुछ अराजक तत्व तरह तरह के जुगाड़ अपनाते है । इनमे से कुछ पुलिस का लोगो , मानवाधिकार का लोगो , या फिर प्रेस लिखा कर गाड़ी से फर्राटा भरते है ।

ऐसे लोगो से पुलिस भी गच्चा खा जाती है और ये लोग इसे भौकाल शब्द का नाम देते है । हद तो तब हो गयी जब प्रेस को भी सरकारी रूप दे दिया गया ।  आशियाना थानाक्षेत्र मे एक दोपहिया वाहन फर्राटा भरते हुये नज़र आया । जिसपर GOVT PRESS लिखा हुआ था । समर सलिल संवाददाता ने इस वाहन को अपने कैमेरे मे कैद किया । हालांकि इस बावत वाहन चालक कोई भी सतोषजनक उत्तर नहीं दिया । अब आप खुद  इस  पत्रकार की अहमियत व हकीकत तय करे ।

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