‘रिमेम्बेरिंग पार्टीशन’ : लखनऊ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, हर साल 14 अगस्त को मनेगा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ 

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ‘रिमेम्बेरिंग पार्टीशन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। भारत सरकार ने प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त के दिवस को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के उपलक्ष्य में मानाने का निर्णय किया है।

‘रिमेम्बेरिंग पार्टीशन’ : लखनऊ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, हर साल 14 अगस्त को मनेगा ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ 

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित थे। हृदय नारायण दीक्षित ने विभाजन पर शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आईजीएनसीए की पहल की प्रशंसा की। कहा कि जहां आज भारत की क्षमताओं का विस्तार हुआ है, वहीं मूल्यों में भी उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है, सकारात्मक पहल और नई शुरुआत हो रही है। विभाजन की इस त्रासदी को विस्मृत करना देश के साथ विश्वासघात होगा। यूरोपीय लेखों में निर्दिष्ट, राष्ट्र की अवधारणा के प्रति आरंभ से ही पूर्वाग्रह रहा है।

इतिहास बोध के प्रति भारत की दृष्टि सदैव से अलग रही है, और इसका सतत बोध सदैव होता रहना चाहिए. भारत का विभाजन न केवल एक भौगोलिक विभाजन था, बल्कि यह एक दर्दनाक घटना थी, जिसमें लाखों लोगों का पलायन और नरसंहार सम्मिलित था। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय के लिए इस इतिहास को भूलना कठिन है, और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके प्रति सभी को सचेत रहना चाहिए।

कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने राष्ट्रीय महत्व के ऐसे विषयों पर नए अकादमिक शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। कला संकाय के डीन प्रो. अरविंद अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रो.विनय कुमार राव ने विभाजन के सन्दर्भ उत्तर पूर्वी क्षेत्र के ऐतिहासिक अध्ययन विषयक अपने निष्कर्षों को साझा किया। पुरातात्विक निष्कर्ष बताते हैं कि सांस्कृतिक रूप से पूर्वोत्तर हमेशा से हिन्दू परंपराओं का वाहक रहा है।

प्रो. अरूप चक्रवर्ती ने ‘अनसंग हीरोज’ पर उत्तर प्रदेश सरकार की पहल और प्रत्येक जिले के स्तर पर इतिहास के दस्तावेजीकरण की सराहना की।प्रो.आर के मिश्रा ने कहा कि भारत का दूर-दूर तक विस्तार हुआ है। भारत का विभाजन एक बहुत ही जटिल घटना थी जिस पर विविध दृष्टिकोणों से शोध किया जाना था। प्रो. कमल कुमार के धन्यवाद ज्ञापित किया।

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