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कोरोना काल में गाय को गले लगाने के लिए लोग दे रहे 15,000 हजार तक

   दया शंकर चौधरी

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए लॉकडाउन में लोग घरों में कैद हैं। ऐसे में डिप्रेशन और एंग्जायटी की समस्या भी आम होती जा रही है। वैसे तो लोग अपने-अपने तरीके से इससे जूझ रहे हैं, लेकिन अमेरिका में इसके लिए अनोखे तरकीबें ईजाद की गई हैं। यहां मानसिक शांति के लिए गाय को गले लगाया जा रहा है। कोरोना काल में अमेरिका में गाय को गले लगाने के लिए लोग पैसे दे रहे हैं। कांग्रेस नेता मिलिंद देवडा़ द्वारा ट्विटर पर शेयर किए गए सीएनबीसी के एक वीडियो में बताया गया है कि अमेरिका में लोग गाय को गले लगाने के लिए एक घंटे के लिए 200 डॉलर तक का भुगतान कर रहे हैं।

उन्होंने लिखा कि साफ है कि भारत इसमें आगे है। यहां गायों को 3000 सालों से पूजा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि गाय को गले लगाने का एहसास घर पर एक बच्चे या पालतू जानवर को पालने के समान है। एक हग हैप्पी हार्मोन ऑक्सीटोसिन, सेरोटोनिन और डोपामाइन को ट्रिगर करता है, जिससे कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) को कम करता है। ये तनाव के स्तर, चिंता और अवसाद के लक्षणों को कम करता है।

कोर्टिसोल हार्मोन क्या है, महत्त्व और फायदे

क्या आपने आहार या एक्सरसाइज में कोई बदलाव न करने के बावजूद खुद को अत्यधिक तनावग्रस्त, थका हुआ महसूस किया है और वजन बढ़ने पर भी ध्यान दिया है? अगर जवाब हाँ है तो संभव है कि आपके शरीर में कोर्टिसोल का स्तर गड़बड़ हो सकता है। अधिक स्पष्ट रूप से कहा जाए तो, ये स्तर बहुत अधिक हो सकता है।

इस संबंध में विशेषज्ञ चिकित्सक डा. माधवी अग्रवाल का कहना है कि कोर्टिसोल का उत्पादन जीवन के लिए आवश्यक है, ये हमें अपने आस पास के माहौल के प्रति प्रेरित, जागृत और अनुक्रियाशील (तुरंत और सकारात्मक प्रतिक्रिया देने के योग्य) रखने में मदद करता है, रक्त परिसंचरण में असामान्य रूप से कोर्टिसोल का स्तर अधिक बने रहना खतरनाक हो सकता है और लंबे समय में समस्याओं को बढ़ा देता है। कोर्टिसोल को अक्सर “तनाव हार्मोन” (स्ट्रेस हार्मोन) कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिक तनाव के समय शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है। हालांकि, कोर्टिसोल तनाव के दौरान जारी एक हार्मोन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। कोर्टिसोल और शरीर पर इसके प्रभाव को समझने से आपको अपने हार्मोन को संतुलित करने और अच्छे स्वास्थ्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

कोर्टिसोल, ग्लुकोकोर्टिकोइड्स नामक हार्मोन के समूह से संबंधित है। इस समूह के हार्मोन कोशिकाओं में मेटाबॉलिज्म (चयापचय) के विनियमन में शामिल होते हैं और वे शरीर में अलग-अलग प्रकार के तनाव को नियंत्रित करने में भी हमारी सहायता करते हैं। कम मात्रा में कोर्टिसोल के स्राव के कई लाभ होते हैं। यह आपको शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों के लिए तैयार करता है, ट्रॉमा के समय आपके शरीर में ऊर्जा का विस्फोट उत्पन्न करता है और जब आपका शरीर संक्रामक बीमारियों का सामना करता हैं तो यह प्रतिरक्षा गतिविधि को बढ़ाता है। इस कोर्टिसोल से प्रेरित सक्रिय स्थिति के बाद, आपका शरीर एक आवश्यक विश्राम की प्रतिक्रिया से गुजरता है।

कोर्टिसोल का उत्पादन तब समस्या बन जाता है जब आप निरंतर या लंबे समय तक तनाव की स्थिति में रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कोर्टिसोल का निरंतर उत्पादन होता है। कोर्टिसोल के लंबे समय तक अधिक स्तर पर बने रहने के कारण आपको हाई ब्लड शुगर, हाई बीपी, संक्रमण से लड़ने की क्षमता में कमी आदि समस्या हो सकती है और शरीर में वसा के जमाव में वृद्धि हो सकती है, जिससे वजन बढ़ सकता है। दूसरे शब्दों में, कम समय के लिए यदि कोर्टिसोल स्राव में वृद्धि होती है तो यह हमें जीवित रहने में सहायता कर सकता है, लेकिन लंबी अवधि तक अगर इसका स्तर ऊंचा रहता है तो प्रभाव एकदम विपरीत भी हो सकते हैं।

तनाव दूर करने में मदद करेंगे यह उपाय

दुनिया भर में तनाव एक विकराल रूप लेता जा रहा है। इसके चलते लोग मानसिक रोगों का शिकार भी बन रहे हैं। हालांकि इससे निपटने के लिए कई तरीके भी आजमाए जा रहे हैं। विशेष रूप से ऑफिस कर्मचारियों के लिए यह उपाय बहुत कारगर साबित हो सकते हैं।

आंख बंद कर गहरी सांसें लें: जब काम के दौरान तनाव हो तो अपनी सीट पर बैठकर आंखें बंदकर गहरी सांसें लें। यह एक ऐसा व्यायाम है जो अंदर शांति लाता है और तनाव व डर को दूर करता है। विशेषज्ञों के अनुसार डीप ब्रीथिंग करने से मन को सुकून मिलता है।

म्यूजिक सुन तनाव से बचें: जब काम के दौरान ज्यादा तनाव हो तो टी ब्रेक लें और चाय पीते हुए अपने पसंदीदा गाने सुनें। कुछ देर के लिए अपने कंप्यूटर की स्क्रीन से दूर रहें। इससे आप कुछ देर बाद तरोताज़ा महसूस करेंगे और काम करने के लिए फिर तैयार हो जाएंगे।

मेडिटेशन करना बहुत जरूरी: हर ऑफिस में एक्टिविटी कार्नर होता है जहां लोग थोड़ा रिलैक्स कर सकें। यहां जाकर 10 मिनट मेडिटेशन करें। धयान की मुद्रा में बैठें और आंखें बंद करके मेडिटेशन करें।

सबके साथ मिलकर लें भोजन का आनंद आखिरी बार आपने अपने डेस्क से बाहर जाकर कब लंच किया था। डेस्क से उठें और कैंटीन या कैफेटेरिया में जाकर सबके साथ लंच करें। इससे आपको काम से आराम भी मिल जाएगा और लोगों के साथ हंसी मजाक कर मन भी प्रसन्न भी हो जाएगा।

10 अच्छी चीजों के बारे में लिखें: विशेषज्ञों के अनुसार रोज एक डायरी में 10 ऐसी चीजों के बारे में लिखें जो आपको खुशी देती हो। कुछ ऐसी बातों के बारे में लिखें जिनके लिए आप भगवान के शुक्रगुजार हों। इससे आप जीवन की अच्छी बातों पर फोकस कर पाएंगे और आपका तनाव कम होगा।

इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने में आयुर्वेद की अहम भूमिका

इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने में आयुर्वेद अहम भूमिका निभा रहा है। घरेलू उपाय इसमें अधिक कारगर साबित हो रहे हैं। संक्रमण से बचने के लिए रोग प्रतिरोधिक क्षमता का मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसे सिर्फ दवा ही नहीं, बल्कि घरेलू उपायों से भी बढ़ाया जा सकता है।

आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य रामनाथ धीमान ने कोविड-19 से सुरक्षा एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय बताते हुए कहा है कि मसाले में सोंठ 50 ग्राम, छोटी पीपर 30 ग्राम, काली मिर्च 30 ग्राम, दालचीनी 100 ग्राम, तेजपत्ता 50 ग्राम, लौंग 20 ग्राम व मुलेठी 50 ग्राम शामिल कर लें। सोंठ और मुलेठी को कूटकर व तेजपत्ते के डंठल तोड़कर और छोटी इलायची को छिलका सहित उक्त सारी सामग्री को दरदरा पीस लें। जब भी चाय बनाएं या दूध पकाएं इस पाउडर को एक चम्मच जरूर डालें। साथ में तुलसी, अदरक और हल्दी भी डालें।

भोजन में इनका भी करें प्रयोग: सब्जी में देसी पका लाल टमाटर, सहजन (मुनगा), मूंग दाल , परवल, तरोई, सोयाबीन, पनीर, करेला आदि को प्राथमिकता दें। साथ ही सफेद नमक के स्थान पर सेंधा या काला नमक तथा चीनी के स्थान पर पुराना गुड़ या शहद का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।

कोरोना उपचाराधीन को गाढ़ा सूप बेहद जरूरी: वैद्य रामनाथ धीमान ने बताया कि टमाटर और सहजन (मुनगा) के गाढ़े सूप में जीरा व सौंफ भूनकर, काला नमक व काली मिर्च डालकर दिन में दो बार दें। इसके अलावा मांसाहारी व्यक्ति अंडा और चिकन या मटन सूप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

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