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कांग्रेस व गुपकार पर योगी का प्रहार

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 370 अस्थाई उपबन्ध के रूप में था। लेकिन इसको अनावश्यक रूप से स्थाई की तरह माना जा रहा था। अपने को सेक्युलर साबित करने के लिए इसका समर्थन आवश्यक था। ऐसे लोगों ने इस अनुच्छेद से होने वाले नुकसान पर कभी विचार नहीं किया। दो तीन सियासी परिवार या अलगाववादी इसका लाभ उठा रहे थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने साहस दिखाया। संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए इसको हटा दिया। इसके बाद इस पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं था।

लेकिन फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती परिवार की सियासत इसी से चल रही थी। उनके पास कोई मुद्दा नहीं बचा। ये पाकिस्तान व चीन से भी गुहार लगा रहे है। गुपकार के माध्यम से इस मसले को उठाने का राष्ट्रविरोधी कृत्य कर रहे है। कांग्रेस का नेशनल कॉन्फ्रेंस से गठबंधन है। योगी आदित्यनाथ ने इस पर बेबाक टिप्पणी की है। कहा कि कांग्रेस का हाथ अलगाववादियों के साथ है। गुपकार समझौते में कांग्रेस की संलिप्तता है।

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इसके माध्यम से जम्मू कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने की साजिश की जा रही है। योगी ने कहा कि देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व को माफी मांगनी चाहिये। जम्मू कश्मीर में विपक्षी नेताओं का संगठन गुपकार देश की संप्रभुता और अखंडता से खिलवाड़ की कुत्सित कोशिश कर है। गुपकार में कांग्रेसी नेताओं की सहभागिता है। इसके नेता दिल्ली में कुछ बोलते हैं और घाटी में कुछ और। देश में सबसे अधिक समय तक शासन करने वाली राष्ट्रीय पार्टी का यह दोहरा चरित्र निंदनीय है। कांग्रेस नेतृत्व से अनुच्छेद 370 के मसले पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

कांग्रेस ने हमेशा ही ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को खंडित करने का प्रयास किया है। अब जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़संकल्पों से यह सपना साकार हो रहा है। कांग्रेस के नेताओं को यह नहीं सुहा रहा। शत्रु देश से मदद लेने की बात करने वाले फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती जैसे नेताओं से जुड़ना कांग्रेस के लिए शर्मनाक है। संविधान की शपथ लेकर केंद्रीय मंत्री रहे पी.चिदम्बरम और गुलाम नबी आजाद जैसे कांग्रेसी नेता अनुच्छेद 370 की बहाली की बात करते रहे हैं। यह लोग हमेशा से ही अलगववादी और आतंकवादी विचारों को प्रेरित और प्रोत्साहित करते रहे हैं। अब ऐसा नहीं चलेगा। समझौते में शामिल लोगों को जम्मू कश्मीर में विकास स्थानीय निकाय समृद्धि पसन्द नहीं। क्योंकि ऐसा होने पर उनके अलगाववादी विचारों का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। जिनको अपने हित में ये लोग लगातार खाद पानी देते रहे हैं।

रिपोर्ट-डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
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