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श्रीगणेश पूजा: भारत में फतवा जारी……मुस्लिम बहुल इंडोनेशिया में श्रीगणेश सब पर भारी

    दया शंकर चौधरी

उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ के रोरावर थाना क्षेत्र में एक मुस्लिम परिवार ने भगवान श्रीगणेश की मूर्ति को अपने घर में स्थापित किया है। भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी यह महिला पहले भी भगवान श्रीराम और अन्य देवी देवताओं की मूर्ति अपने घर में रख चुकी है और पूजा करती है। रूबी आसिफ खान नाम की महिला के द्वारा गणेश की मूर्ति स्थापित करने के बाद वह मौलानाओं के निशाने पर आ गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवबंद के *फतवा मोबाइल सर्विस* के चेयरमैन अरशद फारूकी ने वीडियो जारी कर कहा है कि ‘इस्लाम सिर्फ अल्लाह की पूजा, अल्लाह की परस्ती सिखाता है और अगर कोई उसके खिलाफ करता है तो वह अपने मजहब के खिलाफ करता है। उसके खिलाफ वही हुकुम जारी होगा जो मजहब के खिलाफ करने वालों का होता है।’ इस पर रूबी आसिफ खान ने पलटवार करते हुए कहा है कि ‘ऐसी सोच वाले लोग असली मुसलमान नहीं है, वह जिहादी है।’ बावजूद इसके, फतवे का सार संक्षेप बिल्कुल स्पष्ट है, यानी मजहब के खिलाफ करने वालों के अंजाम की खबरें आये दिन भारत के अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं। आइए जानते हैं कि भारत से इतर अन्य देशों में श्रीगणेश और अन्य देवी देवताओं के बारे में लोगों में कितनी सहिष्णुता है।

हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है यानी किसी भी शुभ कार्य से पहले इनकी पूजा जरूर की जाती है। लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि अन्य कई देशों में भी भगवान श्रीगणेश की पूजा की परंपरा है। ये देश हैं- चीन, जापान, इंडोनेशिया, थाईलैंड और श्रीलंका। इनके अलावा गणेशजी की प्राचीन मूर्तियां अफगानिस्तान, ईरान, म्यांमार, नेपाल, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, मंगोलिया, ब्रुनेई, बुल्गारिया, मेक्सिको आदि देशों में भी मिल चुकी हैं। आगे जानिए किस देश में श्रीगणेश की पूजा कौन-से नाम से की जाती है…।

इंडोनेशिया के नोट पर छपी है श्रीगणेश की तस्वीर

इंडोनेशिया एक मुस्लिम देश हैं लेकिन यहां भारतीय धर्म का अच्छा-खास प्रभाव देखने को मिलता है। यहां श्रीगणेश के साथ-साथ भगवान श्रीराम, हनुमान आदि देवी-देवताओं की पूजा भी की जाती है। यहां के नोट पर भी श्रीगणेश जी की तस्वीर है। इंडोनेशिया में भगवान श्रीगणेश को ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

ज्वालामुखी के मुहाने पर भगवान श्रीगणेश

इंडोनेशिया में 141 ज्वालामुखी में 130 अभी भी सक्रिय हैं, उन्हीं में से एक है माउंट ब्रोमो। यह पूर्वी जावा प्रान्त में ब्रोमो टेंगर सेमेरु राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है। इस ऊँचे ज्वालामुखी पर भगवान श्रीगणेश की एक भव्य प्रतिमा मौजूद है। लोगों का मानना है यह 700 साल पुरानी है, और इसे उनके पूर्वजों ने स्थापित किया था। जावानीस लोगों का मानना है कि ये प्रतिमा स्थानीय लोगों की रक्षा करती है। इसीलिए यहां कितनी भी विकराल परिस्थिति क्यों न हो, लोग भगवान की पूजा जारी रखते हैं।

थाईलैंड में कहलाते हैं फ्ररा फिकानेत

थाईलैंड में श्रीगणेश को ‘फ्ररा फिकानेत’ के रूप में पूजा जाता है। यहां इन्हें सभी परेशानियों को दूर करने वाला और सफलता का देवता माना जाता है। नए व्यवसाय और शादी आदि खास अवसरों पर उनकी पूजा मुख्य रूप से की जाती है। गणेश चतुर्थी के साथ ही वहां गणेश जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।

दुनिया की सबसे ऊँची गणेश प्रतिमा

थाईलैंड के क्लोंग केउन जिला, चाचोएंगसाओ जगह पर 40000 वर्ग मीटर भूमि पर बनी भगवान गणेश की प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊँची गणेश प्रतिमाओं में शामिल है। इसे इतना ऊँचा बनाने का मकसद था ताकि जमीं पर नजर बनाई जा सके और स्थानीय जीवन शैली व अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल बिठाया जा सके। कांस्य की बनी इस प्रतिमा को 2008 में बनाना शुरू किया गया और 2012 में यह बनकर तैयार हो गयी।

भारत-थाईलैंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

कई यूरोपीय और भारतीय विद्वानों ने दक्षिण-पूर्व एशिया को ‘सुदूर भारत’, ‘ग्रेटर इंडिया’, या ‘हिंदू या भारतीय राज्य’ के रूप में भी उल्लेख किया है। दक्षिण-पूर्व एशिया के भारतीयकरण का गहराई से अध्ययन करने वाले पहले शख्स एक फ्रैंच विद्वान जॉर्ज कोड्स थे। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के सांस्कृतिक और व्यावसायिक संबंधों का एक लंबा इतिहास है। भारत की प्राचीन संस्कृति और पाली भाषा में इन देशों को अलग-अलग नाम से पुकारा गया है। मसलन थाईलैंड को ही “कथाकोष, सुवर्णभूमि या सुवर्ण द्वीप” के नाम से उल्लेखित किया गया. यही वजह है कि अभी हाल ही में भारत-थाईलैंड की नौंवीं ज्वाइंट कमीशन बैठक में भाग लेने गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैंकॉक में देवस्थान जाकर दर्शन किए।

वास्तव में देवस्थान थाई शाही दरबार का शाही ब्राह्मण कार्यालय है और थाईलैंड में हिंदुओं का आधिकारिक केंद्र। इसीलिए एस जयशंकर देवस्थान गए और दर्शन करने के बाद फ्रा महाराजगुरु विधि से आशीर्वाद भी लिया। एस जयशंकर का देवस्थान जाना ही बताता है कि भारत-थाईलैंड एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को साझा करते हैं। देवस्थान के दर्शन के बाद एस जयशंकर ने ट्वीट में भी दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों के लंबे इतिहास पर प्रकाश भी डाला।

जापान के कंगीतेन देवता

जापानी भाषा में भगवान गणेश को ‘कंगीतेन’ के नाम से पुकारा जाता है। दरअसल जापान की राजधानी टोक्यो के असाकुसा क्षेत्र में जापानी बौद्ध धर्म के लकड़ी के बने सुन्दर मंदिरों की श्रृंखला है। ये जापान के हजारों साल पुराने मंदिरों में शुमार है। उन्हीं में से एक यहां 8वीं शताब्दी का मत्सूचियामा शोडें मंदिर भी है जो जापानी देवता कंगीतेन (गणेश ) को समर्पित है। जापान में इस तरह के 250 से अधिक कंगीतेन देवता के मंदिर है।

आयरलैंड का विक्टर्स वे मैडिटेशन गार्डन

आयरलैंड के पार्क में अधिकांश काले ग्रेनाइट की बनी मूर्तियां लोगों को काफी सुकून देती है। इस पार्क में ऐसी मूर्तियों को ही बनाया गया जिससे लोग शांति का एहसास कर सके। पार्क में स्थित 8 मूर्तियां भगवन गणेश को समर्पित हैं जिनमें वे हाथी पर नाचते हुए, संगीत वाद्ययंत्र बजाते हुए और पुस्तक पढ़ते हुए दिखाई देते हैं। भगवान गणेश को बुद्धि का देवता कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी इन सभी मूर्तियों को तमिलनाडु में तैयार किया गया।

नेपाल के गणेश मंदिर

राजधानी काठमांडू समेत पूरे नेपाल में भगवान गणेश के अनेक भव्य मंदिर मौजूद हैं। लेकिन काठमांडू घाटी में सबसे लोकप्रिय मंदिरों में शुमार ‘कमलादि गणेश जी’ को “श्वेत गणेश” भी कहा जाता है। मंगलवार को इस मंदिर में काफी चहल पहल रहती है। इस दिन श्रद्धालु दूर दूर से आकर भगवान की आराधना करते हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में मिली गणेश मूर्ति

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के पास गार्देज में भगवान गणेश की मूर्ति को पाया गया। इसके संरक्षण के लिए कई हिन्दू तीर्थयात्रियों ने प्रयास किया। इसे खिंगल नाम के एक राजा ने समर्पित किया था। भगवान गणेश की इस प्रतिमा के मिलने से अफ़ग़ानिस्तान में हिन्दू संस्कृति के पुरातन अवशेषों का दावा और भी मजबूत हो गया है।

श्रीलंका में कहलाते हैं पिल्लयार

भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका के तमिल बहुल क्षेत्रों में काले पत्थर से निर्मित भगवान पिल्लयार (गणेश) की पूजा की जाती है। श्रीलंका में गणेश के 14 प्राचीन मंदिर स्थित हैं। कोलंबो के पास केलान्या गंगा नदी के तट पर स्थित केलान्या में कई प्रसिद्ध बौद्ध मंदिरों में भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित हैं। भगवान श्रीगणेश के इस नाम का उल्लेख शास्त्रीय तमिल साहित्य में भी मिलता है।

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