देश को कई हिस्सों में बांटना चाहते हैं राहुल गांधी : Arun Jaitley

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारी जारी किए गए घोषणा पत्र को लेकर भाजपा नेता अरूण जेटली ने आरोप लगाया कि चुनावी घोषणापत्र में देश तोड़ने का एजेंडा है और नासमझी में वादे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसमें कुछ वादे ऐसे हैं जिन्हें लागू नहीं किया जा सकता और कुछ बेहद खतरनाक विचार हैं जो देश को छोटे छोटे हिस्सों में बांटने (बाल्कनीकरण) का काम करेंगें।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मित्रों एवं टुकड़े टुकड़े गैंग से

अरूण जेटली ने कहा,बाल्कनीकरण का ऐसी नीतियों के परिणाम के रूप में उल्लेख किया जाता है जो क्षेत्र में भू राजनैतिक विभाजन की स्थिति उत्पन्न करती हैं। कांग्रेस ने एक समिति बनाई थी लेकिन ऐसा लगता है कि कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने मित्रों एवं टुकड़े टुकड़े गैंग से सहयोग लिया।

आफस्पा में संशोधन करने और उसकी समीक्षा करने

वित्त मंत्री ने कहा,इस घोषणा पत्र में ऐसी बातें हैं जो देश को तोड़ने वाली हैं और देश की एकता के खिलाफ हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस घोषणापत्र में एक अध्याय जम्मू कश्मीर पर है लेकिन इसमें कश्मीरी पंडितों का कोई उल्लेख नहीं है। इसमें नियमों एवं कायदों की समीक्षा की बात कही गई है। जेटली ने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार की जम्मू कश्मीर को लेकर जो ऐतिहासिक भूल थी, जिसे देश माफ नहीं कर सकता, विपक्षी दल उसी एजेंडा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें आफस्पा में संशोधन करने और उसकी समीक्षा करने की बात कही गई है। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब उनकी प्रदेश सरकारों ने भी इस विचार का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देशद्रोह कानून को हटाने की बात कही है और जो पार्टी ऐसी बात करती है उसे एक भी वोट पाने का अधिकार नहीं है।

गरीबों के साथ नारों के जरिये खिलवाड़

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व आज जिहादियों और माओवादियों के चंगुल में है। उन्होंने आरोप लगाया कि नासमझी में राहुल गांधी ऐसे वादे करते हैं जिन्हें लागू नहीं किया जा सकता। जेटली ने कहा कि इस पार्टी का इतिहास गरीबों के साथ नारों के जरिये खिलवाड़ करने का रहा है और देश उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है।

गरीब इंसान के कपड़े, चप्पल और एयर कंडीशनर पर

जीएसटी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी एक बार सिंगापुर गए थे,सिंगापुर में कोई गरीबी रेखा के नीचे है ही नहीं तो वहां एक कर ढांचा चलता है। भारत जैसे देश में जहां काफी संख्या में लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं, वहां एक कर स्लैब कैसे चल सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि क्या गरीब इंसान के कपड़े, चप्पल और एयर कंडीशनर पर एक ही टैक्स लगेगा!

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